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CWG: कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 बनेगा देश के आर्थिक पुनर्जागरण का नया अध्याय, भारत के विकास को मजबूत करने का मार्ग
Sat, 20 Dec 2025 06:54 AM IST
लव गौर
रक्षा खडसे, केंद्रीय मंत्री
रक्षा खडसे, केंद्रीय मंत्री
Published by: लव गौर
Updated Sat, 20 Dec 2025 06:54 AM IST
सार
शताब्दी संस्करण के ये खेल हमें यह अवसर देते हैं कि हम न केवल यह निर्धारित करें कि दुनिया हमें कैसे देखे, बल्कि यह भी तय करें कि हम देश के भीतर कैसे आगे बढ़ें।
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रक्षा खडसे।
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण के द्वार पर खड़ा है, जो केवल एक खेल उपलब्धि से कहीं बड़ा है। वर्ष 2030 में होने वाले ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण के कॉमनवेल्थ गेम्स ऐसे समय में आयोजित होने जा रहे हैं, जब भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हमारे शहर तीव्र गति से आधुनिक हो रहे हैं और वैश्विक मंच पर भारत का आत्मविश्वास लगातार सुदृढ़ हो रहा है। इन खेलों की मेजबानी केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक आर्थिक अवसर है। यह भारत को मात्र पांच वर्षों की संक्षिप्त अवधि में बुनियादी ढांचे के तीव्र विकास, शहरी परिवर्तन, पर्यटन विस्तार, रोजगार सृजन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नई गति देने में सक्षम बनाएगा। वैश्विक अनुभव यह दर्शाता है कि जब बड़े खेल आयोजन किसी देश के विकास चक्र के साथ सही तालमेल में होते हैं, तो वे बहुगुणकीय आर्थिक प्रभाव उत्पन्न करते हैं। भारत कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की ओर सिद्ध क्षमता और सफल आयोजन के आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।
नागरिक सुविधाओं में तेजी से होगा उन्नयन
2030 के खेलों की मेजबानी करने वाला अहमदाबाद शहर उसी शहरी गति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे ऐसे भव्य आयोजन और अधिक सशक्त बना सकते हैं। पहले से मौजूद विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना, बढ़ती मेट्रो कनेक्टिविटी, सुदृढ़ होते सड़क नेटवर्क और विकसित होता आतिथ्य व सम्मेलन पारिस्थितिकी तंत्र, ये सभी शहर को इस स्तर के आयोजन के लिए संरचनात्मक रूप से सुदृढ़ बनाते हैं। आने वाले वर्षों में शहरी गतिशीलता, आवास, सार्वजनिक स्थलों और नागरिक सुविधाओं में तेजी से उन्नयन होगा, जिससे खेलों के बाद भी नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलता रहेगा। इन खेलों के आर्थिक प्रभाव कई क्षेत्रों तक विस्तृत होंगे। खेल परिसरों, खेल गांवों, परिवहन गलियारों, उपयोगिताओं और डिजिटल प्रणालियों जैसे बुनियादी ढांचों के निर्माण से निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और सेवाक्षेत्र में निरंतर रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, अधिकारियों, प्रसारकों और दर्शकों के आगमन से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। खुदरा व्यापार, खाद्य सेवाओं, शहरी परिवहन और छोटे स्थानीय व्यवसायों में भी तैयारी चरण से लेकर खेल आयोजन तक आर्थिक गतिविधि और माँग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
खेल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगी मजबूती
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 भारत के खेल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, टैलेंट आइडेंटिफिकेशन जैसी योजनाओं तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से खेल विज्ञान, उच्चस्तरीय कोचिंग, खिलाड़ी सहयोग प्रणालियों, चिकित्सा देखभाल और अंतरराष्ट्रीय अनुभव में निवेश और अधिक सुदृढ़ होगा। इस दृष्टि से ये खेल न केवल भारतीय खेल प्रतिभा का प्रदर्शन होंगे, बल्कि देश के दीर्घकालिक हाई-परफॉर्मेंस खेल तंत्र का एक सशक्त स्तंभ भी बनेंगे।
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भारत के विकास को मजबूत करने का मार्ग
कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा, शहरी अवसर और संस्थागत क्षमता का दुर्लभ संगम है। इसके माध्यम से यह दिखाने का अवसर है कि भारत सर्वोच्च वैश्विक मानकों के अनुरूप मेगा इवेंट का आयोजन करते हुए जनता के लिए ठोस सार्वजनिक मूल्य भी सृजित कर सकता है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास और प्रशासनिक सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अगले दशक के दौरान भारत के विकास को और मजबूत करने का मार्ग है।
भारत के विकास को मजबूत करने का मार्ग
कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा, शहरी अवसर और संस्थागत क्षमता का दुर्लभ संगम है। इसके माध्यम से यह दिखाने का अवसर है कि भारत सर्वोच्च वैश्विक मानकों के अनुरूप मेगा इवेंट का आयोजन करते हुए जनता के लिए ठोस सार्वजनिक मूल्य भी सृजित कर सकता है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास और प्रशासनिक सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अगले दशक के दौरान भारत के विकास को और मजबूत करने का मार्ग है।
