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Global South Summit: समापन सत्र में बोले पीएम मोदी- यूएन सुरक्षा परिषद में तत्काल मौलिक सुधार की जरूरत

Fri, 13 Jan 2023 11:15 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Fri, 13 Jan 2023 11:15 PM IST
सार

Voice of Global South Summit: पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी ग्लोबलाइजेशन का समर्थन करते हैं। भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। लेकिन विकासशील देश ऐसा ग्लोबलाइजेशन चाहते हैं जिससे जलवायु संकट या ऋण संकट उत्पन्न न हो।

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Developing countries desire globalisation that does not create climate crisis PM Modi at Global South Summit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट (Voice of Global South Summit) के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक 'ग्लोबल साउथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने का एलान किया। पीएम मोदी ने इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और ब्रेटन वुड्स संस्थानों सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों में तत्काल मौलिक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक 'ग्लोबल साउथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करेगा। साथ ही उन्होंने एक नए प्रोजेक्ट 'आरोग्य मैत्री' का भी एलान किया।

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उन्होंने कहा कि मुझे इस नए प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए खुशी हो रही है। इसके तहत भारत प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट का सामना कर रहे विकासशील देशों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराएगा। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो दिन में इस समिट में 120 से ज्यादा विकासशील देशों ने शिरकत की। यह ग्लोबल साउथ की सबसे बड़ी वर्चुअल सभा है। पिछले तीन साल खासकर हमारे जैसे विकासशील देशों के लिए कठिन रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम पर जोर दिया है।
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पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि नए साल की शुरुआत एक नई आशा का समय है। हम सभी ग्लोबलाइजेशन का समर्थन करते हैं। भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। लेकिन विकासशील देश ऐसा ग्लोबलाइजेशन चाहते हैं जिससे जलवायु संकट या ऋण संकट उत्पन्न न हो। वहीं हम ऐसा ग्लोबलाइजेशन चाहते हैं जिससे वैक्सीन का असमान वितरण न हो, जिसमें समृद्धि और मानवता की भलाई हो।
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अन्य देशों के विचारों को भी जी-20 की चर्चा में मिले जगह
इससे पहले, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में 'मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण' विषय सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि जी-20 के बाहर के देशों के विचारों और दृष्टिकोण को भी इस वैश्विक समूह के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में चर्चा और परिणामों में शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा उन वैश्विक पहल को प्रोत्साहित किया है, जो विकासशील देशों के हित और सरोकार का समर्थन करती हैं। भारत 2023 में जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। यह सम्मेलन नए विचारों को जन्म देने और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को जी-20 फोरम में लाने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा। शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि जी-20 शिक्षा कार्य समूह में हम मूलभूत साक्षरता और गणना से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साथ ही तकनीक-सक्षम शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने, भविष्य के संदर्भ में आजीवन सीखने और उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान एवं नवाचार को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि जी-20 के बाहर के देशों के विचारों और दृष्टिकोणों को विशेष रूप से विभिन्न कार्यक्षेत्रों में चर्चाओं और परिणामों में शामिल किया जाना चाहिए। हम मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा पर संबंधित देशों के साथ आपके विचारों को सुनने और विशेष प्रथाओं से सीखने की उम्मीद कर रहे हैं।

बता दें, भारत ग्लोबल साउथ के देशों को एक साथ लाने के लिए शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। साथ ही उन्हें यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों से संबंधित अपनी सामान्य चिंताओं को साझा करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है।

समिट में कुल 125 देशों ने भाग लिया
ग्लोबल साउथ समिट के समापन के बाद विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हमने दो दिवसीय वर्चुअल ग्लोबल साउथ समिट की अनूठी पहल की। शिखर सम्मेलन का समग्र विषय 'आवाज की एकता और उद्देश्य की एकता' था। प्रधानमंत्री ने उद्घाटन सत्र की मेजबानी की। उन्होंने कहा कि आठ मंत्रिस्तरीय सत्र हुए, कुल 125 देशों ने भाग लिया। यह वास्तव में ग्लोबल साउथ समिट की आवाज थी। हम विकासशील देशों के साथ निकट संपर्क में रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता सभी विकासशील देशों की भावनाओं का सम्मान करेगी। सभी देशों ने निमंत्रण स्वीकार किया। शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं द्वारा स्वास्थ्य, वित्त, प्रौद्योगिकी, विकासात्मक प्राथमिकताओं और वित्तीय समावेशन की सराहना की गई।


विदेश सचिव ने कहा कि जब विकास की चुनौतियों की विशिष्टताओं का संदर्भ दिया गया, तो यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि दुनिया जिन विकास चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से एक प्रमुख संदर्भ आतंकवाद और रूस-यूक्रेन संघर्ष के उत्पन्न प्रभाव सहित वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष से भोजन, ईंधन, उर्वरक असुरक्षा की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने के साथ अन्य चुनौतियां पैदा हुई हैं।

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