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अध्ययन: दो बेटियों वाले माता-पिता सबसे अधिक रहते हैं खुश, भावनात्मक समर्थन में बेटियां आगे
Fri, 25 Sep 2026 05:27 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 25 Sep 2026 05:27 AM IST
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अध्ययन में खुलासा।
- फोटो : अमर उजाला
चीन में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि बच्चों वाले माता-पिता उन लोगों की तुलना में अधिक खुश रहते हैं जिनके बच्चे नहीं हैं। जिन माता-पिता की केवल दो बेटियां हैं, वे केवल दो बेटों वाले माता-पिता की तुलना में अधिक खुश पाए गए। यह शोध पत्र एक्टा साइकोलॉजिका में प्रकाशित हुआ है। खुशी जीवन की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह व्यक्तिगत परिस्थितियों और व्यापक सामाजिक स्थितियों दोनों पर निर्भर कर सकती है।
परिवार की संरचना इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है कि कोई व्यक्ति कितना खुश है, विशेष रूप से बच्चों की संख्या, उनकी उम्र और उनके द्वारा मिलने वाले सहयोग के माध्यम से। माता-पिता बनना भावनात्मक अर्थ और साहचर्य देकर व्यक्ति को अधिक खुश बना सकता है, लेकिन यह वित्तीय मांगों, दैनिक जिम्मेदारियों और कार्य-परिवार के बीच तनाव को भी बढ़ा सकता है। ये लागतें और लाभ जीवन के दौरान बदल सकते है, क्योंकि बच्चे बड़े होते हैं तो माता-पिता की जरूरतें बदलती हैं। वयस्क बच्चे वित्तीय सहायता, व्यावहारिक मदद, भावनात्मक समर्थन और पारिवारिक संबंधों को बनाए रखकर माता-पिता के जीवन में योगदान दे सकते हैं।
भावनात्मक समर्थन में बेटियां आगे
बेटियां पारिवारिक संपर्क बनाए रखने और भावनात्मक समर्थन देने में अधिक शामिल होती हैं, जबकि कुछ संस्कृतियों में बेटों से अधिक वित्तीय या व्यावहारिक सहायता प्रदान करने की उम्मीद की जा सकती है। इसलिए बच्चों और माता-पिता की खुशी के बीच का संबंध सांस्कृतिक मानदंडों, आर्थिक संसाधनों, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों और परिवार के शहरी या ग्रामीण माहौल में रहने पर दृढ़ता से निर्भर कर सकता है। अध्ययन के लेखक झोंग फेई और वेनचिन जिन यह पता लगाना चाहते थे कि किसी व्यक्ति की खुशी इस बात से कैसे जुड़ी है कि उसके कितने बच्चे हैं और उनका लिंग क्या है।
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बेटा-बेटी या दो बेटों वाले परिवारों में खास फर्क नहीं
अध्ययन में यह भी पाया गया कि बेटों और बेटियों के मिश्रण वाले माता-पिता ने केवल बेटों वाले माता-पिता की तुलना में खुशी में कोई महत्वपूर्ण अंतर दर्ज नहीं किया। इसके अतिरिक्त, बच्चों की संख्या और खुशी के बीच का सकारात्मक संबंध पुरुषों, शहरी निवासियों और पेंशन पाने वालों के बीच अधिक स्पष्ट था।
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परिवार की संरचना इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है कि कोई व्यक्ति कितना खुश है, विशेष रूप से बच्चों की संख्या, उनकी उम्र और उनके द्वारा मिलने वाले सहयोग के माध्यम से। माता-पिता बनना भावनात्मक अर्थ और साहचर्य देकर व्यक्ति को अधिक खुश बना सकता है, लेकिन यह वित्तीय मांगों, दैनिक जिम्मेदारियों और कार्य-परिवार के बीच तनाव को भी बढ़ा सकता है। ये लागतें और लाभ जीवन के दौरान बदल सकते है, क्योंकि बच्चे बड़े होते हैं तो माता-पिता की जरूरतें बदलती हैं। वयस्क बच्चे वित्तीय सहायता, व्यावहारिक मदद, भावनात्मक समर्थन और पारिवारिक संबंधों को बनाए रखकर माता-पिता के जीवन में योगदान दे सकते हैं।
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भावनात्मक समर्थन में बेटियां आगे
बेटियां पारिवारिक संपर्क बनाए रखने और भावनात्मक समर्थन देने में अधिक शामिल होती हैं, जबकि कुछ संस्कृतियों में बेटों से अधिक वित्तीय या व्यावहारिक सहायता प्रदान करने की उम्मीद की जा सकती है। इसलिए बच्चों और माता-पिता की खुशी के बीच का संबंध सांस्कृतिक मानदंडों, आर्थिक संसाधनों, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों और परिवार के शहरी या ग्रामीण माहौल में रहने पर दृढ़ता से निर्भर कर सकता है। अध्ययन के लेखक झोंग फेई और वेनचिन जिन यह पता लगाना चाहते थे कि किसी व्यक्ति की खुशी इस बात से कैसे जुड़ी है कि उसके कितने बच्चे हैं और उनका लिंग क्या है।
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बेटा-बेटी या दो बेटों वाले परिवारों में खास फर्क नहीं
अध्ययन में यह भी पाया गया कि बेटों और बेटियों के मिश्रण वाले माता-पिता ने केवल बेटों वाले माता-पिता की तुलना में खुशी में कोई महत्वपूर्ण अंतर दर्ज नहीं किया। इसके अतिरिक्त, बच्चों की संख्या और खुशी के बीच का सकारात्मक संबंध पुरुषों, शहरी निवासियों और पेंशन पाने वालों के बीच अधिक स्पष्ट था।