Vegetable Prices: नींबू-मिर्च के टोटके पर बेअसर महंगाई, 40,000 करोड़ रुपये का कारोबार दे रहा 60 लाख रोजगार
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
देश में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। कुछ राज्यों में तो टमाटर ही 150 से 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। अगर हरी मिर्च की बात करें तो उसने भी लोगों के आंसू निकाल दिए हैं। असम में तो हरी मिर्च 450-500 रुपये प्रति किलो के दाम पर बिक चुकी है। दूसरी जगहों पर इसके दाम 300-350 रुपये प्रति किलोग्राम रहे हैं। महंगाई की दौड़ में नींबू भी पीछे नहीं रहा। तीन-चार महीने पहले 10 रुपये में तीन नींबू मिल जाते थे। अब 10 रुपये में एक या दो नींबू मिल रहे हैं। 80 से 100 रुपये किलो बिकने वाला नींबू भी अब 150 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। महंगाई के बीच बाजार में 'नींबू-मिर्च' का टोटका, अपनी जगह बखूबी बनाए हुए है। दुकान, घर, दफ्तर या बड़े वाहनों पर नींबू-मिर्च टंगी हुई दिख जाती है। चाहे सप्ताह में दो दिन ही सही, लेकिन इस 'टोटके' का कारोबार सालाना 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस वजह से 60 लाख लोगों को रोजगार भी मिल जाता है।
यह भी पढ़ें: Vegetable Prices: टमाटर के बाद आलू-प्याज भी हो सकता है महंगा, अदरक-मिर्च समेत इन सब्जियों के बढ़े दाम
मंगलवार और शनिवार को लटकाते हैं टोटका
लोगों का मानना है कि नींबू-मिर्च टांगने से बुरी नजर नहीं लगती। इस टोटके में आमतौर पर सात हरी मिर्च और एक नींबू रहता है। टोटके की कीमत दस से बीस रुपये होती है। अगर कारोबार ठीक-ठाक है तो दुकान या प्रतिष्ठान मालिक रोजाना नींबू-मिर्च का इस्तेमाल करते हैं। छोटा मोटा धंधा करने वाले लोग यह टोटका, मंगलवार और शनिवार को मंगाते हैं। कुछ लोग इसे केवल शनिवार को ही लटकाते हैं। खास बात ये है कि कई सरकारी-गैर सरकारी संस्थान, बैंक, अस्पताल, दुकान, मॉल, शोरूम और रेहड़ी-फेरी वाले भी इस टोटके का इस्तेमाल करते हैं। धर्म जाति भले ही कुछ हो, मगर सभी कारोबारी यह टोटका लगाते हैं।
दिल्ली में ही 12 लाख से ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं
एक टोटके की कीमत दस से बीस रुपये होती है। अधिकांश शहरों में यह पंद्रह रुपये में मिल जाता है। रेहडी वाले दस रुपये में भी हासिल कर लेते हैं। दस रुपए वाले टोटके में नींबू बहुत छोटे आकार का होता है और मिर्चे कुछ सूखी हुई रहती हैं। जब रेट कम है तो मिर्चों का आकार भी छोटा हो जाता है। बीस रुपये की कीमत पर बड़ा एवं ताजा नींबू मिलता है, मिर्च भी हरी एवं बड़े आकार की रहती हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल बताते हैं कि दिल्ली में लगभग 12 लाख दुकानें या व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। अगर इनमें से अधिकांश दुकानों पर यह टोटका लगता है, तो उसके लिए कम से कम 6200 व्यक्ति इस काम में जुटते हैं। कई लोग अपने घरों एवं दफ्तरों पर भी नींबू मिर्च लटकाते हैं। एक व्यक्ति सुबह चार बजे उठकर करीब दो सौ टोटके तैयार करता है। इसके बाद वह व्यक्ति सुबह दस बजे तक करीब 170 दुकानों पर नींबू-मिर्च का टोटका लटका आता है।
देशभर में इतने रुपये पर पहुंचता है टोटके का कारोबार
कैट महासचिव के अनुसार, देशभर में आठ करोड़ से ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। यह संख्या तो उन दुकानों या व्यापारिक संस्थानों की है, जो कैट के साथ जुड़े हुए हैं। इनमें से अधिकांश दुकानों या प्रतिष्ठानों पर यह टोटका लगता है। इस हिसाब से करीब 80 करोड रुपये का कारोबार हो जाता हैं। देश में पांच करोड़ से अधिक हॉकर, रेहड़ी-फेरी वाले भी हैं। ये भी टोटका मंगवाते हैं। इनके चलते भी 'टोटके' से बीस करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हो जाता है। नतीजा, करीब पौने तीन लाख लोगों को रोजगार मिल जाता है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी इस टोटके का इस्तेमाल होता है। प्राइवेट बस-ट्रक पर यह टोटका रोजाना लगता है। ट्रक सुबह जहां भी खड़ा होता है, वहीं पर टोटका लगाने वाले पहुंच जाते हैं। करीब 85 लाख ट्रकों पर नींबू मिर्च प्रतिदिन लटकते हैं। इससे भी करीब आठ करोड़ रुपये का कारोबार हो जाता है। यहां पर डेढ़ लाख लोगों को काम मिल जाता है।
शास्त्र या पुराणों में इसका जिक्र नहीं
ज्योतिष की जानकारी रखने वाले पंडित जय गोविंद शास्त्री ने इस विषय में हुई बातचीत के दौरान कहा था, इस टोटके का शास्त्र या पुराणों में कोई जिक्र नहीं है। कुछ लोग इसे रोजाना अपने घर, दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान पर टांग लेते हैं। कई दुकानदार ऐसे भी हैं जो इसे मंगलवार और शनिवार को मंगाते हैं। यह भी कहीं लिखा नहीं है कि इसके लिए कौन सा दिन शुभ है और कौन सा नहीं। यह लोगों की अपनी इच्छा और सहुलियत पर निर्भर करता है कि वे इसे कब मंगवाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह जादू-टोने को काटता है, जबकि कुछ अन्य लोगों की सोच है कि यह व्यक्ति और उसके कारोबार को बुरी नजर से बचाता है। शास्त्री के मुताबिक, तंत्र विद्या में नींबू को बलि माना जाता है। पूजा के दौरान जो सामग्री इस्तेमाल होती है, उसमें जैसे जायफल या नींबू, आदि को जीवधारी बताया गया है। मैं इसे व्यक्तिगत तौर पर नहीं मानता, लेकिन मान्यता है कि नींबू का प्रयोग मारण के तौर पर भी किया जाता है।
यह है मान्यता
माना जाता है कि नींबू का खट्टा और मिर्च का तीखा स्वाद बुरी नजर वाले व्यक्ति की एकाग्रता भंग कर देता है। इसके चलते वह अधिक समय तक घर या दुकान को नहीं देख पाता है। जानकारों के मुताबिक, जब भी कोई व्यक्ति खट्टी चीज़ें जैसे इमली, नींबू आदि की ओर देखता है, तो उसे उनका स्वाद महसूस होता है। ऐसे में व्यक्ति का ध्यान अन्य चीजों से हटकर उन पर ही आ जाता है। इससे बुरी नजर वाले व्यक्ति की एकाग्रता भंग होती है और उसकी बुरी नजर का प्रभाव टल जाता है।