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New Delhi: 'कूटनीति को पुनर्जीवित करने के लिए नए दृष्टिकोण की जरूरत', उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कही यह बात
Fri, 03 Nov 2023 04:16 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 03 Nov 2023 04:16 PM IST
सार
चाणक्य रक्षा संवाद 2023 कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शिरकत की। संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, युद्ध के लिए तैयार रहना शांति का मार्ग है। एक राष्ट्र की ताकत सबसे प्रभावशाली रक्षा और निवारक है।
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वाराणसी में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चाणक्य रक्षा संवाद 2023 कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शिरकत की। शुक्रवार को कार्यक्रम में उन्होंने कहा, कूटनीति को पुनर्जीवित करने के लिए नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। बहुआयामी दृष्टिकोण, विचार, वकालत, आउटरीच, अनुनय और संवाद के संयोजन के साथ-साथ सतर्क और तैयार रहते हुए शांति प्राप्त करने और बनाए रखने के सर्वोपरि महत्व को रेखांकित किया।
संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, युद्ध के लिए तैयार रहना शांति का मार्ग है। एक राष्ट्र की ताकत सबसे प्रभावशाली रक्षा और निवारक है। धनखड़ ने सुरक्षा माहौल को बढ़ाने में अभिन्न घटकों के रूप में देश की सॉफ्ट पावर और आर्थिक ताकत का उपयोग करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम, सेमी-कंडक्टर, बायो-टेक, ड्रोन और हाइपरसोनिक्स जैसी गहरी प्रौद्योगिकियों के उद्भव ने युद्ध के चरित्र को फिर से लिखा है। इन क्षेत्रों की कुशलता और भविष्य की रणनीतिक समृद्धि और असफलता का निर्धारण करेगी। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता व्यक्त की कि वैश्वीकरण और आर्थिक परस्पर निर्भरता के बावजूद संघर्ष जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा आज असंख्य विशेषताओं और क्षमताओं का एक समूह है। सेना इसका सिर्फ एक हिस्सा है, उन्होंने ऐसे संकल्प खोजने के लिए एक मजबूत शक्ति गतिशील बनाने के लिए विभिन्न टुकड़ों को एक साथ आने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वर्तमान परिवेश में सटीक हो सके।
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संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, युद्ध के लिए तैयार रहना शांति का मार्ग है। एक राष्ट्र की ताकत सबसे प्रभावशाली रक्षा और निवारक है। धनखड़ ने सुरक्षा माहौल को बढ़ाने में अभिन्न घटकों के रूप में देश की सॉफ्ट पावर और आर्थिक ताकत का उपयोग करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा, एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम, सेमी-कंडक्टर, बायो-टेक, ड्रोन और हाइपरसोनिक्स जैसी गहरी प्रौद्योगिकियों के उद्भव ने युद्ध के चरित्र को फिर से लिखा है। इन क्षेत्रों की कुशलता और भविष्य की रणनीतिक समृद्धि और असफलता का निर्धारण करेगी। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता व्यक्त की कि वैश्वीकरण और आर्थिक परस्पर निर्भरता के बावजूद संघर्ष जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा आज असंख्य विशेषताओं और क्षमताओं का एक समूह है। सेना इसका सिर्फ एक हिस्सा है, उन्होंने ऐसे संकल्प खोजने के लिए एक मजबूत शक्ति गतिशील बनाने के लिए विभिन्न टुकड़ों को एक साथ आने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वर्तमान परिवेश में सटीक हो सके।
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