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UP Politics: 30 साल बाद मायावती को क्यों याद आया पुराना नारा, क्यों फोड़ा सपा पर ठीकरा?

Wed, 05 Apr 2023 08:55 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 05 Apr 2023 08:55 PM IST
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सार
UP Politics: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने ट्वीट कर बसपा को बहुत 'मासूमियत' से किनारे करते हुए समाजवादी पार्टी पर ठीकरा फोड़ा है। जबकि हकीकत यह भी है कि ऐसे नारे सिर्फ समाजवादी पार्टी के नेता ही नहीं, बल्कि बसपा समर्थक और कद्दावर नेता भी मंच से लगाया करते थे...
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UP Politics: mayawati broke her silence on jai shri ram flying in the air, accused samajwadi party
UP Politics: बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

कभी समाजवादी और बसपा के समर्थक 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए...' का नारा लगाते थे। अचानक करीब तीस साल बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को यह कह दिया कि यह नारा तो समाजवादी पार्टी की शरारत थी। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने तो एक मिशन के तहत गठबंधन किया था, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अयोध्या और श्रीराम मंदिर समेत अपर कास्ट से संबंधित नारों को प्रसारित किया, तो वह बसपा को बदनाम करने की नियत से समाजवादी पार्टी ने सोची-समझी रणनीति से किया था। सियासी गलियारों में मायावती के इन बयानों के अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। माना यही जा रहा है कि समाजवादी पार्टी की ओर से दलित वोट बैंक में हो रही सेंधमारी से असहज होकर बहुजन समाज पार्टी ने ऐसा दांव चला है, जिसमें वह अपने पुराने नारों से पल्ला झाड़ रही हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य पर मुकदमा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले भाजपा और अब समाजवादी पार्टी जिस तरह से बसपा के वोट बैंक में सेंध मारने की कोशिश कर रही है, उससे बहुजन समाज पार्टी असहज है। यही वजह है कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने 1993 के दौर में लगाए जाने वाले नारों का ठीकरा समाजवादी पार्टी पर फोड़ दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने ट्वीट कर बसपा को बहुत 'मासूमियत' से किनारे करते हुए समाजवादी पार्टी पर ठीकरा फोड़ा है। जबकि हकीकत यह भी है कि ऐसे नारे सिर्फ समाजवादी पार्टी के नेता ही नहीं, बल्कि बसपा समर्थक और कद्दावर नेता भी मंच से लगाया करते थे।

यह भी पढ़ें: Lucknow : स्वामी प्रसाद पर मुकदमा दर्ज होने पर बोलीं मायावती, अनर्गल मुद्दों की राजनीति करना सपा का स्वभाव

दरअसल समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को कांशीराम की प्रतिमा के अनावरण के दौरान 1993 के दौर में सपा और बसपा के गठबंधन में लगाए जाने वाले नारे को लगाया। उसके बाद ही उत्तर प्रदेश में तीन दशक पुराने नारों को लेकर मायावती का बयान सामने आया। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि सपा प्रमुख की मौजूदगी में 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम’ नारे को लेकर रामचरित मानस विवाद वाले सपा नेता पर मुकदमा हुआ है। मायावती का इशारा स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर था। उन्होंने कहा कि 1993 में कांशीराम ने सपा-बसपा गठबंधन मिशनरी भावना के तहत किया था। लेकिन मुलायम सिंह यादव के गठबंधन का सीएम बनने के बावजूद उनकी नीयत पाक-साफ न होकर बसपा को बदनाम करने व दलित उत्पीड़न को जारी रखने की रही। मायावती ने इस दौरान बसपा का बचाव करते हुए कहा कि इसी क्रम में उस दौरान अयोध्या, श्रीराम मंदिर व अपर कास्ट समाज से सम्बंधित जिन नारों को प्रचारित किया गया था, वह बीएसपी को बदनाम करने की सपा की शरारत व सोची-समझी साजिश थी। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि अचानक 30 साल बाद मायावती का अपने विवादित नारों के बचाव में ट्वीट करना सियासत में बड़े इशारे करता है।

अपने कैडर वोट में लगी सेंधमारी को रोकने का प्रयास

जटाशंकर सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से समाजवादी पार्टी ने स्वामी प्रसाद मौर्य के कॉलेज में कांशीराम की प्रतिमा लगवा कर 1993 का विवादित नारा लगाया, उसी के बदले में मायावती ने यह काउंटर ट्वीट किया है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि मायावती ने इस ट्वीट के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि सपा और बसपा के गठबंधन के दौर में लगाए जाने वाले वह नारे जिसमें क्षत्रिय, ब्राह्मण और वैश्य समेत राम मंदिर और अयोध्या के अलावा अपर कास्ट को निशाने पर लिया जाता था, वह समाजवादी पार्टी की साजिश थी। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार आरएन सिंह कहते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को 1993 के दौर के नारे लगाए, तो मायावती को यह कहने का मौका मिल गया कि यह नारे तो सपा मुखिया के साथ ही लगाए जाते रहे थे। वह चाहे मुलायम सिंह यादव का दौर रहा हो या फिर अखिलेश यादव का।

यह भी पढ़ें: Lucknow News : निकाय चुनाव में मुस्लिम-दलित समीकरण साधना बसपा के लिए चुनौती

कभी उच्च जाति और राम अयोध्या के नाम पर बसपा के लगाए जाने वाले नारों पर एक तरह से मायावती ने तीस साल बाद सफाई दी है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मायावती ने ऐसा करके अपने कैडर वोट में लगी सेंधमारी को रोकने का प्रयास किया है। इसके अलावा जिन नारों से अपर कास्ट के लोग नाराज होते थे, उन्हें भी 30 साल बाद ही सही यह बताने की कोशिश की है कि वह नारे बसपा नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी लगवाती थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 30 साल बाद अचानक अपने नारों के लिए मायावती की ओर से एक तरह से जारी की गई सफाई का अब कितना फायदा होगा, यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन मायावती की सियासी लाइन का अंदाजा जरूर हो जाता है। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक बृजेश शुक्ला का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह कुछ भी नया नहीं है। शुक्ला कहते हैं कि एक तरह से स्वामी प्रसाद मौर्य उन्हीं पुराने आजमाएं हुए और धार खो चुके हथियारों को अखिलेश यादव के मंच से साझा कर रहे हैं, जो कभी बसपा मुखिया मायावती इस्तेमाल करती थीं। उनका मानना है कि इस तरीके के बयानों से समाजवादी पार्टी को फायदा होने की बजाय नुकसान होने की गुंजाइश ज्यादा है।

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