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Supreme Court: आदेश के एक महीने बाद भी आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं करने पर यूपी सरकार को फटकार, जानिए पूरा मामला

Wed, 19 Jan 2022 08:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 19 Jan 2022 08:33 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि आखिर हम क्या सुन रहे हैं? एक महीने पहले हमने आदेश पारित किया था और उस व्यक्ति को अभी तक रिहा नहीं किया गया है। क्या यही स्थिति यूपी राज्य की है, जैसा हमारे सामने पेश किया जा रहा है। आप उस व्यक्ति को एक महीने बाद भी रिहा नहीं करेंगे। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है।

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UP government reprimanded for not releasing the accused on bail even a month after the order Supreme Court Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महीने पहले के उसके आदेश के बावजूद 3,500 करोड़ रुपए की नोएडा बाइक बॉट पोंजी योजना के सिलसिले में गिरफ्तार एक व्यक्ति को रिहा नहीं करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। 

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पीठ ने कहा कि आखिर हम क्या सुन रहे हैं? एक महीने पहले हमने आदेश पारित किया था और उस व्यक्ति को अभी तक रिहा नहीं किया गया है। क्या यही स्थिति यूपी राज्य की है, जैसा हमारे सामने पेश किया जा रहा है। आप उस व्यक्ति को एक महीने बाद भी रिहा नहीं करेंगे। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने आरोपी विजय कुमार शर्मा को 13 दिसंबर, 2021 को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया था और उसके आदेश के बावजूद उसे रिहा नहीं किया गया। इतना ही नहीं एक मजिस्ट्रेट अदालत ने उसके आदेश का उल्लंघन करते हुए आरोपी को आगे की हिरासत में भेज दिया। पीठ ने कहा कि हम जांच अधिकारी के आचरण की निंदा करते हैं और जिस तरह से मजिस्ट्रेट ने इस अदालत द्वारा 13 दिसंबर, 2021 को पारित आदेश की अवहेलना करते हुए आवेदक को रिमांड पर लेने का निर्देश दिया, उस पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करते हैं।
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पीठ ने कहा कि हम संबंधित जांच अधिकारी को निर्देश देते हैं कि वह आवेदक को रिहा करने के लिए तुरंत कदम उठाए और बिना समय गंवाए इस अदालत के आदेश का पालन करे। हम यूपी के राज्य अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि भविष्य में ऐसी त्रुटि या गलती को दोहराया नहीं जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश की प्रति आगे की कार्रवाई के लिए सचिव गृह विभाग के पास भेजमे के लिए कहा है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने उद्देश्य के साथ आदेश पारित किया था और अगर राज्य अब इसका पालन करने में विफल रहता है तो वह संबंधित सचिव को तलब करेगा। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद दिवाकर ने पीठ को आश्वासन दिया कि व्यक्ति को बुधवार को ही रिहा कर दिया जाएगा।

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