NHRC: विजया भारती कल से कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में संभालेंगी कार्यभार, गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मिश्रा 2019 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में संशोधन के बाद एनएचआरसी प्रमुख पद पर नियुक्त होने वाले पहले गैर-सीजेआई थे।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य विजया भारती सयानी दो जून से आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगी। केंद्र सरकार ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई है। सयानी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा की जगह लेंगी। एक जून को उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया। मिश्रा आयोग के आठवें अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। जून 2021 में उन्हें नियुक्त किया गया था।
गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश
गृह मंत्रालय ने सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा कि राष्ट्रपति, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 7(1) के तहत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य विजया भारती सयानी को 02 जून 2024 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत करती हैं। सायनी तब तक अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहेंगी, जब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती।
पहले गैर सीजेआई अध्यक्ष थे मिश्रा
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मिश्रा 2019 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम में संशोधन के बाद एनएचआरसी प्रमुख पद पर नियुक्त होने वाले पहले गैर-सीजेआई भी थे। उन्होंने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति एच एल दत्तू का स्थान लिया था। मिश्रा सात जुलाई, 2014 को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए थे। वे सितंबर 2020 में पदमुक्त हुए थे।
फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर दिया जोर
हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कोर समूह की बैठक हुई। इस दौरान, न्यायमूर्ति (सेनि) अरुण कुमार मिश्रा ने बैठक को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि भारत में तकनीकी रूप से उन्नत फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की संख्या शीघ्र जांच के लिए बढ़ाने की जरूरत है। एनएचआरसी ने एक बयान में बताया कि बुधवार को आपराधिक न्याय प्रणाली सुधारों पर एक कोर ग्रुप की बैठक आयोजित की गई है। मिश्रा ने आगे कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में फोरेंसिक जांच एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फोरेंसिक जांच में देरी से न्याय में देरी होती है। उन्होंने कहा कि आज कल साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसे में नई चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटल फोरेंसिक को भी मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने सरकारी अभियोजकों, फोरेंसिक टीमों और पुलिस के बीच व्यवस्थित समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में मिश्रा ने कहा कि अदालत के फैसले समझना आम आदमी के लिए मुश्किल हो जाता है। क्योंकि यह अधिकांश अंग्रेजी में दिए जाते हैं।