भारत ने पाकिस्तान को सौंपे उड़ी हमले के अहम सबूत, जल्द कार्रवाई करने का निर्देश
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भारत ने उड़ी आतंकी हमले के सिलसिले में दस दिन के अंदर दूसरी बार पाकिस्तान उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर नाराजगी जताई और शीघ्र कार्रवाई करने की अपील के साथ उन्हें कुछ अहम सबूत सौंपे। विदेश सचिव एस जयशंकर ने इस दौरान बासित को उड़ी हमले के दो हैंडलर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि घुसपैठ कराने में गाइड का काम करने वाले दो पाकिस्तानी नागरिक इस समय हिरासत में हैं।
इस दौरान भारत ने फिर से दो टूक शब्दों में कहा कि वह सीमा पार से हो रहे आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने पाक उच्चायुक्त को बताया कि प्रारंभिक जांच से खुलासा हुआ है कि उड़ी हमले में मारा गया एक आतंकी हाफिज अहमद, वल्द फिरोज, धारबांग (मुजफ्फराबाद) निवासी था, जिसके पुख्ता सबूत हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने उन्हें पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान भारत ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान ईमानदारी से जांच के लिए तैयार है तो वह उसे आतंकियों का डीएनए सैंपल और फिंगर प्रिंट सहित कई अन्य अहम सबूत उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
बासित को बताया गया, ‘उड़ी सेक्टर के ग्रामीणों ने 21 सितंबर को पीओके के दो नागरिकों को पकड़ कर भारतीय सुरक्षा बलों के हवाले किया था जिन्होंने उड़ी के हमलावरों के लिए गाइड का काम किया था और आतंकियों को नियंत्रण रेखा से घुसपैठ कराने में मदद की थी। उनकी पहचान फैजल हुसैन अवान, 20 वर्ष, वल्द गुल अकबर, निवासी पोठा जहांगीर, मुजफ्फराबाद तथा यासीन खुर्शीद, 19 वर्ष, वल्द मोहम्मद खुर्शीद, निवासी खिलियाना कलां, मुजफ्फराबाद के रूप में हुई है।
जानिए क्या सबूत सौंपे हैं भारत ने पाक को?
पूछताछ में अवान ने एनआईए को बताया कि उसने 18 सितंबर को आतंकियों को घुसपैठ कराने में मदद की थी। इसी तरह 23 सितंबर को एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल कयूम, निवासी सियालकोट को भी मोलू सेक्टर में गिरफ्तार किया गया था। उसने भी कबूल किया कि उसने लश्कर-ए-ताइबा के कैंप में तीन सप्ताह का प्रशिक्षण लिया था।’
विदेश सचिव ने वर्ष 2004 में अपनी भूमि का आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल न करने की पाकिस्तान की प्रतिबद्धता से पीछे हटने पर भी नाराजगी जताई। इसके साथ ही कहा कि पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पाकिस्तान को कड़ी कार्रवाई के लिए अब टालमटोल नहीं करना चाहिए।
बासित को उड़ी आतंकी हमले में पाकिस्तान की जमीन का उपयोग होने के ठोस सबूत सौंपे गए। उन्हें इस हमले के हैंडलर मोहम्मद कबीर अवान और बशारत के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा बासित को विभिन्न आतंकी हमलों में इस्तेमाल किए गए सामान की जानकारी भी दी गई जो पाकिस्तान निर्मित थे।
ये सब सबूत सौंपे
- उड़ी हमले में मारा गया आतंकी हाफिज अहमद, वल्द फिरोज, निवासी धारबांग (मुजफ्फराबाद)
- आतंकियों को एलओसी से घुसपैठ कराने और गाइड करने वाले दो पाकिस्तानी हैंडलर की गिरफ्तारी
- हैंडलर की पहचान: फैजल हुसैन अवान, 20 वर्ष, वल्द गुल अकबर, निवासी पोठा जहांगीर, मुजफ्फराबाद तथा यासीन खुर्शीद, 19 वर्ष, वल्द मोहम्मद खुर्शीद, निवासी खिलियाना कलां, मुजफ्फराबाद
सिंधु जल संधि तोड़ना ‘युद्ध की कार्रवाई’ होगी: पाक
पाक को एमएफएन दर्जे की समीक्षा करेंगे पीएम
उड़ी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर नकेल कसने की कवायद के तहत भारत अब उससे सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा भी छीन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के एमएफएन दर्जे की बृहस्पतिवार को समीक्षा करने का फैसला किया है।
भारत ने 1996 में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के गैट समझौते के तहत पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था। अब भारत दुनिया को दिखाना चाहता है कि सीमा पार से पाक प्रायोजित आतंकवाद को वह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
सिंधु जल संधि तोड़ना ‘युद्ध की कार्रवाई’ होगी: पाक
पाकिस्तान ने भारत को चेतावनी दी है कि 56 साल पुरानी सिंधु जल संधि तोड़ने का एकतरफा फैसला ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा और ऐसा होने पर वह भारत के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाएगा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि दोनों देशों के बीच किया गया यह सबसे सफल जल समझौता है।
