फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP CM Yogi Adityanath's cow love makes trouble for Farmers

मुख्यमंत्री योगी के 'गौ-प्रेम' से परेशान उत्तर प्रदेश के किसान, बिगड़ा पशुधन और खेती का गणित

Sat, 28 Dec 2019 02:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, वाराणसी
शशिधर पाठक, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 28 Dec 2019 02:39 PM IST
विज्ञापन
UP CM Yogi Adityanath's cow love makes trouble for Farmers
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
वाराणसी के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव के त्रिशूल पर बनी मोक्ष दायनी नगरी है। भगवान शिव का वाहन नंदी बैल है, लेकिन बनारस शहर में गौवंश की संख्या काफी बढ़ गई है। वाराणसी से बाहर निकलिये बाबतपुर हवाई अड्डे की तरफ। खालिसपुर गांव तक 25 गावों की कहानी काफी परेशान करती है। कड़ाके की ठंड में किसानों के सामने अपनी फसल बचाने की चुनौती लगातार भयानक रूप ले रही है।
विज्ञापन


जलालपुर से पहले रेहटी, चंदवक रोड पर नेवादा पराऊगंज तक किसानों को खेत पर लगातार पहरा देना पड़ रहा है। इसके बाद भी पलक झपकी नहीं कि 20-25 के झुंड में आवारा घूम रहे गौवंश पशु फसल साफ कर देते हैं।

विज्ञापन

 

सैदनपुर के राम निहोर मटर और सब्जियों से अच्छी कमाई कर लेते थे, लेकिन इस बार जितनी कड़ाके की ठंड है, उतना ही ठंडा हाथ हो रहा है। कारण केवल एक है। गौवंश आते हैं और फसल बरबाद कर रहे हैं। राम निहोर बताते हैं कि सड़कों पर भी घूमते आवारा पशुओं की गाड़ियों से टक्कर हो जा रही है और दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। जौनपुर से सुल्तानपुर रोड पर कई गांव हैं। मड़ई में अलाव जलाकर ठंड से बचने में लगे दिनेश, अजीत और किशोर को भी खुद से ज्यादा चिंता खेत में बोए गेहूं की है। बताते हैं पिछले साल तो गौवंश का झुंड आता था और गेहूं की फली को ही चर जाता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

30 रुपये में कौन सी गाय खाएगी?

किसानों की सुनिए मुख्यमंत्री जी। किशोर बताते हैं कि राज्य सरकार ने ब्लाक के स्तर पर आवारा घूमने वाले गौवंश के लिए कुछ इंतजाम किया है। टिन शेड का घेरा बनाकर वहां कुछ गाय, बछड़ों के रखने का इंतजाम हुआ है। सरकार ने इसके लिए प्रतिदिन, प्रति गाय 30 रुपये देने की व्यवस्था की है, लेकिन 30 रुपये में बाजार भाव के हिसाब से अधिकतम तीन किलो भूसा ही आ सकता है। जबकि एक गाय या जानवर को दिनभर में चार से पांच किलो भूसा की जरूरत होती है।


किसानों का कहना है कि सरकार के इस शेल्टर होम में ज्यादा से ज्यादा 40-50 गाय-बछड़े रखे जा सकते हैं। जबकि इनकी संख्या हर ब्लाक में कहीं ज्यादा हैं। हालांकि कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें अब नगर पंचायत स्तर पर गायों के शेल्टर होम खोले जाने की जानकारी मिली है। अभी यह योजना अमल में आने वाली है, लेकिन इससे भी कोई राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है।

पशुधन, खेती दोनों का गणित गड़बड़ाया

इंटर कालेज के अध्यापक नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि छुट्टा गौवंश किसान का पशुधन और खेती दोनों का गणित बिगाड़ रहे हैं। हालांकि कई लोगों का मानना है कि योगी सरकार ने धार्मिक रूप से यह काम सही किया है। गाय और गौवंश पूजे जाते हैं। इनका वध नहीं किया जाता। अधिकांश गौवंश बिहार के रास्ते, बंगाल और नेपाल चले जाते थे। लेकिन बदले समय में अब बैलों की उपयोगिता पूरी तरह से घट गई है। देशी गाय ब्याने के बाद केवल पांच-छह महीने दूध देती है। जर्सी या अन्य गायों के बछड़े का खेती के काम में कोई उपयोग नहीं हो पाता। गांवों में चरागाह रह नहीं गए। इस स्थिति में सबसे बड़ी समस्या गाय और गौवंश पालना ही है।

गायों के भी घट गए दाम

किसानों को दूसरी मार भी पड़ रही है। बताते हैं पहले जर्सी गायों के अच्छे दाम मिल जाते थे। वह जर्सी गाय की बछिया पालते थे और गाय बनने के समय में ऊंची कीमत में बेच देते थे। इससे मिले रुपये से खेती, खलिहानी का बड़ा काम हो जाता था। शादी, ब्याह के काम होते थे। लेकिन अब गायों के रेट काफी कम हो गए हैं। इसके उलट भैंस के रेट बढ़ गए हैं। इससे गांव में जहां पशु पालन मंहगा हो रहा है, वहीं गांव में दूध का उत्पादन खराब हो रहा है। तमाम घरों में दूध है ही नहीं। किसान योगेश नारायण कहते हैं कि जब बच्चों को दूध, दही, मक्खन, घी नहीं मिलेगा तो उनका अच्छा पोषण कैसे होगा?

केवल बछिया ही जनेगी: नया सवाल

किसान के बीच में एक सवाल उछालिए कि अब तो आने वाले समय में गाय केवल बछिया ही जनेगी। वैज्ञानिकों ने ऐसा सीमन तैयार कर लिया है। इस सवाल पर किसान अनिल कुमार ही सवाल खड़ा कर देते हैं। अनिल कुमार सिंह का कहना है कि मुझे अभी यह योजना समझ में कम आ रही है। अनिल कुमार का कहना है कि इस तरह के सीमन की सरकारी कीमत 1500 रुपये सुनने में आ रही है। जबकि औसतन कृत्रिम गर्भाधान का तरीका अपनाने पर औसतन दो-तीन बार सीमन चढ़वाने की जरूरत पड़ती है। इस तरह से 3000 रुपये का किसानों के ऊपर आने वाला यह खर्च नया बोझ ही होगा। दूसरे इस तरह के बार-बार कृत्रिम गर्भाधान के तरीके अपनाने पर गाय औसत समय से पहले ही गर्भधारण करने के अयोग्य हो जा रही हैं।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed