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Conversion: केंद्रीय मंत्री बारला ने कहा- ईसाई समुदाय लोगों के धर्मांतरण में नहीं लगा, प्रगति में बड़ा योगदान
Sat, 21 Jan 2023 12:53 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 21 Jan 2023 12:53 AM IST
सार
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉन बारला खुद एक ईसाई हैं। उन्होंने कहा कि हमें शांति के सिवा कुछ नहीं चाहिए। अब एकजुट होने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अगर हम दुनिया को हमारे योगदान के बारे में नहीं बताएंगे, तो इसके बदले हमारी पिटाई होगी।
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केंद्रीय राज्य मंत्री जॉन बारला।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉन बारला ने शुक्रवार को इन आरोपों को खारिज कर दिया कि ईसाई लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में लगे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की प्रगति में इस समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री ने यहां एक शांति रैली को संबोधित करते हुए कहा कि इसके बावजूद, ईसाइयों को सम्मान नहीं मिलता क्योंकि वे अपना ढिंढोरा नहीं पीटते।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने कहा कि ईसाई स्कूल देश में हर जगह मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी से लेकर फिल्म अभिनेता शाहरुख खान तक कई हस्तियों ने ऐसे संस्थानों में स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा ईसाइयों के कई स्वास्थ्य केंद्र और वृद्धाश्रम हैं। फिर भी इतने योगदान के बाद भी कोई सम्मान नहीं है। ऐसे आरोप क्यों लगाये जाते है कि हम लोगों का धर्मांतरण कराते हैं? नहीं, हम लोगों का धर्मांतरण नहीं कराते हैं। विभिन्न राज्यों में भाजपा नेता चर्च के प्रमुखों पर लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का आरोप लगाते हैं।
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बारला खुद एक ईसाई हैं। उन्होंने कहा कि हमें शांति के सिवा कुछ नहीं चाहिए। अब एकजुट होने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि समुदाय के सदस्यों को छत्तीसगढ़ की तरह अन्याय का सामना नहीं करना चाहिए। इस साल दो जनवरी को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर शहर में एक कथित धर्म परिवर्तन के संबंध में आदिवासियों के विरोध के दौरान एक चर्च में तोड़फोड़ की गई थी और एक आईपीएस अधिकारी सहित छह पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और उन्हें घायल कर दिया गया।
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पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार से सांसद बारला ने कहा कि अगर हम दुनिया को हमारे योगदान के बारे में नहीं बताएंगे, तो इसके बदले हमारी पिटाई होगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों के अलावा अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, वृद्धाश्रम और अन्य सुविधाएं ईसाइयों द्वारा अपने फंड से चलायी जाती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सम्मान नहीं मिलता है।
बरला ने कहा कि जब से मैं अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बना हूं, एक ईसाई के रूप में मैंने सोचा कि देश के लिए हमारा क्या योगदान है? हमने क्या दिया है और बदले में हमें क्या मिला है? आजादी से पहले और बाद में। क्या हमें हमारे योगदान के लिए सम्मान मिला? उन्होंने कहा कि देश के दूर-दराज इलाकों में भी ईसाई स्कूल हैं, जहां कोई सरकारी संस्थान नहीं है।