पंजाब की जेलों में हर चौथे दिन ड्रग्स की वजह से हो रही है एक मौत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब में ड्रग्स का कहर कितना बढ़ गया है, इसका अंदाजा इन्हीं आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि नशे की लत की वजह से हर चार दिन में एक व्यक्ति की हवालात या जेल में मौत हो जाती है। इसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब आरटीआई के तहत पुलिस और जेल रिकॉर्ड की तफ्तीश की गई तो ड्रग्स से जुड़ी इस भयावह घटना की तस्वीर सामने आई। पंजाब के विभिन्न जिलों के पुलिस रिकॉर्ड्स की छानबीन करने पर पता चला कि हर रोज करीब 25 लोगों को ड्रग सेवन करने के आरोपों में गिरफ्तार किया जाता है, जिसकी वजह से हवालातों और जेलों में लगातार ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।
नशे की लत से ऐसे लोगों में शारीरिक और मानसिक लक्षणों में काफी परिवर्तन आया है जिससे निपटने और उनका इलाज करने के लिए जेलों में मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। इसके परिणामस्वरूप जेलों में बंद कैदियों की हालात दिनों दिन खराब होती जाती है और वह बीमार हो जाते हैं, जिस वजह से उनकी मौत भी हो जाती है। जेलों में कैदियों की मौत का यह आंकड़ा काफी हैरान करने वाला है।
बच्चे क्या सोचेंगे इसलिए दे दी जान
आंकड़ों के मुताबिक दो साल के भीतर नार्कोटिस्क ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत 174 लोगों को नामजद किया गया जिसमें से साल 2014 में 88 और 2015 में 86 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। इस साल 30 अप्रैल तक के आंकड़ों की पड़ताल करने पर इस बात का भी खुलासा हुआ कि इस साल ऐसे आंकड़ों में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत 17 अप्रैल 2015 को जालंधर के बारा पिंड गांव से गिरफ्तार किए गए 45 वर्षीय तरुण कुमार ने एक महीने में जेल के अंदर फांसी से लटककर आत्महत्या कर ली। उनकी पत्नी ने बताया, 'वह जब भी अपने पति से मिलने जेल जाया करती तो वह अपने ड्रग की लत की वजह से शर्मिंदगी महसूस किया करते थे। वह यह सोचते रहते थे कि उनकी इस लत को लेकर उनके दो बच्चे क्या सोचेंगे?'
वहीं जेल में ड्रग की लत से जूझ रहे लोगों की संख्या और उनकी मौत पर पंजाब के पूर्व आईजी (जेल) शशि कांत का कहना है कि ऐसे लोगों को जेल में डालने की बजाय नशामुक्ति केंद्रों में ले जाना चाहिए जिससे की उनकी लत छुड़ाई जा सके। उन्होंने बताया, 'नशे की लत से जूझ रहे लोग शारीरिक या मानसिक बीमारियों से शिकार हो जाते हैं। अगर ऐसे लोगों को जेल में डाल दिया जाता है तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है। ऐसे नशेड़ियों को नशा मुक्ति केंद्रों में भेजा जाना चाहिए न कि जेल में।'
हालांकि, अमृतसर जेल की कहानी राज्य के अन्य जिलों से बिल्कुल अलग है । यह एक मात्र ऐसा जेल है जहां नशा-मुक्ति केंद्र की सुविधा उपलब्ध है जिसकी स्थापना साल 2012 में की गई थी। बावजूद इसके इस जेल में साल 2014 में एनडीपीएस एक्ट के तहत लाए गए लोगों में से छह लोगों की मौत हो गई थी। इस बारे में खदूर साहिब सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी और जेल के भीतर नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत करने वाले डॉ अमृतपाल सिंह निब्बर ने बताया, 'पहले यह नशामुक्ति केंद्र मजह 25 बेड के साथ शुरू हुआ था लेकिन 2014 में सत्ता द्वारा नशा उन्मूलन अभियान चलाए जाने के बाद इसे बढ़ाकर 400 बेड का करना पड़ा।' एक आंकड़े के मुताबिक इस जेल में 1,665 कैदियों की रहने की व्यवस्था है लेकिन यहां 3,238 कैदी रह रहे हैं जिनमें से 1,232 कैदी ऐसे हैं जिन्हें नशे के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।