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सार्वजनिक निवेश में पिछड़ा उत्तर प्रदेश, 16 राज्यों में सबसे पीछे

Wed, 22 Jun 2016 03:01 AM IST
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Jun 2016 03:01 AM IST
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UP Backward The World Bank report

विश्व बैंक द्वारा भारत के विकास पर जारी एक रिपोर्ट ने सार्वजनिक व्यय के मामले में उत्तर प्रदेश को देश के 16 राज्यों में सबसे पीछे पाया है। ढांचागत संरचनाओं एवं अन्य संसाधनों में निवेश के लिए समाजवादी पार्टी शासित उत्तर प्रदेश में पिछले साल पूंजी परिव्यय (कैपिटल आउटले) में एक साल पहले के मुकाबले  1.3 फीसदी की कटौती हुई है।

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जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित झारखंड का स्थान इस सूची में सबसे ऊपर है। हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस शासित उत्तराखंड और भाजपा शासित गुजरात नीचे से दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं।
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इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले विश्व बैंक के अर्थशास्त्री फ्रेडरिको गिल सेंडर ने बताया कि वर्ष 2015-16 के दौरान भारत में सार्वजनिक निवेश तो बढ़ा लेकिन जिस हिसाब से यह केन्द्र में बढ़ा, वैसा समर्थन राज्यों से नहीं मिला।
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हालांकि उन्होंने झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों की तारीफ की कि वहां आलोच्य अवधि में सार्वजनिक निवेश बढ़ा है। लेकिन उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में सार्वजनिक निवेश में बढ़ोतरी नहीं होने से इन राज्यों में विकास की गतिविधियां सीमित रहीं। 

सूची में शामिल राज्यों में सबसे ज्यादा झारखंड का पूंजी परिव्यय बढ़ा है। वहां पिछले वर्ष के मुकाबले आलोच्य वर्ष में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद ओडिशा में 1.4 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 1.3 फीसदी, तेलांगाना में 1.1 फीसदी तथा राजस्थान और बिहार में एक-एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

फ्रेडरिको गिल का कहना है कि वित्त वर्ष 2015-16 केदौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी हुई। इसी दौरान भारत में कुछ पेट्रोलियम पदार्थों पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी हुई। इस वजह से केन्द्र सरकार को जहां ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ, वहीं सब्सिडी का बिल घट गया। इसलिए सार्वजनिक निवेश के लिए सरकार को ज्यादा पैसे मिले।

 इस दौरान देखा जाए तो सड़क, रेलवे और सिंचाई सुविधाओं के लिए तो खास कर बढ़ोतरी हुई। यदि एक साल पहले के पूंजी परिव्यय की तुलना करें तो वर्ष 2015-16 के दौरान केन्द्र सरकार के पंजीगत खर्च मं 20.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

यदि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले इसे देखें तो यह उसका 1.8 फीसदी है। एक वर्ष पहले भारत सरकार का पूंजीगत खर्च जीडीपी का 1.6 फीसदी ही था। रिपोर्ट के मुताबिक आलोच्य अवधि में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में पूंजीगत खर्च में 83 फीसदी की वृद्घि हुई। 


इसके बाद ग्रामीण एवं शहरी विकास विकास विभाग और रेलवे का स्थान रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2014-15 में राजमार्ग क्षेत्र की 70 से भी ज्यादा परियोजनाएं अटकी थीं, जो कि 8,300 किलोमीटर के बराबर है। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठे और फरवरी 2016 तक इनमें से करीब 85 फीसदी परियोजनाएं पटरी पर लौट गईं।

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