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10 साल के भीतर चार से पांच बार बिकी है वाड्रा की जमीन

Thu, 01 Sep 2016 05:07 AM IST
मयंक तिवारी, गुडग़ांव
मयंक तिवारी, गुडग़ांव Updated Thu, 01 Sep 2016 05:07 AM IST
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Vadra's land is sold Four to five times within 10 years
रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : file photo
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की जिस जमीन पर बवाल मचा है। उसकी खरीदारी में एक नहीं बल्कि कई-कई खामी उजागार हुई हैं। ढींगरा आयोग को किसानों की ओर से दिए गये बयान में राजस्व रिकार्ड में भी गोलमाल का खुलासा किया गया है। सूत्रों की माने, तो पूर्व मुख्यमंत्री पर गाज गिर सकती है।  
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शिकोहपुर गांव के रहने वाले किसान बदलू ने अपनी जमीन लक्ष्य प्रापर्टी राजस्थान के रहने वाले लक्ष्य प्रापर्टी के मालिक को कौडियो के दाम में बेच दी थी। जिसका इंतकाल 14 फरवरी 2006 को हुआ है। ल्क्ष्य प्रापार्टी से यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति की ओंकारेश्वर प्रापर्टी के नाम पर खरीदी गई है। 
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राबर्ट वाड्रा ने वर्ष 2008 में यह जमीन स्काई लाईट हास्पिटलिटी के नाम खरीदीं। जो हुडा के मास्टर प्लान में सेक्टर-84 में आती है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिकारी की ओर से उक्त जमीन पर लाइसेंस जारी करने के लिए पहले, तो नोटिफिकेशन कर सेक्टर की नेट प्लानिंग एरिया में जमीन छेड़छाड़ की गई है। लेकिन बाद में उसका लाइसेंस जारी कर दिया गया। तत्कालीन सरकार के इस खेल का फायदा अकेले वाड्रा की कंपनी को नहीं मिला है, बल्कि अन्य बिल्डरों को फाइल जमा करने का भी मौका मिल गया। प्रदेश सरकार ने इस जमीन का लाइसेंस दिया। जिसके बाद वाड्रा ने डीएलएफ को 58 करोड़ में यह जमीन बेच दी। 
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राजस्व रिकार्ड में हुई है कई बार छेड़छाड़

Vadra's land is sold Four to five times within 10 years
मानेसर के पूर्व सरपंच व किसान नेता कहते है कि पूरे प्रकरण में वाड्रा ने जमीन खरीदने का साढ़े 5 करोड़ रूपये व 45 लाख स्टांप ड्यूटी का पैसा कहा से दिया। इसका को कोई हिसाब नहीं है। उनकी कंपनी के खाते में 58 करोड़ रूपये आने की इंट्री हो रही है। पूरे प्रकरण में त्कालीन सरकार ने इस जमीन को वाड्रा को नजराने के रुप में दिया है। वह आसपास के किसानों के साथ जाकर अपना बयान आयोग को भी दजरश़ करा चुके हैं। 

उनका कहना है कि पूरे मामले में बिल्डर, सरकार, अधिकारी या वाड्रा जो भी दोषी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए। इस मामले में आयोग की ओर से दी गई रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका संदेह के घेरे में है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद उन पर कार्रवाई हो सकती है। 

राजस्व रिकार्ड में हुई है कई बार छेड़छाड़-
प्रदेश के वरिष्ठ आईएस अधिकारी अशोक खेमका भी इस जमीन के इंतकाल पर सवाल उठा चुके हैं। आयोग को दर्ज कराये बयान में मानेसर के पूर्व सरपंच ने यह बताया था कि इंतकाल में जिन नंबरों का जिक्र किया गया है वह तो शिकाहपुर की है ही नहीं। आयोग की रिपोर्ट में इस पर भी खुलासा होगा। 
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