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समान नागरिक संहिता : ‘खंडों में’ सुधार का सुझाव दे सकता है विधि आयोग
एजेंसी / नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Dec 2017 02:23 AM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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विधि आयोग ने कहा है कि यदि समान नागरिक संहिता लागू करने में परेशानी आई तो परिवार कानून में धर्म के अनुसार ‘टुकड़ों में’ सुधार का सुझाव दे सकता है। विधि आयोग के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी एस चौहान ने मंगलवार को कहा कि समान नागरिक संहिता किसी भी सूरत में संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करेगी।
आयोग यूनिफॉर्म सिविल कोड के मसले में प्राप्त करीब 45000 सुझावों को छांटने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। चौहान ने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू करने में कठिनाई हुई, तो हम धर्म के आधार पर विभिन्न परिवार कानून में टुकड़ों में संशोधन की सिफारिश करेंगे।
पढ़ें- भारत में जल्द लागू हो यूनिफॉर्म सिविल कोड: तस्लीमा नसरीन
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उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि विधि आयोग ने इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि पहले इस पर विचार करेंगे तभी कोई फैसला लिया जाएगा। आयोग जनवरी से इस मामले का परीक्षण शुरू करेगा। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि सरकार को जो भी सुझाव दिया जाएगा वह संविधान के दायरे में होगा और किसी भी धर्म के किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।
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आयोग यूनिफॉर्म सिविल कोड के मसले में प्राप्त करीब 45000 सुझावों को छांटने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। चौहान ने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू करने में कठिनाई हुई, तो हम धर्म के आधार पर विभिन्न परिवार कानून में टुकड़ों में संशोधन की सिफारिश करेंगे।
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उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि विधि आयोग ने इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि पहले इस पर विचार करेंगे तभी कोई फैसला लिया जाएगा। आयोग जनवरी से इस मामले का परीक्षण शुरू करेगा। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि सरकार को जो भी सुझाव दिया जाएगा वह संविधान के दायरे में होगा और किसी भी धर्म के किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा।