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पलटवार: अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर भारत की सख्त आपत्ति, अंतर्राष्ट्रीय वोट बैंक की राजनीति करार दिया

Fri, 03 Jun 2022 05:23 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 03 Jun 2022 05:23 PM IST
सार

अमेरिका के विदेश विभाग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 2021 के दौरान पूरे साल अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर हमले होते रहे।

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US State Dept 2021 Report: We'd urge that assessments based on motivated inputs and biased views be avoided says MEA
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर भारत ने सख्त आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे अंतर्राष्ट्रीय वोट बैंक की राजनीति करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर यूएस स्टेट डिपार्टमेंट 2021 रिपोर्ट और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दुर्भावना से ग्रस्त जानकारी देने वाली टिप्पणियों का संज्ञान लिया है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में वोट बैंक की राजनीति की जा रही है। हम आग्रह करेंगे कि एकतरफा जानकारी और पक्षपातपूर्ण विचारों के आधार पर आकलन से बचा जाए। 

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मंत्रालय ने कहा कि स्वाभाविक रूप से बहुलवादी समाज के रूप में भारत धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को महत्व देता है। अमेरिका के साथ हमारी चर्चा में हमने नस्लीय और जातीय रूप से प्रेरित हमलों, घृणा अपराधों और बंदूक की हिंसा सहित वहां के चिंता के मुद्दों को नियमित रूप से उजागर किया है। 
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रिपोर्ट में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले का जिक्र 
अमेरिका के विदेश विभाग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 2021 के दौरान पूरे साल अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर हमले होते रहे। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संसद में पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में हत्याएं, मारपीट और उत्पीड़न भी शामिल रहे। इस रिपोर्ट को विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने विदेश विभाग के फॉगी बॉटम स्थित मुख्यालय में जारी किया। रिपोर्ट में पूरी दुनिया में हो रहे धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर अपना नजरिया पेश किया गया है। इसमें हर देश के लिए एक अलग चैप्टर है। हालांकि, रिपोर्ट के भारत चैप्टर में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कोई विचार देने से बचा गया है, लेकिन भारतीय मीडिया और सरकारी रिपोर्ट में प्रदर्शित हुए इसके विभिन्न पक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया है। 
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एनजीओ और अल्पसंख्यक संस्थानों के आरोपों का भी जिक्र
रिपोर्ट में विभिन्न गैर लाभकारी संगठनों (एनजीओ) और अल्पसंख्यक संस्थानों पर हुए हमलों को लेकर उनके आरोपों का उल्लेख भी किया गया है। लेकिन, अधिकांश मौकों पर यह अधिकारियों की ओर से की गई जांचों और केंद्र सरकार की प्रतिक्रियाओं के परिणामों पर मौन ही रही है। रिपोर्ट में कहा गया है, 2021 में पूरे साल अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के खिलाफ हत्या, मारपीट और धमकी समेत हमले होते रहे। इनमें गायों की सुरक्षा को लेकर गोहत्या या बीफ के व्यापार के आरोपों के आधार पर गैर हिंदुओं के खिलाफ हुए अपराध भी शमिल रहे।'


मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ के बयान का भी जिक्र 
इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का उल्लेख भी किया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में हिंदुओं और मुसलमानों का डीएनए समान है और लोगों के बीच धर्म के नाम पर अंतर नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के बारे में भी इस रिपोर्ट में बात की गई है। इसके अनुसार योगी आदित्यनाथ ने 12 सितंबर को सार्वजनिक रूप से कहा था कि उत्तर प्रदेश में पिछली सरकारों ने लाभ वितरण में मुसलमानों का अधिक समर्थन किया था। 

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