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अमेरिकी सैन्य विमान ने पहली बार रक्षा संधि के तहत भारतीय एयरबेस पर ईंधन भरा
Sat, 03 Oct 2020 12:33 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 03 Oct 2020 12:33 PM IST
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US maritime surveillance aircraft P-8 Poseidon (File Photo)
- फोटो : For Reference Only
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ भारत के मौजूदा सैन्य टकराव के बीच, अमेरिका के लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान ने रणनीतिक रूप से स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप से ईंधन भरना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को एक अमेरिकी पी-8 पोसिडॉन विमान 25 सितंबर को रसद और ईंधन भरने के लिए कुछ घंटों के लिए पोर्ट ब्लेयर में उतरा। यह अमेरिकी विमान दुश्मन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए रडार और मिसाइल से लैस है।
भारत और अमेरिका साल 2016 में पारस्परिक सैन्य रसद संधि, लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) के तहत एक-दूसरे के युद्धपोतों को ईंधन भरने और परिचालन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। लेकिन यह पहली बार है जब कोई अमेरिकी सैन्य विमान अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह पर उतरा है।
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यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका ने हिंद महासागर क्षेत्र में अंडमान के नजदीक अभ्यास में सहयोग किया है। यह क्षेत्र चीन के लिए आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।
यह सैन्य रसद संधि 2017 में चालू हो पाया, जब जापान के सागर में अमेरिकी नौसेना के टैंकर में एक भारतीय नौसेना के जहाज ने ईंधन भरा था। यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी विमान ने ऐसा किया है।
सितंबर में, एक भारतीय जहाज में अमेरिकी टैंकर के माध्यम से ईंधन भरा गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक एक रक्षा सूत्र ने बताया, "विमान एक हफ्ते पहले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के हवाई पट्टी पर LEMOA के तहत ईंधन भरने के लिए उतरा था। विमान अपनी यात्रा को फिर से शुरू करने से पहले, कुछ घंटों के लिए बेस पर मौजूद था।"
हालांकि यह ईंधन भरने की एक साधारण सी बात थी, लेकिन भारत के सामरिक एयरबेस से ईंधन भरने वाले एक अमेरिकी पनडुब्बी रोधी और निगरानी विमान का संदेश बड़ा है।
यह शुरुआत इसलिए भी अधिक महत्व रखती है क्योंकि यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनावपूर्ण स्थिति है।
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रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को एक अमेरिकी पी-8 पोसिडॉन विमान 25 सितंबर को रसद और ईंधन भरने के लिए कुछ घंटों के लिए पोर्ट ब्लेयर में उतरा। यह अमेरिकी विमान दुश्मन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए रडार और मिसाइल से लैस है।
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भारत और अमेरिका साल 2016 में पारस्परिक सैन्य रसद संधि, लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) के तहत एक-दूसरे के युद्धपोतों को ईंधन भरने और परिचालन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। लेकिन यह पहली बार है जब कोई अमेरिकी सैन्य विमान अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह पर उतरा है।
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यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका ने हिंद महासागर क्षेत्र में अंडमान के नजदीक अभ्यास में सहयोग किया है। यह क्षेत्र चीन के लिए आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।
यह सैन्य रसद संधि 2017 में चालू हो पाया, जब जापान के सागर में अमेरिकी नौसेना के टैंकर में एक भारतीय नौसेना के जहाज ने ईंधन भरा था। यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी विमान ने ऐसा किया है।
सितंबर में, एक भारतीय जहाज में अमेरिकी टैंकर के माध्यम से ईंधन भरा गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक एक रक्षा सूत्र ने बताया, "विमान एक हफ्ते पहले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के हवाई पट्टी पर LEMOA के तहत ईंधन भरने के लिए उतरा था। विमान अपनी यात्रा को फिर से शुरू करने से पहले, कुछ घंटों के लिए बेस पर मौजूद था।"
हालांकि यह ईंधन भरने की एक साधारण सी बात थी, लेकिन भारत के सामरिक एयरबेस से ईंधन भरने वाले एक अमेरिकी पनडुब्बी रोधी और निगरानी विमान का संदेश बड़ा है।
यह शुरुआत इसलिए भी अधिक महत्व रखती है क्योंकि यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनावपूर्ण स्थिति है।