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तीसरी लहर: बड़ी रैलियों पर लगा प्रतिबंध तो सोशल मीडिया पर लड़ी जाएगी लड़ाई, कौन रहेगा फायदे में तो किसे हो सकता है नुकसान

Wed, 05 Jan 2022 05:26 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 05 Jan 2022 05:26 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मैराथन रैलियों को रद्द करने का फैसला लिया है। लेकिन अभी भी कांग्रेस की प्रतिज्ञा रैलियां आयोजित की जा रही हैं। यदि चुनाव आयोग बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध लगाने जैसा कोई कदम उठाता है, तो पार्टी के शीर्ष नेताओं की राय के आधार पर चुनावी अभियान आगे बढ़ाया जाएगा...

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UP election 2022: If the Election Commission can ban large election rallies of all parties, then the battle for Uttar Pradesh elections will be fought on social media
रैली - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए कांग्रेस ने आजमगढ़ में आयोजित होने वाली मैराथन रैली रद्द कर दी है। इसी प्रकार नौ जनवरी को वाराणसी में आयोजित होने वाली रैली भी रद्द कर दी गई है। पार्टी ने इसे रैली के प्रतिभागी बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला बताया है। अभी उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर तिथियां घोषित नहीं की गई हैं, लेकिन माना जा रहा है कि तिथियों की घोषणा के साथ ही चुनाव आयोग सभी दलों की बड़ी चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगा सकता है। यदि ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश चुनाव की लड़ाई सोशल मीडिया पर लड़ी जाएगी। ऐसी स्थिति में उसी दल को बढ़त मिल सकती है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सबसे बेहतर उपयोग कर पाएगा। यह स्थिति कुछ राजनीतिक दलों के लिए फायदेमंद तो कुछ के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार 15.02 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इसमें 18 से 30 वर्ष की आयु के 3.89 करोड़ मतदाता भी शामिल हैं, जिनका बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह वर्ग जिस राजनीतिक दल की पकड़ में आएगा, चुनाव परिणाम के उसके पक्ष में मुड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
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हालांकि, इसके बाद भी उत्तर प्रदेश की सामाजिक-शैक्षिक स्थिति अभी भी ऐसी है कि यहां के मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से दूर है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों के मतदाता अभी भी जातीय-सामाजिक समीकरणों से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राजनीतिक दलों को छोटी-छोटी जनसभाओं, नुक्कड़ सभाओं का सहारा लेना पड़ सकता है।

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भाजपा वर्चुअल प्रचार के लिए तैयार

भारतीय जनता पार्टी के एक प्रवक्ता स्तर के नेता ने बताया कि पार्टी ने अभी इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया है। चुनाव आयोग जब इस बारे में स्थिति साफ करेगा, तभी इस पर कोई रणनीति बनेगी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी हमेशा डिजिटलाइजेशन को महत्त्व देते रहे हैं। वे पार्टी कार्यकर्ताओं को भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का संदेश देते रहे हैं। यही कारण है कि पार्टी की सोशल मीडिया पर पकड़ अच्छी बनी हुई है। यदि बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध लगा तो सोशल मीडिया, ऑडियो-वीडियो संदेश और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए लोगों के साथ जुड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी इस स्थिति में भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।   

कांग्रेस ने भी कहा- हैं तैयार हम

उत्तर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि पार्टी ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मैराथन रैलियों को रद्द करने का फैसला लिया है। लेकिन अभी भी कांग्रेस की प्रतिज्ञा रैलियां आयोजित की जा रही हैं। यदि चुनाव आयोग बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध लगाने जैसा कोई कदम उठाता है, तो पार्टी के शीर्ष नेताओं की राय के आधार पर चुनावी अभियान आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार पार्टी को सोशल मीडिया पर मजबूत करते आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया टीम बेहद शानदार तरीके से काम कर रही है। यूपी में हर जिले के हर ब्लॉक स्तर तक सोशल मीडिया की टीम खड़ी की जा चुकी है और वे इसी टीम के दम पर अपना चुनाव प्रचार आगे बढ़ाएंगे।

सोशल मीडिया नहीं निभाएगा बड़ा रोल - सपा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रकृति अलग है और यहां के चुनाव में सोशल मीडिया बहुत बड़ा रोल नहीं निभाएगा। गांव-देहात का असली मतदाता अभी भी इन प्लेटफॉर्म से बहुत दूर है। उसे महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं और वह उन्हीं से प्रभावित होकर मतदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उनकी पार्टी सोशल मीडिया सहित हर मोर्चे पर मजबूती के साथ डटी हुई है और भाजपा का डटकर मुकाबला करेगी।   

बसपा भी मीडिया के सहारे लड़ेगी लड़ाई

वहीं, बहुजन समाज पार्टी के एक प्रमुख नेता ने अमर उजाला से कहा कि वे मुख्यधारा की मीडिया से ज्यादा सोशल मीडिया पर भरोसा करते हैं, जो ‘उनकी बात’ ‘उनके लोगों’ तक बिना किसी लाग-लपेट के पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी रणनीति के साथ पार्टी ने शुरूआती दौर में ही बहुजन मीडिया के अपने विशेष समर्थक तैयार किये हैं, जो उनका चुनाव प्रचार आगे बढ़ाने में अहम रोल निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध लगने के बाद भी उनकी चुनावी तैयारियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

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