गुजरात में फिर विजय रुपाणी होंगे सीएम, हिमाचल के मुख्यमंत्री पर सस्पेंस बरकरार
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विजय रुपाणी गुजरात के फिर से मुख्यमंत्री होंगे। गांधीनगर में भाजपा विधायक दल की शुक्रवार को हुई बैठक में उन्हें नेता चुना गया। वहीं हिमाचल प्रदेश में सीएम के नाम पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो सका है। जयराम ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है लेकिन प्रेम कुमार धूमल का गुट उनके नाम पर राजी नहीं है।
केंद्रीय पर्यवेक्षकों वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा महासचिव सरोज पांडे की मौजूदगी में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी 61 वर्षीय रुपाणी को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया। नितिन पटेल दोबारा उपमुख्यमंत्री होंगे। सूत्रों के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को नई सरकार शपथ ग्रहण कर सकती है।
आनंदीबेन पटेल को हटाए जाने के बाद रुपाणी को पिछले साल अगस्त में राज्य की बागडोर सौंपी गई थी। रुपाणी जैन समुदाय से आते हैं जिसकी गुजरात में आबादी करीब 5 फीसदी है। पहले ऐसी अटकलें थीं कि चुनाव में कम सीटें आने की वजह से रुपाणी की जगह किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लेकिन पार्टी हाईकमान ने रूपाणी पर ही भरोसा जताया।
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निर्दलीय विधायक का भाजपा को समर्थन
गुजरात के लूनावाड़ा से निर्दलीय विधायक रतनसिंह राठौड़ ने भाजपा को बाहर से समर्थन देने का एलान किया है। इससे 182 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या 100 हो गई है।
रुपाणी पर दांव क्यों
- नेतृत्व में बदलाव कर भाजपा दबाव में आने का संकेत नहीं देना चाहती
- साफ-सुथरी छवि के साथ ही भरोसेमंद लोगों पर विश्वास जताया
- जाति पर आधारित राजनीति की जगह विकास को प्रमुखता देना
चुनौतियां
- पाटीदार आरक्षण आंदोलन को शांत कर पटेलों को फिर से अपने पाले में लाना
- किसानों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पैठ बढ़ाना
- हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तिकड़ी से निपटना
- 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की सीटों को बरकरार रखना
हिमाचल में घमासान, भाजपा हाईकमान तय करेगा नाम
हिमाचल प्रदेश में बड़ी जीत के बावजूद अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं हो सका है। जयराम ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल दोनों गुट अपने-अपने नेताओं को सीएम बनाने की मांग कर रहे हैं।
शुक्रवार को केंद्रीय पर्यवेक्षकों निर्मला सीतारमण और नरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में ही दोनों खेमों के समर्थक आपस में भिड़ गए और जमकर नारेबाजी की। सहमति न बनने के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक दिल्ली लौट आए। अब भाजपा हाईकमान सीएम पर फैसला लेगा।