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गुजरात: नवरात्रि की रात नाबालिग से हुआ था सामूहिक दुष्कर्म, वडोदरा कोर्ट ने दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Mon, 31 Aug 2026 04:11 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 31 Aug 2026 04:11 PM IST
सार

वडोदरा में 2024 की नवरात्रि की रात नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपराध को बेहद गंभीर और जघन्य बताया। प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है और पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

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Vadodara Case: Five Convicts Get Life Imprisonment for henious crime of Minor During Navratri
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वडोदरा में 2024 की नवरात्रि की रात नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने सोमवार को पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इसे बेहद जघन्य अपराध बताया। मामला 4 अक्तूबर 2024 का है। उस समय पीड़िता की उम्र 16 साल थी। वह रात करीब 11 बजे लक्स्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मिलने गई थी। इसके बाद दोनों स्कूटी से भायली इलाके की ओर लौट रहे थे।
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कोर्ट ने पांचों को उम्रकैद और जुर्माना क्यों दिया?

अदालत ने 20 अगस्त को पांचों को सामूहिक दुष्कर्म, सबूत नष्ट करने और डकैती से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया था। सोमवार को सजा सुनाते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीएम पवार ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अभियोजन के मुताबिक, अदालत ने कहा कि महिलाओं की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है और महिला या नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म बेहद गंभीर अपराध है। कोर्ट ने यह भी कहा कि देवी अंबा को समर्पित नवरात्रि के दौरान हुई ऐसी घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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पांचों दोषियों ने वारदात को कैसे अंजाम दिया?

अभियोजन के अनुसार, आधी रात के करीब सुनसान सड़क पर दोपहिया वाहनों से आए पांच लोगों ने नाबालिग और उसके दोस्त को रोक लिया। आरोप है कि पांचों ने लड़की के दोस्त को रोककर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन भी लूट लिया और उसे विश्वामित्री नदी में फेंक दिया। मामले में दोषियों की पहचान मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख के रूप में हुई। इनकी उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है।

किन सबूतों ने दोषियों को सजा तक पहुंचाया?

विशेष लोक अभियोजक नयन सुखड़वाला के अनुसार, मामले में करीब 6,000 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल की गई थी। अभियोजन ने सीसीटीवी फुटेज, डीएनए सबूत और गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे। अभियोजन के मुताबिक, अदालत ने इन साक्ष्यों को स्वीकार किया और इन्हें मजबूत तथा संदेह से परे माना। अदालत ने कहा कि गुजरात में ‘बेटी बचाओ’ जैसी सरकारी योजना लागू होने के बावजूद इस तरह के अपराध को हल्के में नहीं देखा जा सकता।

सरकार पीड़िता को कितना मुआवजा देगी?

अदालत ने सरकार को पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया। अदालत ने माना कि यह रकम पीड़िता के साथ हुई घटना से पैदा हुए सदमे और सामाजिक परेशानी को खत्म नहीं कर सकती, लेकिन उसे कुछ राहत जरूर दे सकती है। इस मामले में तीन विशेष लोक अभियोजकों को नियुक्त किया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि टीम ने मिलकर मामले को अंजाम तक पहुंचाया। अदालत के फैसले के बाद पांचों दोषियों को उम्रकैद भुगतनी होगी, जिसका अर्थ उनके शेष जीवन तक कारावास है।
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