मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने में इन तीन देशों का भी बड़ा हाथ
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इसी साल फरवरी में हुए पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मार्च में आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था। ये प्रस्ताव अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने पेश किया था। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना को प्रतिबंधित करने में इन तीनों देशों का बड़ा हाथ है। इससे पहले चीन ने वीटो का इस्तेमाल करते हुए मसूद अजहर को बचा लिया था। प्रस्ताव में अजहर को ब्लैक लिस्ट में डालने की मांग की गई थी।
फ्रांस ने यूएन के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि मसूद अजहर पर प्रतिबंध की फ्रांस सरकार लगातार अपील कर रही थी, जो फरवरी में हुए पुलवामा हमले का आरोपी है। फ्रांस ने 15 मार्च को मसूद अजहर पर प्रतिबंध की मंजूरी दी थी।
France statement: French diplomacy has been relentlessly pleading for sanctioning Azhar, head of the terrorist group responsible, notably, for the Pulwama attack last February. France had adopted national sanctions against Masood Azhar on 15th March. https://t.co/fiEM8dzhUA
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 1, 2019
राजनयिकों का कहना था कि ये देश चाहते हैं कि अजहर की संपत्ति जब्त हो और उसकी यात्राओं पर प्रतिबंध लगाया जाए। इससे पहले चीन ने वीटो लगाते हुए इसे टेक्निकल होल्ड पर डाल दिया था। चीन के इस कदम पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इस मामले पर चीन ने कहा था-
मसूद अजहर पर प्रतिबंध से पहले जांच के लिए उसे समय चाहिए ताकि सभी पक्ष ज्यादा बातचीत कर सकें और एक अंतिम निर्णय पर पहुंचे जो सभी को स्वीकार्य हो। ये अमेरिका द्वारा प्रस्तावित एक मसौदा प्रस्ताव है जिसे ब्रिटेन और फ्रांस का पूरा समर्थन है।
इसी साल 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर आत्मघाती हमला हुआ था। जिसकी जिम्मेदारी मसूद अजहर ने ली है। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच भी तनाव काफी बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की ब्लैक लिस्ट में में अलकायदा और इस्लामिक स्टेट का नाम पहले से शामिल है। इसी प्रस्ताव में अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग की गई थी जो आज पूरी हो गई।
इससे पहले अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए चार बार प्रयास किया जा चुका था। चीन ने पहले तीन प्रस्तावों पर रोक लगा दी थी और चौथे प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी थी। संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की सूची में जैश-ए-मोहम्मद को पहले ही 2001 में शामिल किया जा चुका है।