ये भी पढ़ें: वीबी-जी राम जी: भ्रष्टाचार होगा खत्म, गांव बनेंगे विकास का इंजन
केवल खेल और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी विरासत
शताब्दी संस्करण के इन खेलों की दीर्घकालिक विरासत केवल खेल और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी। बार्सिलोना 1992, लंदन 2012 और ग्लासगो 2014 जैसे वैश्विक उदाहरण यह दर्शाते हैं कि बडे़ आयोजन किस प्रकार कुछ वर्षों में दशकों के शहरी परिवर्तन को साकार कर देते हैं। अहमदाबाद के लिए इसका अर्थ होगा बेहतर सार्वजनिक परिवहन, सशक्त गतिशीलता नेटवर्क, उन्नत सार्वजनिक स्थल, बढ़ी हुई आवासीय क्षमता और स्मार्ट शहरी प्रणालियां। खेल गांव आगे चलकर आवासीय समुदायों में परिवर्तित होंगे, प्रशिक्षण केंद्र सामुदायिक खेल केंद्रों का रूप लेंगे और पर्यटन अवसंरचना 2030 के बाद भी शहर की सेवा करती रहेगी।
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नागरिक सुविधाओं में तेजी से होगा उन्नयन
2030 के खेलों की मेजबानी करने वाला अहमदाबाद शहर उसी शहरी गति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे ऐसे भव्य आयोजन और अधिक सशक्त बना सकते हैं। पहले से मौजूद विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना, बढ़ती मेट्रो कनेक्टिविटी, सुदृढ़ होते सड़क नेटवर्क और विकसित होता आतिथ्य व सम्मेलन पारिस्थितिकी तंत्र, ये सभी शहर को इस स्तर के आयोजन के लिए संरचनात्मक रूप से सुदृढ़ बनाते हैं। आने वाले वर्षों में शहरी गतिशीलता, आवास, सार्वजनिक स्थलों और नागरिक सुविधाओं में तेजी से उन्नयन होगा, जिससे खेलों के बाद भी नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलता रहेगा। इन खेलों के आर्थिक प्रभाव कई क्षेत्रों तक विस्तृत होंगे। खेल परिसरों, खेल गांवों, परिवहन गलियारों, उपयोगिताओं और डिजिटल प्रणालियों जैसे बुनियादी ढांचों के निर्माण से निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और सेवाक्षेत्र में निरंतर रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, अधिकारियों, प्रसारकों और दर्शकों के आगमन से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। खुदरा व्यापार, खाद्य सेवाओं, शहरी परिवहन और छोटे स्थानीय व्यवसायों में भी तैयारी चरण से लेकर खेल आयोजन तक आर्थिक गतिविधि और माँग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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खेल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मिलेगी मजबूती
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 भारत के खेल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, टैलेंट आइडेंटिफिकेशन जैसी योजनाओं तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से खेल विज्ञान, उच्चस्तरीय कोचिंग, खिलाड़ी सहयोग प्रणालियों, चिकित्सा देखभाल और अंतरराष्ट्रीय अनुभव में निवेश और अधिक सुदृढ़ होगा। इस दृष्टि से ये खेल न केवल भारतीय खेल प्रतिभा का प्रदर्शन होंगे, बल्कि देश के दीर्घकालिक हाई-परफॉर्मेंस खेल तंत्र का एक सशक्त स्तंभ भी बनेंगे।
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भारत के विकास को मजबूत करने का मार्ग
कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा, शहरी अवसर और संस्थागत क्षमता का दुर्लभ संगम है। इसके माध्यम से यह दिखाने का अवसर है कि भारत सर्वोच्च वैश्विक मानकों के अनुरूप मेगा इवेंट का आयोजन करते हुए जनता के लिए ठोस सार्वजनिक मूल्य भी सृजित कर सकता है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास और प्रशासनिक सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अगले दशक के दौरान भारत के विकास को और मजबूत करने का मार्ग है।
भारत के विकास को मजबूत करने का मार्ग
कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा, शहरी अवसर और संस्थागत क्षमता का दुर्लभ संगम है। इसके माध्यम से यह दिखाने का अवसर है कि भारत सर्वोच्च वैश्विक मानकों के अनुरूप मेगा इवेंट का आयोजन करते हुए जनता के लिए ठोस सार्वजनिक मूल्य भी सृजित कर सकता है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास और प्रशासनिक सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अगले दशक के दौरान भारत के विकास को और मजबूत करने का मार्ग है।
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केवल खेल और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी विरासत
शताब्दी संस्करण के इन खेलों की दीर्घकालिक विरासत केवल खेल और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी। बार्सिलोना 1992, लंदन 2012 और ग्लासगो 2014 जैसे वैश्विक उदाहरण यह दर्शाते हैं कि बडे़ आयोजन किस प्रकार कुछ वर्षों में दशकों के शहरी परिवर्तन को साकार कर देते हैं। अहमदाबाद के लिए इसका अर्थ होगा बेहतर सार्वजनिक परिवहन, सशक्त गतिशीलता नेटवर्क, उन्नत सार्वजनिक स्थल, बढ़ी हुई आवासीय क्षमता और स्मार्ट शहरी प्रणालियां। खेल गांव आगे चलकर आवासीय समुदायों में परिवर्तित होंगे, प्रशिक्षण केंद्र सामुदायिक खेल केंद्रों का रूप लेंगे और पर्यटन अवसंरचना 2030 के बाद भी शहर की सेवा करती रहेगी।
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