ब्रेड में कैंसर : पोटैशियम ब्रोमेट पर चीन में सालों से रोक लेकिन भारत, अमेरिका में नहीं
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साल 2007 में चीन ने अपने यहां दूसरे देशों से आयात होकर आए हुए आलू चिप्स में पोटैशियम ब्रोमेट पाए जाने पर उन्हें बाजार से हटा दिया था। और ये पोटैशियम ब्रोमेट युक्त चिप्स भारत में नहीं बल्कि अमेरिका में बने हुए थे। भारत और अमेरिका दोनों देशों के खाद्य नियामकों ने अबतक अपने यहां पोटैशियम ब्रोमेट और कैंसर पैदा करने वालों रसायन को प्रयोग करने से प्रतिबंधित नहीं किया है।
कल जारी सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (सीएसई) के अध्ययन में दावा किया गया है कि ब्रेड या डबलरोटी में कैंसर पैदा करने वाला रसायन होता है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 38 मुख्य ब्रांडो के ब्रेड पर हुए इस अध्यन के मुताबिक 84 प्रतिशत ब्रेड में पोटेशियम ब्रोमेट तथा पोटेशियम आयोडेट पाया गया है। पोटेशियम ब्रोमेट को सेहत की दृष्टि से काफी खतरनाक माना जाता है।
इस परीक्षण के दौरान ब्रिटानिया, हार्वेस्ट गोल्ड, जैसे बड़े ब्रांड के साथ-साथ केएफसी, पिज्जा हट, मैक डोनाल्ड, सबवे, डामिनॅाज जैसै बड़े बहुराष्ट्रीय फूड श्रृखंलाओं के ब्रेड भी शामिल थे।
अखिल भारतीय ब्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश मागो ने कहा कि, 'हम किसी भी नियमों का उल्लघंन नहीं कर रहे है। हम उन रसायनों का प्रयोग उतनी ही मात्रा में करते है जितनी की भारतीय खाद्य नियामक हमें इजाजत देता है।'
पोटैशियम ब्रोमेट से जुड़ी जानकारी का पहला बार जापानी शोधकर्ताओं ने 1982 में खुलासा किया था। जापानी शोधकर्ताओं ने बताया कि पोटैशियम ब्रोमेट के प्रयोग से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। यह अध्ययन सार्वजनिक हो जाने के बाद से बहुत से देशों ने अपने यहां पोटैशियम ब्रोमेट के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया।
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (सीएसई) की यह रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद आज जुबलियेंट फूड शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है।