फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Uttar Pradesh Elections: all BJP mlas and ministers who resigneed with swami prasad maurya from BJP, have towed the same line in there resignation letters

उत्तर प्रदेश चुनाव: कौन है इन इस्तीफों का स्क्रिप्ट राइटर? सभी नेताओं ने त्यागपत्रों में इन पांच कारणों पर जाहिर की नाराजगी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 13 Jan 2022 03:51 PM IST
सार

योगी सरकार में श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने सबसे पहले इस्तीफा दिया था। उन्होंने लिखा दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं। खास बात है कि इस्तीफे पर तारीख प्रिंट में नहीं है, बल्कि मौर्या ने अपने हस्ताक्षर के साथ 11 जनवरी तारीख लिखी है...

विज्ञापन
Uttar Pradesh Elections: all BJP mlas and ministers who resigneed with swami prasad maurya from BJP, have towed the same line in there resignation letters
भाजपा मंत्रियों और विधायकों ने छोड़ी पार्टी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद योगी सरकार और भाजपा से इस्तीफे देने वाले नेताओं की कतार लग गई है। इस्तीफों के शब्दों को देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इनका 'स्क्रिप्ट राइटर' कौन है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि हो न हो, ये सब एक ही 'स्क्रिप्ट राइटर' का काम है। सभी नेताओं ने अपने इस्तीफे में वोट बैंक के हिसाब से पांच सामान्य कारणों में अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। इन कारणों में दलित, पिछड़े, किसान, बेरोजगार और अल्पसंख्यक मुद्दा रहे हैं। विधायक डॉ. मुकेश वर्मा और विनय शाक्य के पार्टी से किनारा करने के लिए भाजपा के प्रदेश एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष को जो पत्र भेजा गया है, उसके शब्द तो बिल्कुल मिल रहे हैं। केवल नाम, विधानसभा क्षेत्र और पता बदला गया है।

विज्ञापन


योगी सरकार में श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या ने सबसे पहले इस्तीफा दिया था। उन्होंने राज्यपाल को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा, मैंने विपरित परिस्थितियों व विचारधारा में रह कर भी बहुत मनोयोग के साथ अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन किया है, किंतु दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं। खास बात है कि इस्तीफे पर तारीख प्रिंट में नहीं है, बल्कि मौर्या ने अपने हस्ताक्षर के साथ 11 जनवरी तारीख लिखी है।
विज्ञापन


इसके बाद वन पर्यावरण और जंतु उद्यान मंत्री दारा सिंह चौहान का इस्तीफा सोशल मीडिया में घूमने लगा। उन्होंने लिखा, मैंने विभाग की बेहतरी के लिए पूरे मनोयोग से कार्य किया है, किंतु सरकार की पिछड़ों, वंचितों, दलितों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के साथ साथ पिछड़ों और दलितों के आरक्षण के मामले में जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे आहत होकर मैं मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं। दारा सिंह चौहान के इस्तीफे पर भी तारीख प्रिंट में नहीं है। बल्कि उन्होंने अपने हस्ताक्षर के साथ तिथि 12 जनवरी लिखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन




शिकोहाबाद से विधायक डा. मुकेश वर्मा ने भी भाजपा छोड़ दी है। उन्होंने भाजपा के प्रदेश एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे त्यागपत्र में कहा, प्रदेश सरकार द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तव्वजो नहीं दी गई। उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया। दलितों, पिछड़ों, वंचितों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षा की गई। प्रदेश सरकार के ऐसे कूटनीतिपरक रवैये के कारण मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। स्वामी प्रसाद मौर्या शोषित पीड़ितों की आवाज हैं, वही हमारे नेता हैं। मैं उनके साथ हूं।


एमएलए विनय शाक्य, 202 बिधूना 'औरेया' विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए थे। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा, पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तव्वजो नहीं दी गई। उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया गया। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा दलितों पिछड़ों, वंचितों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षा की गई। प्रदेश सरकार के ऐसे कूटनीतिपरक रवैये के कारण मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। स्वामी प्रसाद मौर्या शोषित पीड़ितों की आवाज हैं, वही हमारे नेता हैं। मैं उनके साथ हूं।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर जातीय समीकरणों का बड़ा प्रभाव रहा है। जातीय समीकरणों को देखें तो प्रदेश में पिछड़ा वर्ग पहले नंबर पर आता है। दूसरे नंबर पर दलित समुदाय है। तीसरे स्थान पर सवर्ण मतदाता एवं चौथे स्थान पर मुस्लिम हैं। उत्तर प्रदेश में पिछड़े मतदाताओं की संख्या 42 से 45 फीसदी बताई जा रही है। दलित वोटर, लगभग 22 फीसदी हैं। सवर्ण जातियों की बात करें तो इनका प्रतिशत 18 से 20 फीसदी के आसपास बताया गया है। मुस्लिम वोटरों की संख्या करीब 17 फीसदी है। एससी-एसटी समुदाय के लिए 86 सीटें आरक्षित की गई हैं। योगी सरकार और भाजपा से इस्तीफा देने वालों में जितने भी मंत्री और विधायक शामिल हैं, उनके इस्तीफे पर लिखा है कि प्रदेश की योगी सरकार में पिछड़ों, वंचितों, दलितों, किसानों और बेरोजगार नौजवानों की घोर उपेक्षा हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed