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अमेरिका: विदेश मंत्री की यात्रा से पहले भारत ने खींची रेड लाइन, कूटनीति की मेज पर समझौता नहीं, मोलभाव होगा
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मार्को रूबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री
- फोटो : ANI
एक तरफ थार के मरुस्थल में गूंजती तोपों की गड़गड़ाहट भारत-अमेरिका की बढ़ती सैन्य नजदीकी की गवाही दे रही है, तो दूसरी ओर वाशिंगटन के कड़े टैरिफ कानून ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी बढ़ाया है। ऐसे में अगले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान कूटनीति की मेज पर समझौता नहीं, बल्कि कठिन मोलभाव होगा। क्योंकि भारत ने भी अपनी रेड लाइन खींच दी है।
रुबियो का भारत दौरा क्यों अहम?
इस बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचे और भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास को दोनों देशों की भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी बताया। यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत में भारत को बेहद अहम सामरिक साझेदार मानता है, लेकिन इस सैन्य जुगलबंदी के पीछे एक बड़ा ऊर्जा तनाव भी है, जो अगले महीने रुबियो की यात्रा की असली परीक्षा लेगा।
टैरिफ विवाद से रिश्तों पर पड़ सकता है असर
रुबियो का आगामी भारत दौरा वाशिंगटन के नए रुख और भारत की सामरिक स्वायत्तता के बीच सीधा टकराव होगा। इस दौरे के रुख को तय करने वाले तीन मुख्य बिंदु होंगे। अमेरिका में पास हुए नए कड़े कानून के तहत रूसी ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रुबियो का लक्ष्य भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बनाना रहेगा।
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न्यूयॉर्क में जयशंकर ने रुबियो को साफ संदेश दिया कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोपरि है। यानी भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। जब तक वैश्विक बाजार में किफायती और सुलभ विकल्प नहीं मिलते, वह अपनी ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा।
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रुबियो का भारत दौरा क्यों अहम?
इस बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचे और भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास को दोनों देशों की भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी बताया। यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत में भारत को बेहद अहम सामरिक साझेदार मानता है, लेकिन इस सैन्य जुगलबंदी के पीछे एक बड़ा ऊर्जा तनाव भी है, जो अगले महीने रुबियो की यात्रा की असली परीक्षा लेगा।
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टैरिफ विवाद से रिश्तों पर पड़ सकता है असर
रुबियो का आगामी भारत दौरा वाशिंगटन के नए रुख और भारत की सामरिक स्वायत्तता के बीच सीधा टकराव होगा। इस दौरे के रुख को तय करने वाले तीन मुख्य बिंदु होंगे। अमेरिका में पास हुए नए कड़े कानून के तहत रूसी ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रुबियो का लक्ष्य भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बनाना रहेगा।
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न्यूयॉर्क में जयशंकर ने रुबियो को साफ संदेश दिया कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोपरि है। यानी भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। जब तक वैश्विक बाजार में किफायती और सुलभ विकल्प नहीं मिलते, वह अपनी ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा।