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UP Politics: क्यों अचानक दिल्ली भाग रहे BJP सांसद? वो भी तब जब बड़े नेता हैं कर्नाटक चुनावों में व्यस्त

Tue, 09 May 2023 11:56 AM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 09 May 2023 11:56 AM IST
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सार
UP Politics: सूत्रों के मुताबिक बताया यही जा रहा है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के हाल में हुए एक अंदरूनी सर्वे और दिल्ली भेजी गई उसकी रिपोर्ट के बाद ही कुछ सांसदों की दिल्ली परिक्रमा बढ़ गई है। चर्चा है कि चुनाव से पहले ही टिकट कटने वाले सांसदों को सिग्नल दे दिया जाएगा...
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UP Politics: BJP internal survey report revealed, many MPs are likely to be denied ticket again
UP Politics: भाजपा - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

उत्तर प्रदेश के कई सांसदों न अचानक दिल्ली की राह पकड़ ली है। सांसदों ने दिल्ली की राह तब पकड़ी है, जब न तो दिल्ली में कोई बहुत बड़ा नेता है, और न ही कोई बहुत बड़ी बैठक या सदन की कार्रवाई। ऐसे में सांसदों के रूटीन दिल्ली दौरे से ज्यादा दौरे की वजहों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक बताया यही जा रहा है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के हाल में हुए एक अंदरूनी सर्वे और दिल्ली भेजी गई उसकी रिपोर्ट के बाद ही कुछ सांसदों की दिल्ली परिक्रमा बढ़ गई है। चर्चा है कि चुनाव से पहले ही टिकट कटने वाले सांसदों को सिग्नल दे दिया जाएगा। ऐसे में टिकट बचाने की सांसदों की दौड़ कर्नाटक चुनाव के बीच से ही शुरू हो गई।

पूर्वांचल से भाजपा के कुछ सांसद तो बीते डेढ़ हफ्ते में तीन बार दिल्ली के चक्कर लगा चुके हैं। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह सांसद दिल्ली में कुछ प्रमुख वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने के लिए पहुंचे थे। इनमें से जिन दो प्रमुख नेताओं से मुलाकात करने के लिए यूपी के सांसद आए वह कर्नाटक चुनाव में व्यस्त होने की वजह से इनसे नहीं मिल सके। उसके बाद भाजपा के कुछ अन्य नेताओं के यहां भी इन सांसदों की हाजिरी लगनी शुरू हुई। सूत्र बताते हैं कि उक्त सांसद जिन दो प्रमुख नेताओं से मिलना चाहते थे फिलहाल उनसे अभी मुलाकात नहीं हो पाई है।

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भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से आने वाले कई सांसदों का दिल्ली दौरा बीते कुछ दिनों में अचानक बढ़ गया है। इसके पीछे का तर्क देते हुए पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि लोकसभा चुनावों से पहले हमेशा की तरह उनकी पार्टी कुछ सर्वे और बैठकें करती है। सर्वे की रिपोर्ट को गोपनीय तरीके से प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन स्तर के शीर्षस्थ नेताओं के साथ साझा किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ समय पहले भी ऐसी ही एक रिपोर्ट तैयार करके संगठनात्मक स्तर के प्रमुख नेताओं के साथ उसे साझा किया गया था। उस रिपोर्ट में बहुत से सांसदों की रिपोर्ट उस लिहाज से नहीं आई है कि इन्हें दोबारा टिकट देकर सियासी मैदान में उतारा जाए। यही वजह है कि जिन सांसदों को इसकी भनक लगी उनकी दिल्ली परिक्रमा शुरू हो गई है।

लगातार दिल्ली की परिक्रमा करने वाले एक सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसका टिकट न कटे। यही वजह है कि वह बीते कुछ समय में कई बार दिल्ली आकर भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी मिले हैं और आगे भी मिलते रहेंगे। हालांकि उनका कहना है कि पहले भी सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में भी सांसद हैं इसलिए उनकी रिपोर्ट भी अच्छी है। बावजूद इसके अपने क्षेत्र में किए गए कार्य को भी अपने प्रमुख नेताओं के साथ न सिर्फ साझा करते हैं, बल्कि आगे के लिए दिशानिर्देश भी ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कई बार के सांसद रहे वरिष्ठ नेता जो कि अपने क्षेत्र में ज्यादा समय बिताते हैं, वह भी इन दिनों दिल्ली के लगातार चक्कर लगा रहे हैं। बीते डेढ़ हफ्ते में तीन बार दिल्ली आने के बारे में उनसे जब सवाल किया, तो सांसद का कहना था कि उनका कुछ व्यक्तिगत कारणों के चलते ही दिल्ली आना जाना बना है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि अगले साल होने वाले चुनाव में उक्त सांसद की उम्र 70 साल से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में वह इसी पैरवी में लगे हैं कि उनका टिकट न कटे।

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लोकसभा के चुनाव हों या विधानसभा के चुनाव, भाजपा किसी भी चुनाव में अपने सभी प्रत्याशियों को दोबारा दोहराती नहीं है। पिछले लोकसभा चुनावों में तो उत्तर प्रदेश के कई सांसद, जो केंद्र में मंत्री भी थे, उनको भी टिकट नहीं दिया गया था। जबकि कई वर्तमान सांसदों के टिकट भी काट दिए गए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार भी सियासी चर्चाएं यही हो रही हैं कि कई बड़े नेताओं का टिकट कटना तय माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हालांकि चुनाव में अभी तकरीबन सालभर का वक्त है। लेकिन भाजपा समय से पहले ही अपने चुनावों की सियासी बिसात बिछाने की सभी रणनीतियां बनानी शुरू कर देती है। सूत्रों का कहना है कि हाल में आए उत्तर प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों के अंदरूनी सर्वे की रिपोर्ट को शीर्ष नेताओं से साझा किए जाने के बाद प्रदेश में सियासी हलचल बढ़ने लगी है।

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