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पीएम मोदी को अपशब्द कहते हैं फेसबुक के अधिकारी, प्रसाद ने लिखा जुकरबर्ग को पत्र

Wed, 02 Sep 2020 03:29 AM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Wed, 02 Sep 2020 03:29 AM IST
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Union Minister RS prasad wrote to Facebook, questions asked on the issue related to BJP campaign in Lok Sabha elections
Union Minister RS Prasad - फोटो : ANI

फेसबुक को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच नया मोड़ आया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग को एक शिकायती पत्र लिखकर उनकी कंपनी पर ‘राजनीतिक भेदभाव’ करने का आरोप लगाया है। प्रसाद ने आरोप लगाया है कि फेसबुक के कई शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य केंद्रीय मंत्रियों के लिए अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

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केंद्रीय सूचना-प्रौद्योगिकी एवं कानून मंत्री प्रसाद ने मंगलवार को लिखे तीन पेज के पत्र में फेसबुक के कुछ कर्मचारियों पर भारत के प्रति दुर्भावना से ग्रस्त होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के फेसबुक पेज जानबूझकर बंद किए जा रहे हैं या उनकी पहुंच सीमित की गई है। इसके खिलाफ ‘राइट टू अपील’ का इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा है। खासतौर पर ऐसा 2019 में आम चुनावों से पहले किया गया था। प्रसाद ने आरोप लगाया, फेसबुक इंडिया की टीम, खासतौर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, एक खास राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं और उसी आधार पर भेदभाव करते हैं। इस विचारधारा को देश की जनता दो बार लगातार स्वतंत्र व पारदर्शी आम चुनावों में खारिज कर चुकी है। अपनी पूरी लोकतांत्रिक विरासत गंवाने के बाद वे भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अहम सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के निर्णायक स्तर पर सेंधमारी कर नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। फेसबुक उनका नया हथियार है।
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संतुलित व निष्पक्ष बने फेसबुक
प्रसाद ने पत्र में कहा, फेसबुक को संतुलित व निष्पक्ष होना चाहिए। किसी संस्थान में काम करने वाले व्यक्ति की निजी पसंद या नापसंद हो सकती है, लेकिन संस्थान की सार्वजनिक नीति पर निजी पसंद का असर नहीं होना चाहिए। इनमें से कई लोग कंपनी में ऊंचे पदों पर बैठे हैं। वे ऐसी देशविरोधी पोस्ट को प्रमोट करते हैं, जिससे राष्ट्र का ताना-बाना कमजोर हो। उन्होंने हालिया दिनों की उन घटनाओं का उदाहरण दिया, जिनमें फेसबुक का उपयोग कट्टरपंथी तत्वों ने सामाजिक तानेबाने को तोड़ने और लोगों को हिंसा के लिए एकत्र होने के लिए प्रेरित किया गया था, लेकिन फेसबुक ने ऐसी पोस्ट रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। प्रसाद ने कहा, गुमनाम सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट आपकी कंपनी में वैचारिक नेतृत्व को लेकर चल रहे आतंरिक सत्ता संघर्ष का नतीजा है। कोई भी तर्क इसका ब्योरा नहीं दे सकता कि कैसे कंपनी के अंदर चुनिंदा बातों को लीक कर कैसे तथ्यों को घुमाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ऐसे तत्वों के खिलाफ अर्थपूर्ण कार्रवाई देखना अब भी बाकी है।
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प्रसाद ने कहा, फेसबुक ने फैक्ट चेकिंग का जिम्मा थर्ड पार्टी को दे रखा है। ऐसे में वह कोई भी अफवाह फैलाने वाली पोस्ट आने पर बड़ी आसानी से इसे थर्ड पार्टी का काम बताकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेती है। यहां तक कि कोविड-19 को लेकर भी पूरे देश में भ्रम फैलाने वाली कई पोस्ट फैलाई गईं, जिसे फेसबुक ने क्रास चेक नहीं किया।

संसदीय समिति की बैठक से पहले लिखा पत्र
प्रसाद ने यह पत्र संसदीय समिति की उस बैठक से एक दिन पहले लिखा है, जिसमें विपक्षी दलों की तरफ से फेसबुक इंडिया का झुकाव कथित तौर पर भाजपा की तरफ होने वाली अमेरिकी अखबारों की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है। बुधवार को प्रस्तावित बैठक में उस रिपोर्ट का मुद्दा भी उछल सकता है, जिसमें फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी हेड आंखी दास के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक होने और विपक्षी दलों के नेताओं के आतंरिक संदेशों में तांकझांक करने का आरोप लगाया गया है।


कांग्रेस ने लगाया भाजपा और फेसबुक में सांठगांठ का आरोप 
उधर कांग्रेस ने कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों की खबरों का हवाला देते हुए मंगलवार को फेसबुक एवं भाजपा के बीच फिर से सांठगांठ होने का आरोप लगाया है। साथ ही कांग्रेस ने दावा किया कि भारत के लोकतंत्र एवं सामाजिक सद्भाव पर किया गया हमला बेनकाब हुआ है।

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर लोगों को दंडित किया जाना चाहिए। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल की हालिया खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा।



उन्होंने दावा किया, ‘अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव पर फेसबुक एवं व्हाट्सऐप के खुलेआम हमले को बेनकाब कर दिया है।’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘किसी भी विदेशी कंपनी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनकी तत्काल जांच होनी चाहिए और अगर वे दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।’

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