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उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान करके बढ़ा दी है भाजपा की मुसीबत?

Wed, 24 Nov 2021 07:24 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 24 Nov 2021 07:24 PM IST
सार

भाजपा के एक नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री ने तो बड़ा दिल दिखाया। लेकिन घोषणा का यह समय सही नहीं था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तीन महीने से भी कम का समय बचा है। इतने कम समय में जन-जन तक नए संदेश को ले जाना कोई आसान बात नहीं है...

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Uttar Pradesh assembly Polls 2022: Prime Minister Narendra Modi sudden announcement of repeal of three farm laws increased the party trouble amid of UP election 2022
पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

मध्य उत्तर प्रदेश की वीआईपी दर्जे में गिनी जाने वाली भाजपा विधानसभा सीट के प्रभारी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करके पार्टी की मुसीबत बढ़ा दी है। यही हाल पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों की विधानसभा सीट प्रभारियों का है। एक प्रभारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि किसानों के विरोध का मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया था। अब यह बड़ा मुद्दा नहीं रह गया था, लेकिन प्रधानमंत्री के अचानक तीनों कानूनों को वापस लेने की घोषणा ने इसे फिर से जिंदा कर दिया।

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पढ़े-लिखे, समझदार वर्ग में गया गलत संदेश

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कई जिलों के विधानसभा सीटों के प्रभारियों ने अपनी पीड़ा बताई। वह कहते हैं कि इससे पढ़े-लिखे, समझदार वर्ग में बड़ा गलत संदेश चला गया। इसके अलावा किसानों के बीच में संदेश जा रहा है कि कहीं न कहीं सरकार ही गलत थी और अब राजनीतिक कारणों से इसे वापस लेने के लिए मजबूर हुई है। बाराबंकी के एक भाजपा नेता का कहना है कि परेशानी इतनी भर नहीं है। इन कानूनों को वापस लेने के बाद अब जो स्थिति पैदा हो रही है, उससे किसानों से जुड़े तमाम मुद्दे जीवित हो रहे हैं। वह बताते हैं कि बाराबंकी में धान की खरीद के पिछले साल 100 करीब केंद्र थे। इससे पहले 100 से अधिक थे। इस साल 45 के करीब रह गए हैं। धान खरीद केंद्रों के बारे में इसी तरह की खबर बनारस, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, सुल्तानपुर, प्रयागराज समेत तमाम जिलों से आ रही है। इसके चलते धानों की खरीद नहीं हो पा रही है। किसान परेशान हैं। ऊपर से सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। हालांकि सूत्र का कहना है कि राज्य के किसानों और लोगों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में पूरा भरोसा है।

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प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाया, लेकिन समय बहुत कम

भाजपा के एक नेता और 16 जिलों में जनसंपर्क प्रभारी का काम देख चुके सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री ने तो बड़ा दिल दिखाया। उन्होंने किसानों का मान रखते हुए कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए लाए गए कानून को क्षमा याचना के साथ वापस ले लिया, लेकिन घोषणा का यह समय सही नहीं था। सूत्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तीन महीने से भी कम का समय बचा है। इतने कम समय में जन-जन तक नए संदेश को ले जाना कोई आसान बात नहीं है। वह बताते हैं कि पिछले नौ महीनों से भाजपा के नेता, कार्यकर्ता, हमारे बूथ स्तर तक पदाधिकारियों ने मेहनत करके कृषि कानूनों के पक्ष में लोगों से चर्चा की थी। अब सभी को प्रधानमंत्री के निर्णय को सही बताने और प्रधानमंत्री की छवि निखारने के लिए चर्चा करनी होगी, जो काफी चुनौती भरा है।

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