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SC अपडेट्स: तरुण तेजपाल की आत्मसमर्पण से छूट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा
Mon, 24 Aug 2026 09:05 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 24 Aug 2026 09:05 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में तेजपाल ने दुष्कर्म मामले में सजा के बाद आत्मसमर्पण करने से छूट देने की मांग की है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ के सामने गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तेजपाल की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि उन्होंने आत्मसमर्पण से छूट के लिए अलग से आवेदन नहीं दिया है। तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नियम इस मामले पर लागू नहीं होते, क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही उन्हें आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का समय दे चुका है। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के 6 अगस्त के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया था।
जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ के सामने गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तेजपाल की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि उन्होंने आत्मसमर्पण से छूट के लिए अलग से आवेदन नहीं दिया है। तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नियम इस मामले पर लागू नहीं होते, क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही उन्हें आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का समय दे चुका है। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के 6 अगस्त के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया था।
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कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को सीडब्ल्यूएमए के पास जाने की इजाजत दी, 31 अगस्त को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के पास अपनी शिकायत लेकर जाने की इजाजत दे दी। तमिलनाडु की शिकायत थी कि कर्नाटक कावेरी का उसका तय हिस्सा नहीं छोड़ रहा है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय की है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक को कावेरी का 26.954 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
तमिलनाडु की ओर से पेश सीनियर वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य को सोमवार सुबह तक सीडब्ल्यूएमए के निर्देशानुसार पानी मिल गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की शिकायत यह है कि सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक को पानी की उस तय मात्रा में हुई कमी को पूरा करने का निर्देश नहीं दिया है जो राज्य को मिलनी चाहिए थी।
वैद्यनाथन ने कहा कि हमें पानी की एक तय मात्रा मिलनी चाहिए, जो दुर्भाग्य से नहीं मिल रही है। सीनियर वकील ने जस्टिस नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि सीडब्ल्यूएमए की बैठक सोमवार और मंगलवार को हो रही है और तमिलनाडु प्राधिकरण के सामने अपनी शिकायत रखेगा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई अगले सोमवार को रखी जाए। वैद्यनाथन ने यह भी बताया कि कर्नाटक के कावेरी जलाशयों में लगभग 78 टीएमसी पानी है और तर्क दिया कि तमिलनाडु को उपलब्ध पानी में से उसका तय हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय कर दी और कहा कि पक्षकार पानी छोड़े जाने की ताजा स्थिति कोर्ट के सामने रख सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के पास अपनी शिकायत लेकर जाने की इजाजत दे दी। तमिलनाडु की शिकायत थी कि कर्नाटक कावेरी का उसका तय हिस्सा नहीं छोड़ रहा है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय की है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक को कावेरी का 26.954 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
तमिलनाडु की ओर से पेश सीनियर वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य को सोमवार सुबह तक सीडब्ल्यूएमए के निर्देशानुसार पानी मिल गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की शिकायत यह है कि सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक को पानी की उस तय मात्रा में हुई कमी को पूरा करने का निर्देश नहीं दिया है जो राज्य को मिलनी चाहिए थी।
वैद्यनाथन ने कहा कि हमें पानी की एक तय मात्रा मिलनी चाहिए, जो दुर्भाग्य से नहीं मिल रही है। सीनियर वकील ने जस्टिस नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि सीडब्ल्यूएमए की बैठक सोमवार और मंगलवार को हो रही है और तमिलनाडु प्राधिकरण के सामने अपनी शिकायत रखेगा।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई अगले सोमवार को रखी जाए। वैद्यनाथन ने यह भी बताया कि कर्नाटक के कावेरी जलाशयों में लगभग 78 टीएमसी पानी है और तर्क दिया कि तमिलनाडु को उपलब्ध पानी में से उसका तय हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 31 अगस्त के लिए तय कर दी और कहा कि पक्षकार पानी छोड़े जाने की ताजा स्थिति कोर्ट के सामने रख सकते हैं।
अरुणाचल ठेका मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से मांगी नई स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई से अरुणाचल प्रदेश में ठेकों के पक्षपातपूर्ण आवंटन की प्रारंभिक जांच पर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। आरोप है कि कुछ ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने अरुणाचल सरकार ने कहा कि उसने सीबीआई को जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। पिछले महीने सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार जांच के लिए जरूरी दस्तावेज देने में सहयोग नहीं कर रही है। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह चाहती है।
उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रमुख सचिव अदालत में मौजूद हैं और राज्य ने सीबीआई को सभी दस्तावेज दे दिए हैं। पीठ ने राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। अदालत ने सीबीआई से यह भी पुष्टि करने को कहा कि उसे दस्तावेज मिले हैं या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को सीबीआई को दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। यह आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने पूछा कि अब तक जुटाए सबूत नियमित मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं क्या। अदालत ने कहा कि इस पर सीबीआई को विचार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई से अरुणाचल प्रदेश में ठेकों के पक्षपातपूर्ण आवंटन की प्रारंभिक जांच पर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। आरोप है कि कुछ ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने अरुणाचल सरकार ने कहा कि उसने सीबीआई को जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। पिछले महीने सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार जांच के लिए जरूरी दस्तावेज देने में सहयोग नहीं कर रही है। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह चाहती है।
उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रमुख सचिव अदालत में मौजूद हैं और राज्य ने सीबीआई को सभी दस्तावेज दे दिए हैं। पीठ ने राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। अदालत ने सीबीआई से यह भी पुष्टि करने को कहा कि उसे दस्तावेज मिले हैं या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को सीबीआई को दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। यह आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने पूछा कि अब तक जुटाए सबूत नियमित मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं क्या। अदालत ने कहा कि इस पर सीबीआई को विचार करना होगा।