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एक्शन: धार्मिक हिंसा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त, दो जांच रिपोर्ट आपस में मेल खा गई तो दंगाइयों पर लग सकता है 'यूएपीए' 

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 18 Apr 2022 07:34 PM IST
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सार
रामनवमी पर मध्यप्रदेश, राजस्थान  और गुजरात में इस तरह की घटनाएं हुई हैं। एक साथ इतने राज्यों में हुई धार्मिक हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय, आतंकी साजिश के एंगल से जांच करने पर जोर दे रहा है। दिल्ली के दंगों में कुछ आरोपी ऐसे बताए गए हैं, जिनका संबंध पहले भी ऐसे केसों में रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जहांगीरपुरी दंगे में पकड़े गए एक एक आरोपी का पुराना रिकॉर्ड खंगाल रही है। 
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Union Home Ministry strict on religious violence UAPA may be imposed on rioters if two investigation reports match each other News In Hindi
दिल्ली के जहांगीरपुरी में बवाल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

हनुमान जन्मोत्सव और राम नवमी के मौके पर देश के आठ राज्यों में निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। विभिन्न राज्यों में हुई धार्मिक हिंसा की जांच में कई एंगल से कड़ियों को जोड़ कर देखा जा रहा है। अगर लोकल पुलिस, जांच टीम और खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट एक ही दिशा में आगे बढ़ती हुई नजर आई तो दंगाइयों पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (यूएपीए) लग सकता है। इन सभी जगहों पर हुई हिंसा के 'कॉमन प्वाइंट्स' एकत्रित किए जा रहे हैं। इस हिंसा में आतंकी गतिविधियां या उसकी साजिश जैसा कुछ सामने आता है तो यूएपीए लगने की संभावना बढ़ती चली जाएगी। 



इस कानून के अंतर्गत दोष साबित होने पर संबंधित व्यक्ति को पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं, आरोपी व्यक्ति को जमानत के लिए वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।  


केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, धार्मिक हिंसा के इन सभी मामलों की जांच गहराई से हो रही है। हनुमान जन्मोत्सव पर दिल्ली के अलावा उत्तराखंड, आंध्रपदेश व कर्नाटक में भी सांप्रदायिक हिंसा हुई है। दिल्ली में अभी तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि गिरफ्तारी का यह सिलसिला अभी जारी है। जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस को घटना के वीडियो या सीसीटीवी फुटेज मिल रही है, वैसे ही आरोपियों की गिरफ्तारी की संख्या भी बढ़ती जा रही है। साम्प्रदायिक हिंसा वाले दूसरे राज्यों की बात करें तो लगभग सवा सौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। 

रामनवमी पर मध्यप्रदेश, राजस्थान  और गुजरात में इस तरह की घटनाएं हुई हैं। एक साथ इतने राज्यों में हुई धार्मिक हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय, आतंकी साजिश के एंगल से जांच करने पर जोर दे रहा है। दिल्ली के दंगों में कुछ आरोपी ऐसे बताए गए हैं, जिनका संबंध पहले भी ऐसे केसों में रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जहांगीरपुरी दंगे में पकड़े गए एक एक आरोपी का पुराना रिकॉर्ड खंगाल रही है। 

यह भी देखा जा रहा है कि जिन इलाकों में दंगा हुआ है, वहां पर अवैध रूप से बांग्लादेशी या किसी दूसरे समुदाय के लोग किस आधार पर रह रहे हैं। उनके दस्तावेज चेक होने के बाद उनकी सही स्थिति का पता लग सकेगा। इसके लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। 

दिल्ली पुलिस के पूर्व डीसीपी एलएन राव, जो स्पेशल सेल जैसी महत्वपूर्ण इकाई में 14 साल तक तैनात रहे हैं, का कहना है कि दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में जो हिंसा हुई है, उसकी गहराई से जांच जरुरी है। मौजूदा परिस्थितियों में राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत करना होगा। अगर ये एजेंसियां सक्रिय हैं तो दंगे को होने से रोका जा सकता है। जैसे दिल्ली के शाहदरा, सीलमपुर, जहांगीरपुरी व औखला जैसे इलाकों में प्री-वेंटिव एक्शन लिया जाए। दंगों में निजी एवं सार्वजनिक प्रॉपर्टी का नुकसान होता है। राम नवमी पर हर साल शोभा यात्रा निकलती हैं। 

इस बार ऐसा क्या था कि शोभायात्रा के दौरान हिंसा हो गई। ऐसे मामलों में अगर ठोस बयान और दस्तावेज इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि इन घटनाओं का संबंध किसी आतंकी संगठन से है, उसके द्वारा साजिश रची गई थी तो पकड़े गए आरोपियों पर यूएपीए लग सकता है। अगर यूएपीए लगाने का पुख्ता आधार है तो मौजूदा केस में ही यूएपीए की धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। दिल्ली में गिरफ्तार आरोपियों में से आठ लोगों का रिकॉर्ड आपराधिक रहा है। 

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