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अविश्वास प्रस्ताव के 'बहाने' विपक्ष की एकजुटता भाजपा के लिए बड़ी चुनौती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Jul 2018 09:30 AM IST
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संसद जाते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
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मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भले ही औंधे मुंह गिर गया हो, लेकिन इसमें विपक्ष की एकजुटता जरूर देखने को मिली। जिस तरह से कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा से खफा सभी राजनीतिक पार्टियों को एकजुट करने में जुटी हुई है, उसका ये मकसद अब धीरे-धीरे कामयाब होता नजर आ रहा है, जो भाजपा के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है।
सदन में भाजपा को नहीं मिला शिवसेना का साथ
अविश्वास प्रस्ताव से पहले भाजपा ने अपने सभी सहयोगी दलों से सदन में मौजूद रहने का आग्रह किया था। लेकिन इसके बावजूद शिवसेना लोकसभा में मौजूद नहीं रही। हालांकि शिवसेना काफी पहले से ही मोदी सरकार से खफा है और उसने अविश्वास प्रस्ताव में शामिल न होकर भाजपा को तगड़ा झटका दिया।
बीजेडी भी ऐन वक्त पर पीछे हटी
एक समय भाजपा की सहयोगी रही बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी सदन में भाजपा के खिलाफ अपने तेवर दिखाए और ऐन वक्त पर वो अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ भाजपा का साथ देने से पीछे हट गई। भाजपा के लिए यह भी किसी झटके से कम नहीं था।
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राहुल ने दिखाए आक्रामक तेवर
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में जिस तरह से राहुल गांधी ने आक्रामक तेवर दिखाए और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले किए, वो भाजपा के लिए किसी टेंशन (परेशानी) से कम नहीं है। राहुल ने राफेल डील, बैंक घोटाला और रोजगार को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमले किए। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी लपेटे में लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाने का भी मोदी सरकार पर आरोप लगाया। उनके इस करारे हमले को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि 2019 लोकसभा चुनाव में वो भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस ने विपक्ष को एकजुट किया
अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस विपक्ष को एकजुट करने में सफल रही। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), मार्क्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी (माकपा) समेत कई विपक्षी दल कांग्रेस के साथ दिखे। यह निश्चित तौर पर भाजपा के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि इसका असर अगले आम चुनाव में देखने को मिल सकता है। अगर कांग्रेस इसी तरह विपक्षी पार्टियों को साथ लेकर चलने में कामयाब रही तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक अच्छा-खासा आंकड़ा बना सकता है।
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सदन में भाजपा को नहीं मिला शिवसेना का साथ
अविश्वास प्रस्ताव से पहले भाजपा ने अपने सभी सहयोगी दलों से सदन में मौजूद रहने का आग्रह किया था। लेकिन इसके बावजूद शिवसेना लोकसभा में मौजूद नहीं रही। हालांकि शिवसेना काफी पहले से ही मोदी सरकार से खफा है और उसने अविश्वास प्रस्ताव में शामिल न होकर भाजपा को तगड़ा झटका दिया।
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बीजेडी भी ऐन वक्त पर पीछे हटी
एक समय भाजपा की सहयोगी रही बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी सदन में भाजपा के खिलाफ अपने तेवर दिखाए और ऐन वक्त पर वो अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ भाजपा का साथ देने से पीछे हट गई। भाजपा के लिए यह भी किसी झटके से कम नहीं था।
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राहुल ने दिखाए आक्रामक तेवर
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में जिस तरह से राहुल गांधी ने आक्रामक तेवर दिखाए और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले किए, वो भाजपा के लिए किसी टेंशन (परेशानी) से कम नहीं है। राहुल ने राफेल डील, बैंक घोटाला और रोजगार को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमले किए। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी लपेटे में लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाने का भी मोदी सरकार पर आरोप लगाया। उनके इस करारे हमले को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि 2019 लोकसभा चुनाव में वो भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस ने विपक्ष को एकजुट किया
अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस विपक्ष को एकजुट करने में सफल रही। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), मार्क्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी (माकपा) समेत कई विपक्षी दल कांग्रेस के साथ दिखे। यह निश्चित तौर पर भाजपा के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि इसका असर अगले आम चुनाव में देखने को मिल सकता है। अगर कांग्रेस इसी तरह विपक्षी पार्टियों को साथ लेकर चलने में कामयाब रही तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक अच्छा-खासा आंकड़ा बना सकता है।