उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से चलता आ रहा है ये 'रिवाज', 20 सालों में बने 11 सीएम!
- भारतीय जनता पार्टी से लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी अपने मुख्यमंत्रियों को बीच कार्यकाल में बदला
- 25 दिन के राष्ट्रपति शासन के बाद 21 अप्रैल 2016 को एक बार फिर हरीश रावत महज एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। उसके बाद 19 दिन का राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
विस्तार
उत्तराखंड राज्य को बने हुए अभी 20 बरस ही हुए हैं, लेकिन इस राज्य में मुख्यमंत्रियों के पांच बरस का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन को बदलने की एक परंपरा सी बनी हुई है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को अगर छोड़ दिया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में यह परंपरा सबसे ज्यादा दिखी। हालिया उठापटक वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के घटनाक्रम से जोड़कर भी देखी जा रही है।
उत्तराखंड के इतिहास पर अगर नजर डालें, तो सबसे पहले 09 नवंबर सन 2000 को नित्यानंद स्वामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। नित्यानंद स्वामी अपना कार्यकाल 29 नवंबर सन 2001 तक ही पूरा कर पाते हैं। यानी नित्यानंद स्वामी एक साल भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नहीं रह पाए। उसके बाद 30 अक्टूबर 2001 भगत सिंह कोश्यारी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया जाता है। भगत सिंह कोश्यारी का कार्यकाल महज 122 दिन का ही रहा। दरअसल यह अंतरिम विधानसभा थी।
खंडूरी फिर कोश्यारी फिर खंडूरी
पहली विधानसभा के बाद में उत्तराखंड में जब दूसरी विधानसभा 2007 में बनी तो 07 मार्च 2007 को उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की ओर से भुवन चंद्र खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। खंडूरी का कार्यकाल महज दो साल चार महीने के करीब ही चला। भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व ने खंडूरी की जगह पर रमेश पोखरियाल को मुख्यमंत्री बनाया।
पोखरियाल उत्तराखंड में अपना कार्यकाल महज सवा दो साल ही पूरा कर पाए थे कि उनकी जगह पर वापस भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बना दिया गया। खंडूरी का यह कार्यकाल महज छह महीने का ही रहा। यानी चुनाव से छह माह पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने नेतृत्व में बदलाव कर दिया।
2012 में जब तीसरी विधानसभा का चुनाव हुआ, तो कांग्रेस सत्ता में आई और कांग्रेस ने कद्दावर नेता विजय बहुगुणा को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि विजय बहुगुणा भी दो साल ही इस पद पर रह पाए। उसके बाद हरीश रावत को कांग्रेस ने उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया। दो साल दो महीने तक मुख्यमंत्री बने रहने के बाद उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
25 दिन के राष्ट्रपति शासन के बाद 21 अप्रैल 2016 को एक बार फिर हरीश रावत महज एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। उसके बाद 19 दिन का राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। तमाम राजनैतिक उठापटक के बाद हरीश रावत 11 मई 2016 से 18 मार्च 2017 यानी कि एक साल से कम वक्त के लिए फिर मुख्यमंत्री बने।
दो मार्च 2002 को उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार बनाती है और नारायण दत्त तिवारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनते हैं। उत्तराखंड के इतिहास में सिर्फ नारायण दत्त तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने अपना पूरा कार्यकाल बगैर किसी परेशानी के पूरा किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत अगर एक साल और पूरा कर लेते हैं, तो उत्तराखंड राज्य के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे, जो बिना किसी फेरबदल के अपना पूरा कार्यकाल कर गए।