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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   UP Election 2022: Nomination completed in Mulayam stronghold Firozabad Etah Mainpuri Etawah

उत्तर प्रदेश चुनाव: मुलायम के गढ़ में नामांकन पूरा, भाजपा ने पहले किया था सफाया, इस बार ये हैं हालात

Fri, 04 Feb 2022 02:51 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 04 Feb 2022 02:51 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के तीसरे चरण की 59 विधानसभा क्षेत्रों का नामांकन बुधवार को खत्म हो गया। इस चरण में हाथरस, फिरोजाबाद, कासगंज, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा सहित 16 जिलों में चुनाव होने हैं...

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UP Election 2022: Nomination completed in Mulayam  stronghold Firozabad Etah Mainpuri Etawah
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साथ अखिलेश यादव। - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के गढ़ में इस बार समाजवादी पार्टी का बहुत कुछ दांव पर लगा है। पहली बार समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी विधानसभा का चुनाव इसी क्षेत्र से लड़ने जा रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यहां पर विपक्षियों का सूपड़ा साफ कर दिया था। इस बार भाजपा को अपनी सीटें बचाने के साथ बढ़ाने का भी दबाव है। वहीं अखिलेश और शिवपाल में हुई एका के चलते समाजवादी पार्टी अपने घर में एक बार फिर से अपना झंडा लहराने के लिए सारी ताकत झोंक रही है।

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49 सीटों पर था कब्जा

उत्तर प्रदेश के तीसरे चरण की 59 विधानसभा क्षेत्रों का नामांकन बुधवार को खत्म हो गया। इस चरण में हाथरस, फिरोजाबाद, कासगंज, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा सहित 16 जिलों में चुनाव होने हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन जिलों की 59 सीटों पर भाजपा ने 49 सीटों पर कब्जा किया था। समाजवादी पार्टी ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस ने एक और बसपा ने एक सीट जीती थी।

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करहल से चुनाव लड़ेंगे अखिलेश यादव

तीसरे चरण में होने वाले इन जिलों की 59 सीटों पर रोचक मुकाबला है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव के करहल से चुनाव लड़ने का फायदा आसपास के कई जिलों के समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को भी मिलेगा। इसी तरह समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव जसवंत नगर से चुनाव लड़ रहे हैं। अखिलेश और शिवपाल में हुए समझौते को भी समाजवादी पार्टी बढ़ी हुई सीटों के तौर पर देख रही है। राजनीतिक विशेषज्ञ जीडी शुक्ला कहते हैं कि यह वह इलाका है जहां पर सपा का परचम मुलायम सिंह यादव के जमाने से बुलंद रहा है। 2017 के चुनावों में भाजपा की आंधी में यहां पर सपा के पांव उखड़ गए थे।

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सपा-प्रसपा का समझौता फायदेमंद

राजनीतिक विशेषज्ञ जीडी शुक्ला कहते हैं कि यह इलाका यादव बेल्ट के तौर पर पहचाना जाता है। इसके साथ समाजवादी पार्टी का इस पूरे इलाके में जबरदस्त प्रभाव है। वह कहते हैं बुंदेलखंड की सीटें भी समाजवादी पार्टी के प्रभाव में रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में जिन आठ सीटों पर समाजवादी पार्टी चुनाव जीती थी, उसमें चार विधायक यादव थे। 2012 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी तो सपा की 37 सीटें थीं। जिसमें कन्नौज, इटावा, मैनपुरी और एटा की सभी सीटें सपा के खाते में आई थीं।



इस इलाके के राजनीतिक जानकार जगदंबा प्रसाद यादव कहते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच में अंदरूनी तौर पर दरारें पड़ने लगी थीं। यही वजह रही थी कि जिस मजबूती के साथ समाजवादी पार्टी को इस इलाके में चुनाव लड़ना था, वह नहीं लड़ सकी और परिणाम उसके विपरीत चला गया। वह उम्मीद करते हैं कि इस बार शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच हुए समझौते का असर समाजवादी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। लेकिन उनका कहना है भाजपा भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

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