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केंद्रीय मंत्री ने बताया: कोरोना के खिलाफ टीके से मिलने वाली सुरक्षा पर हो रहे हैं अध्ययन, बूस्टर खुराक को लेकर कही ये बात

Tue, 07 Dec 2021 09:40 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 07 Dec 2021 09:40 PM IST
सार

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा में कोरोना टीके की बूस्टर खुराक देने पर सरकार की योजना और टीके से मिलने वाली सुरक्षा में गिरावट के आंकलन को लेकर अध्ययन के बारे में जानकारी साझा की।

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Union Minister Bharati Pravin Pawar told Rajya Sabha scientific evidence on longevity of Covid antibodies still evolving booster dose
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

केंद्र सरकार ने कहा है कि शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी कितरे समय तक रहती है यह समझने के लिए भारत और विदेशों में कई स्वतंत्र जांचकर्ताओं और टीका निर्माताओं ने अध्ययन किए हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले में वैज्ञानिक सबूत अभी भी विकसित हो रहे रहे हैं और नई जानकारियां भी सामने आ रही हैं। यह बात संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने एक सवाल के जवाब में कही। 

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संसद के उच्च सदन में एक सवाल के लिखित जवाब में पवार ने कहा कि टीकाकरण से एंटीबॉडी के साथ-साथ अन्य प्रतिरक्षा तंत्र जैसे कोशिकीय या टी कोशिका आधारित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और मेमोरी बी कोशिकाएं बनती हैं। ये शरीर को संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती हैं। उन्होंने यह बात इस सवाल के जवाब में कही कि क्या सरकार यह जानने के लिए कोई अध्ययन कर रही है कि क्या बुजुर्ग आबादी में टीकाकरण से मिलने वाली प्रतिरक्षा कम होने का कोई मामला सामने आया है।
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कोविड-19 टीके की बूस्टर खुराक देने के सवाल पर कही ये बात
वहीं, इस सवाल पर कि क्या सरकार इम्युनिटी बढ़ाने के लिए टीके की बूस्टर खुराक देने पर विचार कर रही है, पवार ने कहा कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) और टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (नेगवैक) इस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बूस्टर खुराक की जरूरत और कोविड टीकों की निर्धारिक खुराकों से संबंधित वैज्ञानिक सबूतों पर विचार किया जा रहा है और इसे लेकर उसी आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा।
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तीसरी लहर से बचने के लिए जांच, निगरानी और इलाज पर ध्यान
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जीनोम सीक्वेंसिंग और सार्स-कोव-2 के विभिन्न नए वैरिएंट के पर नजर रखने के लिए भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक निगरानी कंसोर्टियम (इंसाकॉग) की भी स्थापना की है। पवार ने बताया कि केंद्र सरकार कोरोना वायरस महामारी पर नियंत्रण और तीसरी संभावित लहर से बचने के लिए जांच, निगरानी और इलाज (टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट) व्यवस्ता के साथ-साथ कोविड अनुरूप व्यवहार और टीकाकरण की रणनीति का सख्ती के साथ पालन कर रही है।

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