उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या योगी की इस नीति ने फेरा शाह की मेहनत पर पानी? अब 'फ्रेंडली फाइट' की रणनीति दिखा सकती है रंग
राजनीतिक जानकारों का कहना है, चुनाव में संभावनाएं सदैव बरकरार रहती हैं। यहां कोई 'सेंध' भी काम नहीं आएगी। भाजपा नेतृत्व अच्छी तरह समझ रहा है कि योगी की कार्यशैली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मेहनत पर पानी फेर दिया। पिछले चुनाव में शाह ने दलितों व पिछड़ों को लेकर जो टीम खड़ी की थी, अब वहां अखिलेश यादव की सेंध लग गई है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शनिवार को भाजपा ने पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए 107 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। दूसरी ओर, बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपने जन्मदिन पर पहले चरण के लिए 58 में से 53 सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया। बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को अपनी 'न्यू' प्लानिंग पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार के बिना 'सोशल इंजीनियरिंग' संभव नहीं है। योगी सरकार में 'रोको और ठोको' ही चलता रहा। इसके चलते 500 से अधिक ब्राह्मणों को मार दिया गया।
यूपी के राजनीतिक जानकारों का कहना है, चुनाव में संभावनाएं सदैव बरकरार रहती हैं। यहां कोई 'सेंध' भी काम नहीं आएगी। भाजपा नेतृत्व अच्छी तरह समझ रहा है कि योगी की कार्यशैली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मेहनत पर पानी फेर दिया। पिछले चुनाव में शाह ने दलितों व पिछड़ों को लेकर जो टीम खड़ी की थी, अब वहां अखिलेश यादव की सेंध लग गई है। इसकी जिम्मेदारी कहीं न कहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ही आएगी। साथ ही यूपी में बसपा की 'फ्रेंडली फाइट' काम कर गई, तो अप्रत्याशित चुनावी नतीजे मिलना तय है।
बसपा ने खड़े किए कई सवर्ण प्रत्याशी
बसपा ने 53 सीटों पर जो उम्मीदवार घोषित किए हैं, उनमें सवर्ण जातियों के भी कई उम्मीदवार हैं। सतीश मिश्रा ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, यूपी में दलित, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समाज, ये सभी बसपा के समर्थक रहे हैं। इन्होंने बसपा का राज देखा है। भाजपा ने गत विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज को अपने साथ मिलाने का प्रयास किया था। यूपी में बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जो समाज में भेदभाव को दूर कर सकती है। ब्राह्मण समाज को भाजपा और योगी की सच्चाई का पता चल चुका है। इस चुनाव में ब्राह्मण धोखा नहीं खाएंगे।
भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने बताया कि उत्तरप्रदेश की जनता मोदी और योगी के साथ है। लोगों ने भाजपा शासन की योजनाओं को देखा है। गरीब, दलित या पिछड़े सभी वर्ग पीएम मोदी के साथ हैं। वे उन्हें मसीहा के रुप में देखते हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा 300 से अधिक सीटें जीतेगी। टिकट काटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर केंद्रीय नेतृत्व विचार करता है। प्रधानमंत्री और दूसरे वरिष्ठ नेताओं की कमेटी उम्मीदवार तय करती है। यदि किसी सीट पर कोई मौजूदा विधायक कमजोर है तो उसे बदल दिया जाता है।
अखिलेश बोले- भाजपा 100 फीसदी हताश
उत्तर प्रदेश चुनाव अब एक रोचक स्थिति में जा पहुंचा है। भरोसा, सेंध और कूटनीति सब दांव पर है। शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा, सपा व सहयोगियों पर एफआईआर, प्रत्याशी की गिरफ्तारी व नेताओं को धमकी जैसे कायराना कृत्य दिखा रहे हैं कि भाजपा सौ फीसदी हताश है। उत्तर प्रदेश के एक भी ग्रामीण या उप-शहरी क्षेत्र में भाजपा नहीं जीत रही है और केवल एक शहर की सीट को सुरक्षित समझ रही है। अबकी बार 99 फीसदी शहरी वोटर भी भाजपा के ख़िलाफ हैं। चुनाव का जमीनी स्तर पर विश्लेषण कर रहे वरिष्ठ पत्रकार निर्मल यादव ने कहा, यूपी की राजनीति को समझना उतना आसान नहीं है। अगर बसपा ने किसी क्षेत्र में ज्यादातर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दे दिया तो क्या होगा। सपा को वहां ओबीसी उम्मीदवार मैदान में उतारने पड़ेंगे। पश्चिमी यूपी में बीएसपी मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसे में सपा का खेल बिगड़ जाएगा। अभी ये किसको मालूम है कि असल समझौता किनके बीच है। बसपा के 2017 में केवल 19 विधायक जीते थे, उनमें से अब केवल तीन ही विधायक बचे हैं। इसके बावजूद बसपा को उम्मीद नजर आ रही है।
निर्मल यादव कहते हैं कि यूपी के चुनाव में ऐसा भी हो सकता है कि जो लोगों को नजर आ रहा हो, वैसा कुछ न हो। लोगों को कई दिनों से अखिलेश यादव दिख रहे हैं। भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के सपा में आने के बाद अखिलेश की टोन कुछ बदली सी नजर आ रही है। यहीं पर फ्रेंडली फाइट का जिक्र करना जरूरी है। मायावती और अखिलेश यादव पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का कोई न कोई केस चलता ही रहता है। चुनाव से पहले सब शांत रहा। ये किसे मालूम है कि भाजपा ने चुनाव परिणाम आने के बाद की स्थिति के लिए बसपा को गुपचुप तरीके से समझा लिया हो। बैठे बिठाए और बिना किसी खर्च व प्रचार के अगर सीटों की संख्या 19 से बढ़कर 30-40 हो जाए तो कैसा रहेगा।
बसपा हाईटेक प्रचार से भी दूर
मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण मिलकर कुछ नया कर बैठें। बसपा, अभी तक हाईटेक प्रचार से भी दूर है। मायावती, कभी कभार ही नजर आती हैं। सपा खूब पैसा खर्च कर रही है। अखिलेश यादव के कई विधायक और नेता इस बात से नाराज हैं कि भाजपा से आए लोगों को अब कहां एडजस्ट करेंगे। अखिलेश यादव के समर्थक बुझे मन से कह रहे हैं कि अरे भाई सरकार बदलने जा रहे हैं। हमें तो इतनी ही शांति बहुत है कि सपा का शासन आ जाए। हालांकि सपा में एडजस्टमेंट आसान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ेंगे। इस बात पर लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मतलब ठीकरा फूटने जा रहा है। जब सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो जाएगी तब चुनावी स्थिति को और अधिक गहराई से समझा जा सकेगा।