फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   upto 400 crore people of poor countries yearn for clean water, one in three got safe drinking water in 2020

चिंताजनक: साफ पानी के लिए तरस रहे गरीब देशों के 440 करोड़ लोग; 135 देशों की आबादी पर शोध के बाद मिले परिणाम

Sat, 17 Aug 2024 11:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 17 Aug 2024 11:36 PM IST
सार

Clean Water: शोधकर्ताओं ने पाया कि एलएमआईसी यानी गरीब देशों में पीने के पानी तक पहुंचने में दूसरा सबसे बड़ा अवरोध पानी की कमी है, जबकि पहला अवरोध मल से होने वाला प्रदूषण है।

विज्ञापन
upto 400 crore people of poor countries yearn for clean water, one in three got safe drinking water in 2020
पानी की बोतल - फोटो : आईस्टॉक

विस्तार

निम्न और मध्यम आय (एलएमआईसी) वाले 135 देशों में 2020 में तीन में से महज एक आदमी को पीने का साफ पानी मुहैया हो सका। यह खुलासा साइंस जर्नल में छपे स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख के शोधकर्ताओं के अध्ययन में हुआ। शोधकर्ताओं ने घरेलू सर्वेक्षणों संग वैश्विक पृथ्वी अवलोकन को जोड़ने के साथ ही मानव, भौगोलिक और पर्यावरणीय कारकों पर उपग्रह, हवा और जमीन के आंकड़ों का इस्तेमाल शोध में किया।

विज्ञापन


इस तरह उन्होंने 135 एलएमआईसी में सुरक्षित पेयजल इस्तेमाल के विस्तृत नक्शे बनाए। इस आधार पर शोधकर्ताओं ने पाया कि भले ही एलएमआईसी में 88% लोग ऐसे पानी के स्रोतों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें बेहतर या सुरक्षित माना जाता है, फिर भी लगभग आधी आबादी के पास ऐसा पानी पहुंच रहा है जिसमें मल से होने वाला प्रदूषण है। इसका मतलब है कि साफ किए गए पानी के स्रोत भी हमेशा साफ या सुरक्षित नहीं होते।
विज्ञापन


गरीब देशों के 440 करोड़ के पास पीने को नहीं साफ पानी
इस तरह से गरीब देशों में 440 करोड़ (4.4 बिलियन) से अधिक लोगों के पास सुरक्षित पेयजल की कमी है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) बाल कोष संयुक्त जल आपूर्ति, स्वच्छता और स्वास्थ्य (जेएमपी) निगरानी कार्यक्रम के 2020 में दिए गए 200 करोड़ लोगों के अनुमान से लगभग दोगुना है। सुरक्षित पेयजल तक पहुंच इंसान का हक है जो यूएन के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) 2030 में से एक है। जेएमपी यूएन का आधिकारिक कार्यक्रम है। इसे साफ पानी तक पहुंच पर एसडीजी की प्रगति की निगरानी का काम सौंपा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


33 फीसदी को ही मिला साफ पानी
शोधकर्ताओं का कहना है कि एलएमआईसी में सुरक्षित और साफ पेयजल सेवाओं तक पहुंच लेकर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। खास तौर से इन देशों के अलग-अलग क्षेत्रों में इस बारे में जानकारी की कमी है। उनका कहना है कि 2020 में कुल मिलाकर 135 एलएमआईसी की कुल आबादी के 33 फीसदी ने सुरक्षित तौर से प्रबंधित पेयजल सेवाओं का इस्तेमाल किया। इनमें करीब 61 फीसदी एशिया में, 25 फीसदी अफ्रीका में, 11 फीसदी अमेरिका में और तीन फीसदी यूरोप में रहते हैं। सबसे अधिक लोग दक्षिणी एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और पूर्वी एशिया में रहते हैं।


एलएमआईसी में 36% लोग पेयजल की परेशानी से जूझ रहे
शोधकर्ताओं ने पाया कि एलएमआईसी यानी गरीब देशों में पीने के पानी तक पहुंचने में दूसरा सबसे बड़ा अवरोध पानी की कमी है, जबकि पहला अवरोध मल से होने वाला प्रदूषण है। उन्होंने अनुमान लगाया कि इन देशों में 36% लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। यह शोध 70 देशों में जहां अप्रैल 2021 तक इन क्षेत्रों की 65% आबादी रहती थी, पर सटीक बैठता है। शोधकर्ताओं कहते हैं कि उनके निष्कर्ष बताते हैं कि असुरक्षित पीने के पानी की परेशानी पहले से भी बड़ी है। ये कई क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित पानी मिलने से रोकने वाले खास कारणों की तरफ इशारा करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed