Farmers Protest: किसान दिवस पर संयुक्त मोर्चा सरकार को सौंप सकता है लिखित जवाब
- पंजाब की किसान जत्थेबंदियों की मंगलवार को हुई मैराथन मंथन बैठक में कई बिंदु तय
- जवाबी पत्र में सवालों के साथ फिर सरकार के पाले में गेंद डालने की रणनीति
- 23 व 26 दिसंबर को श्रद्धांजलि, किसान एकता मोर्चा 24 को वेबिनार से दस हजार लोगों को जोड़ेगा
- केरल में कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को राज्यपाल की मंजूरी नहीं
- केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उम्मीद, आंदोलनकारी संगठनों से जल्द हो सकती बातचीत
- अंबाला और मुरादाबाद में किसान उग्र, हरियाणा के सीएम और मुरादाबाद के एसएसपी पर ‘गुस्सा’ उतारा
- आयकर छापे के बाद पंजाब के आढ़तियों ने चार दिन बंद की घोषणा की
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विस्तार
सरकार से मिले नए पत्र का आंदोलनकारी किसानों ने अब लिखित जवाब देने का फैसला किया है। किसान दिवस पर 23 दिसंबर को सरकार को जवाब सौंपने की तैयारी है। मंगलवार को पंजाब के आंदोलनकारी किसान संगठनों ने घंटों मैराथन मंथन के बाद लिखित जवाब के कई बिंदुओं पर चर्चा की। जवाब का खाका भी तैयार कर लिया। इस पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े देश के अन्य किसान संगठनों से बुधवार को निर्णायक बैठक में अंतिम मंत्रणा होगी। सरकार को भेजे जाने वाले जवाबी पत्र पर मुहर लगते ही किसान दिवस पर 23 दिसंबर को ही सरकार को जवाब सौंपा जा सकता है।
मैराथन मंथन बैठक में उपजे सवाल-जवाब
पंजाब के आंदोलनकारी करीब 32 किसान संगठनों की मंगलवार को हुई बैठक में ज्यादातर ने सवाल उठाया कि सरकार के पत्र में कोई नया प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने बातचीत की तारीख भी तय नहीं की है। सरकार की ओर से बातचीत कौन करेगा, यह भी साफ नहीं है। ऐसे में यदि बातचीत होती है तो सरकार की ओर से फैसला कौन लेगा जैसे बिंदुओं पर सवाल उठे। आंदोलनकारी किसान संगठनों की ओर से बातचीत का एजेंडा, नई तारीख, वार्ताकार के अधिकृत नाम आदि सवालों के साथ जवाब भेजकर सरकार के पाले में ही गेंद डालने की रणनीति बनी। किसान दिवस पर सरकार को लिखित जवाब सौंपा जा सकता है। यह जवाब संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से ही भेजा जाएगा।
पंजाब से बाहरी संगठनों से मंत्रणा आज
दरअसल, मंगलवार को केवल पंजाब की जत्थेबंदियों की बैठक हुई। सरकार ने इस पत्र में जिन 40 संगठनों का जिक्र किया है, उनमें पंजाब की 30 जत्थेबंदियों के अलावा बाकी यूपी, हरियाणा, मध्यप्रदेश व दूसरे राज्यों की हैं। ऐसे में कई वजहों से वे सभी 40 किसान संगठन मंगलवार की बैठक में शामिल नहीं हो पाए, जिनका सरकार के पत्र में नाम है। राकेश टिकैत यूपी बॉर्डर पर डटे रहे, तो भाकियू (डकौंदा) के बूटा सिंह बुर्जगिल बुराड़ी में आंदोलनकारी किसानों के बीच प्रबंधों को लेकर व्यस्त रहें। इसलिए संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जवाबी पत्र के बिंदुओं पर सहमति बुधवार को ही बनेगी। हालांकि यह औपचारिकता भर है क्योंकि अब तक फैसले पर पंजाब के किसान संगठनों का प्रभाव व दबदबा रहा है।
फिर सरकार के पाले में गेंद डालने की तैयारी
सरकार को लिखित जवाब भेजने से पहले भाकियू (डकौंदा) के बूटा सिंह बुर्जगिल ने बताया कि पहले भी पांच चरणों में बातचीत हो चुकी है और सरकार के वार्ताकार नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल आदि ने पिछली कई वार्ता के दौरान कहा कि वह फैसले की स्थिति में नहीं हैं और तय करके बताएंगे। ऐसे में वार्ता आगे खिसकती रही। इसलिए वार्ताकार के अधिकृत नाम के साथ-साथ बातचीत का एजेंडा और नई तारीख सरकार से ही मांगने की बात उठी। जवाबी पत्र में फिर से सरकार से ही नए पत्र की अपेक्षा की जा सकती है। हालांकि, पंजाब की जत्थेबंदियां तीनों कानूनों की वापसी की मांग पर कायम है तो कई किसान संगठन बातचीत के पक्ष में हैं।
आंदोलन से दबाव की रणनीति भी
आंदोलन जारी रखने के साथ सरकार पर दबाव की रणनीति भी बनी। 23 और 26 दिसंबर को जहां श्रद्धांजलि दिवस है, वहीं 24 दिसंबर को वेबिनार के जरिये देश भर से 10 हजार लोगों को जोड़कर उनके सवालों का जवाब देने का फैसला किया गया। यह अभियान किसान एकता मोर्चा चलाएगा, जिसने सोशल मीडिया पर सरकार के समानांतर मोर्चा खोल रखा है। इस बीच क्रमिक भूख हड़ताल का सिलसिला जारी रखने का फैसला किया गया। आयकर छापे के बाद पंजाब के आढ़तियों ने शनिवार तक बंद की घोषणा की है।
यूपी-हरियाणा के किसान ‘उग्र’
किसान दिवस से एक दिन पहले यूपी और हरियाणा के किसानों के ‘उग्र’ तेवर दिखे। अंबाला में जहां किसानों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के काफिले को काला झंडा दिखाया, वहीं कुछ गाड़ियों पर लाठियां भी फटकारीं। इसी तरह, मुरादाबाद में आंदोलनकारी किसानों ने एसएसपी से धक्कामुक्की की। दिल्ली से सटे सभी बॉर्डर पर किसानों के तीखे तेवर से आम लोगों की परेशानी अब बढ़ गई है। पीक ऑवर में जाम से एनसीआर के नौकरीपेशा हलकान हैं।
केरल में विधानसभा के विशेष सत्र को मंजूरी नहीं
पंजाब की तर्ज पर केरल की सरकार ने भी किसान दिवस पर 23 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार के नए तीनों कृषि कानूनों को दरकिनार करने का फैसला लिया था। वहां राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सरकार को विशेष सत्र बुलाने की अनुमति नहीं दी।
कृषि मंत्री तोमर को उम्मीद, जल्द हो सकती है बातचीत
किसान दिवस की पूर्व संध्या पर फिर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई है कि जल्द आंदोलनकारी किसानों से बातचीत हो सकती है और बिना कृषि कानूनों को वापस लिए हर बिंदुओं पर चर्चा के बाद संशोधन से राह निकल सकती है। सरकार कभी भी हर बिंदु पर बातचीत को तैयार है।