इसे तोड़ने का मतलब युद्ध की कार्रवाई या पाकिस्तान के खिलाफ दगाबाजी होगा। उन्होंने कहा कि भारत की इस तरह की खतरनाक कार्रवाई पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान आकृष्ट करने पर विचार कर रहा है।
पाक सेना ने सीमा पर गतिविधियां बढ़ाईं
भारत-पाकिस्तान के बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सीमा पर गतिविधियां बढ़ा दी है। पाक सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल आसिम सलीम बाजवा ने पेशावर में एक सुरक्षा बैठक के बाद कहा, ‘हम पूर्वी सीमा के घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं और जवाबी हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’
पाक सेना प्रमुख राहील शरीफ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अफगानिस्तान से लगती सीमा पर सुरक्षा की समीक्षा की गई। बाजवा ने बताया कि बैठक में सीमा प्रबंधन के लिए सशस्त्र बलों द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सीमा प्रबंधन के लिए 20 चौकियों पर काम पूरा हो गया है।
सिंधु समझौते पर दस दिनों में फिर होगी बैठक
पाकिस्तान से दुश्मनी निभाने में भी पीएम मोदी विकास के एजेंडे को ही तवज्जो देंगे। नकारात्मक कदम उठाने के बजाय मोदी बड़ी लकीर खींचने के पक्षधर हैं, जिससे पाक का पक्ष अपने आप ही कमजोर पड़ जाएगा। उड़ी हमले के बाद देश में पाक के खिलाफ पनपे गुस्से को मोदी यूं ही बेकार जाने देने के मूड में नहीं है।
सिंधु जल समझौते की समीक्षा बैठक महज औपचारिकता बनकर न रहे इसके लिए पीएम ने विदेश और जल संसाधन दोनों ही मंत्रालयों को तय सीमा के अंदर कार्य योजना बनाने को कहा है। सोमवार को समीक्षा बैठक में शामिल अधिकारियों से पीएम ने कहा कि आप लोग कार्य योजना बनाइए, जल्द ही दोबारा बैठेंगे।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी सिंधु मामले पर अगले 10 दिनों में दोबारा से बैठक करेंगे। यही वजह है कि पीएम की समीक्षा बैठक में आए मुद्दों को अमली जामा पहनाने में जल संसाधन मंत्रालय जोर-शोर से जुट गया है। अगले कुछ दिनों में वह कार्ययोजना को अंतिम रूप देकर पीएमओ को भेजेगा।
जम्मू-कश्मीर के किसानों को ढाल बनाने की रणनीति
बताया जा रहा है कि सिंधु से अपने हिस्से का जल लेने के लिए सरकार की रणनीति जम्मू-कश्मीर के किसानों को ढाल बनाने की है। पीएम की समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा से सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार के लिए पारित किए गए उस प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई थी जिसमें सूबे के किसानों की समस्या दूर करने के लिए सिंधु की सहायक नदियों से जल ज्यादा मात्रा में रोकने की वकालत की गई है।
मंगलवार को मंत्रालय के सचिव शशि शेखर ने मंत्री उमा भारती के साथ लंबी मंत्रणा कर कार्ययोजना पर चर्चा की। तो अंतर मंत्रालयी समिति का गठन विदेश मंत्रालय के जिम्मे है। जल संसाधन मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि सिंधु जल समझौते से अपने हिस्से का पानी लेने के लिए भी हम विकास के एजेंडे को ही आगे बढ़ाएंगे। पीएम की बैठक में भी विकास के आयामों पर ही चर्चा हुई है।
पाक से छिन सकता है तरजीही राष्ट्र का दर्जाnawaz
उड़ी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर घेरने और दुनिया से अलग-थलग करने की मुहिम में जुटा भारत उससे सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा भी छीन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के एमएफएन दर्जे की बृहस्पतिवार को समीक्षा करने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि भारत ने 1996 में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के गैट समझौते के तहत पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था। भारत और पाकिस्तान द्वारा इस समझौते पर हस्ताक्षर का मतलब था कि दोनों देशों को परस्पर समान व्यापार बर्ताव करना होगा। हालांकि उसके बाद बीते 22 साल से भारत को इसी तरह का दर्जा देने के मामले में पाकिस्तान लगातार कन्नी काटता आ रहा है।
दरअसल उड़ी आतंकी हमले के बाद भारत हर मोर्चे पर पाकिस्तान के लिए परेशानी खड़ी करना चाहता है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने की मांग की। इसके अलावा सिंधु नदी के जल बंटवारे पर पाकिस्तान को झटका देने के लिए भारत ने जल के भरपूर इस्तेमाल की रणनीति बनाई गई है। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर में तुलबुल परियोजना को फिर से शुरू किए जाने की तैयारी है।
भारत में पानी का उपयोग अधिक होने पर पाकिस्तान को पहले की तुलना में कम पानी मिलेगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एमएफएन का दर्जा खत्म करने का फैसला भले ही बहुत मायने न रखता हो, लेकिन भारत दुनिया को दिखाना चाहता है कि वह सीमा पार से पाक प्रायोजित आतंकवाद से बेहद खफा है।