फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Valour stories of martyrs of mumbai attack 26 11

वीरगाथा: किसी ने निहत्थे ही आतंकी को पकड़ा, तो कोई खाना छोड़ ड्यूटी के लिए भागा; ऐसी है 26/11 के शहीदों की कहानी

Sun, 26 Nov 2023 01:14 AM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 26 Nov 2023 01:14 AM IST
विज्ञापन
सार
26/11 Mumbai Attack: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए आतंकी हमले की रविवार को 15वीं बरसी है। मुंबई हमले के दौरान आतंकियों ने 166 लोगों की जान ले ली थी। 
loader
Valour stories of martyrs of mumbai attack 26 11
26/11 आतंकी हमला - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

26 नवंबर को मुंबई आतंकी हमले के 15 साल पूरे हो गए हैं। आतंकवादियों ने ताज और ट्राइडेंट होटल के साथ ही छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हमला किया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। मगर देश के बहादुर जवानों और पुलिसकर्मियों ने आतंक के दहशतगर्दों का डटकर सामना किया और कई बेगुनाहों की जान बचाई थी। हालांकि, पांच बहादुरों को इस हमले में अपनी जान गंवानी पड़ी थी। आज हम आपको उन्हीं शहीदों के हौसलों की दास्तां बता रहे हैं।

हेमंत करकरे 
हेमंत मुंबई आतंकी निरोधी दस्ता यानी मुंबई एटीएस के प्रमुख थे। वह रात के समय खाना खा रहे थे, तभी उन्हें क्राइम ब्रांच से शहर में आतंकी हमला होने का फोन आया। वह अपने घर से निकले और एसीपी अशोक काम्टे, इंस्पेक्टर विजय सालस्कर के साथ मोर्चा संभाला। कामा अस्पताल के बाहर मुठभेड़ में आतंकी अजमल कसाब और इस्माइल खान ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं और वह शहीद हो गई। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

अशोक काम्टे
अशोक मुंबई पुलिस में एसीपी के पद पर तैनात थे। आतंकी हमले के समय वह एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की टीम का हिस्सा थे। कामा अस्पताल के बाहर मुठभेड़ में आतंकी इस्माइल खान ने उन पर कई राउंड गोलियां चलाईं। जिसमें से एक गोली उनके सिर पर लगी। घायल होने के बावजूद उन्होंने कुछ दुश्मनों को मार गिराया।

विजय सालस्कर
वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर सालस्कर का नाम एक समय मुंबई अंडरवर्ल्ड के लिए खौफ का दूसरा नाम हुआ करता था। उनकी पहचान एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर थी। जब मुंबई में हमला हुआ, उस वक्त विजय सालस्कर भी एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की टीम का हिस्सा थे। कामा अस्पताल के बाहर हुई मुठभेड़ में आतंकियों की गोली से वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

तुकाराम ओंबले
मुंबई पुलिस के इस एएसआई के हौसले की जितनी तारफी की जाए उतनी कम है। तुकाराम ने न केवल बिना हथियार के आतंकी अजमल कसाब का सामना किया, बल्कि आखिर में उसे पकड़ने में कामयाबी भी हासिल की। इस दौरान कसाब ने उनपर कई गोलियां चलाईं जिससे वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
आतंकी हमलों के दौरान मिशन ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो का नेतृत्व मेजर संदीप उन्नीकृष्णन कर रहे थे। वह 51 एनएसएजी के कमांडर थे। मेजर जब ताज महल पैलेस और टावर्स होटल के अंदर छिपे हुए आतंकियों से लड़ रहे थे, तभी एक आतंकी ने उनपर पीछे से वार किया जिससे वह घटनास्थल पर ही शहीद हो गए। 2009 में मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

इन पांच बहादुर जवानों और पुलिसकर्मियों के अलावा हवलदार गजेंद्र सिंह, नागप्पा आर. महाले, किशोर के. शिंदे, संजय गोविलकर, सुनील कुमार यादव और कई दूसरे लोगों ने भी बहादुरी की मिसाल पेश की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed