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Hindi News ›   India News ›   Union Budget 2022: Land acquisition for Gati Shakti Cargo Terminal a big challenge, how to make possible 400 Vande Bharat train runs on track

Budget 2022: गति शक्ति कार्गो टर्मिनल के लिए जमीन अधिग्रहण बड़ी चुनौती, अभी दूर है 400 वंदे भारत ट्रेनों का सपना

Tue, 01 Feb 2022 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 01 Feb 2022 04:23 PM IST
सार

रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन ने अमर उजाला से कहा कि रेल बजट को लेकर जो दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं, वह बहुत ही सकारात्मक और इनोवेटिव है। सरकार ने बजट में जो 100 गति शक्ति टर्मिनल बनाने की घोषणा की है। इससे उद्योगों को बहुत फायदा होगा, क्योंकि इससे उनकी लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बहुत कम हो जाएगी...

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Union Budget 2022: Land acquisition for Gati Shakti Cargo Terminal a big challenge, how to make possible 400 Vande Bharat train runs on track
वंदे भारत एक्सप्रेस - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया। इसमें वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से जुड़े कई बड़े एलान किए। साथ ही, रेलवे व्यवस्था को बेहतर करने के लिए हाई-स्पीड ट्रेनों के प्रसार की बड़ी घोषणा की। इनमें एक बड़ा एलान सबसे तेज गति से चलने वालीं वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का भी रहा।

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वित्त मंत्री ने कहा कि अगले तीन साल में 400 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाई जाएंगी। वहीं, तीन सालों में 100 पीएम गति शक्ति कार्गो टर्मिनल तैयार किए जाएंगे। रेलवे छोटे किसानों, छोटे व मध्यम उद्यमों के लिए नए प्रोडक्ट और कुशल लॉजिस्टिक सर्विस तैयार करेगा। स्थानीय उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला में मदद के लिए ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ होगा। हालांकि भारतीय रेलवे के सामने इन दोनों ही बड़ी घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

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100 गति शक्ति टर्मिनल बनाने का एलान

रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन ने अमर उजाला से कहा कि रेल बजट को लेकर जो दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं, वह बहुत ही सकारात्मक और इनोवेटिव है। सरकार ने बजट में जो 100 गति शक्ति टर्मिनल बनाने की घोषणा की है। इससे उद्योगों को बहुत फायदा होगा, क्योंकि इससे उनकी लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बहुत कम हो जाएगी। सरकार को इन टर्मिनल को बनाने के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होगी, क्योंकि आमतौर पर यह देखने में आता है कि रेलवे की प्रोजेक्ट की घोषणा तो जोरशोर से हो जाती है लेकिन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने में रेलवे की हालत खराब हो जाती है। आज तक कई अहम प्रोजेक्ट केवल जमीन अधिग्रहण के मामले के चलते ही देरी से पूरे हो रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि जहां तक 400 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाने की बात है तो यह रेलवे के लिहाज से बहुत ही अहम घोषणा है। लेकिन यह सोचने वाली बात है कि 400 नई वंदे भारत ट्रेनों, जिनकी अनुमानित 60 हजार करोड़ की लागत आएगी वो कब तक पूरा हो सकेगा। क्योंकि रेलवे को जो कार्य पद्धति है और टेंडर निकालने की नीति है वह बहुत ही धीमी है। 15 अगस्त को पीएम ने 75 हफ्ते में 75 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाने का एलान किया था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के चलते आज तक एक भी ट्रेन बनकर तैयार नहीं हुई है। ऐसे में यह 400 ट्रेनें कब तैयार होंगी और कब आएंगी ये एक बड़ा सवाल है।

दूसरा, रेलवे के सामने ये भी चुनौती होगी कि बाजार में आज ट्रेन बनाने वाली कंपनियां और प्राइवेट ट्रेन चलाने वाले लोग बहुत कम हैं। अगर ऐसे में वे कीमतें बढ़ा देंगे तो रेलवे प्राइवेट कंपनियों से ट्रेन नहीं ले सकेगा। अगर इसमें प्राइवेट कंपनियां शामिल भी की गईं तो फिर बिजनेस मॉडल ही खत्म हो जाएगा। तीसरी चुनौती यह होगी की रेलवे किस रुट पर इन ट्रेनों को चलाएगा, जिससे उसे राजस्व मिल सके।  

रेल बजट को लेकर यह हुई है अहम घोषणा

वित्त मंत्री की ओर से रेल मंत्रालय को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट में 140367.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि रेलवे आने वाले समय में नए उत्पाद की तैयारी और उनके प्रसार में काम करेगा। रेलवे के नेटवर्क के पोस्टल नेटवर्क के साथ एकीकरण के जरिए पार्सल की आवाजाही को सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा एक स्टेशन-एक उत्पाद की अवधारणा के जरिए स्थानीय व्यापार और सप्लाई चेन की बेहतरी की कोशिश की जाएगी।



वित्तमंत्री ने कहा कि 2022-23 में दो हजार किमी के रेलवे नेटवर्क को 'कवच' के अंतर्गत लाया जाएगा। यह स्वदेशी विश्वस्तरीय तकनीक है, जिसके जरिए सुरक्षा और क्षमता दोनों को बढ़ाने का काम होगा। इसके अलावा मेट्रो सिस्टम को बेहतर करने के लिए नए तरीके लागू किए जाएंगे। रेलवे स्टेशन और शहरी परिवहन के बीच मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता से बढ़ावा दिया जाएगा। भारत की स्थितियों और जरूरतों के तहत नए मेट्रो सिस्टम भी तैयार किए जाएंगे।

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