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केन्द्रीय मंत्री ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, कहा- गोरखालैंड मामले के लिए गठित हो कमेटी
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:06 PM IST
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दार्जिलिंग में जारी हिंसा के बीच मोदी के एक मंत्री ने गोरखालैंड की मांग को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को खत लिखा है। केंद्रीय कृषि एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री एसएस अहलूवालिया ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में मुख्य रूप से दो मांगे रखी हैं। इन मांगों में लंबे अरसे से अटके अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर समिति गठित करने की मांग की है। तो दूसरी मांग के रूप में वर्तमान हिंसा के हालातों के लिए दोषी पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश में स्पष्टता लाने की मांग है।
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गृह मंत्रालय सूत्रों के अनुसार अहलूवालिया ने अलग गोरखालैंड के मामले पर गृहमंत्री को लिखे खत में समिति गठन करने की मांग के साथ समिति में गोरखा, आदिवासी और राजवंशी सरीखे अन्य महत्वपूर्ण बिरादरी को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। दरअसल, भाजपा ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से ही अपने घोषणा पत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का समर्थन किया हुआ है। वर्तमान घटनाक्रम के बाद से दोबारा से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग शुरू
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हो गई है।
गृहमंत्री से लगातार संपर्क में हैं अहलूवालिया
मंत्रालय सtत्रों के अनुसार दार्जिलिंग से लोकसभा सांसद एवं मोदी सरकार के मंत्री एसएस अहलूवालिया 8 जून से दूरभाष के जरिए लगातार संपर्क में हैं। 13 जून को दार्जिलिंग के मामले पर गृहसचिव के साथ उनकी अहम बैठक भी हुई है। अहलूवालिया ने सरकार से मांग किया है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने 11वीं तक की शिक्षा तीन भाषाओं बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी में करने का जो नियम बनाया है उससे सूबे के पहाडी क्षेत्रों को अलग रखा जाए। उनकी मांग है कि इस मामले में मौखिक बयानों के बजाय राज्य सरकार कानूनी रूप से कार्य करे।
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दार्जिलिंग के हालातों से शाह भी अवगत
इधर भाजपा दार्जिलिंग के हालातों पर भाजपा की भी पैनी नजर है। पार्टी की दिक्कत यह है कि सूबे में उसका आधार तेजी से बढ रहा है। गोरखा और बंगाली दोनों की अस्मिता के बीच भाजपा मुश्किल में पड गई है। एक ओर दार्जिलिंग के मुदे का खुला समर्थन कर वह अपने बढते आधार को बंगाली अस्मिता के जोखिम में नहीं डाल सकती है। तो दूसरी ओर दार्जिलिंग से लोकसभा में उसे लगातार दूसरी बार जीत मिली है। पार्टी अपने इस आधार को भी नहीं खोना चाहती है। सूत्र बताते हैं कि अहलूवालिया के पत्र की जानकारी शाह को भी है। लेकिन पार्टी और सरकार इस मामले में सोच—विचार कर ही आगे बढने के मूड में है।