उत्तराखंड संकट: राज्यपाल की सिफारिश को ही केंद्र बताएगा वजह
- हलफनामे की रिपोर्ट में दी गई जानकारियों को प्रमुखता से किया गया शामिल
- राज्यपाल ने मानी थी उत्तराखंड में संवैधानिक संकट खड़ा होने की बात
विस्तार
उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर जारी कानूनी जंग में जीत हासिल करने के लिए केंद्र सरकार राज्यपाल की रिपोर्ट को ही मुख्य हथियार बनाएगी। नैनीताल हाईकोर्ट के डबल बेंच के समक्ष 6 अप्रैल को पेश किए जाने हलफनामे में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के पक्ष में राज्यपाल की रिपोर्ट के सहारे ही केंद्र अपना बचाव करेगा।
गौरतलब है कि राज्यपाल ने अपनी दूसरी और तीसरी रिपोर्ट में राज्य में राजनीतिक अस्थिरता, संवैधानिक संकट खड़ा होने के साथ-साथ विपक्ष और कांग्रेस के बागियों की ओर से मतविभाजन की मांग को ठुकराए जाने का जिक्र किया था।
बहरहाल हलफनामा तैयार करने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। हालांकि जिस प्रकार राज्य में राष्ट्रपति शासन के साथ-साथ कांग्रेस के बागियों की सदस्यता का मामला भी कानूनी दांवपेंच में बुरी तरह उलझ गया है, उससे राज्य में जारी राजनीतिक संकट का तत्काल हल निकलने की संभावना नहीं है।
6 अप्रैल का फैसला केंद्र के हक में होगा
सूत्रों के मुताबिक करीब करीब पूरी तरह तैयार हो चुकेहलफनामे में राज्यपाल की रिपोर्ट का सबसे पहले और सबसे प्रमुखता से जिक्र किया गया है। इसके बाद 18 मार्च को मनी बिल पेश किए जाने के दौरान मतविभाजन को ठुकराए जाने और इस कारण उसी दिन रावत सरकार के असंवैधानिक हो जाने का जिक्र है।
हलफनामे में मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है। केंद्र अपने हलफनामे में यह भी कहेगा कि चूंकि मनी बिल पेश किए जाते समय आधे से अधिक विधायक ने मतविभाजन की मांग की थी, ऐसे में स्पीकर ने इसकी अनदेखी कर संवैधानिक संकट को जन्म दे दिया था।
उत्तराखंड मामले में सूत्रधार की भूमिका निभाने वाले पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के मुताबिक डबल बेंच केंद्र के पक्ष से सहमत होगा। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल ने ही राज्य में संवैधानिक संकट की बात स्वीकारी हो, तब केंद्र की ओर से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि मतविभाजन की मांग को ठुकराना, विधायकों की खरीद फरोख्त कर सरकार बचाने की कोशिश अब सार्वजनिक हो चुका है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि 6 अप्रैल का फैसला केंद्र के हक में होगा।