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UNESCO: 40% आबादी मातृभाषा में पढ़ाई से वंचित, औपनिवेशिक शासन में रहे भारत जैसे देशों को हो रही अधिक मुश्किल
Mon, 03 Mar 2025 04:16 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 03 Mar 2025 04:16 AM IST
सार
यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (जीईएम) रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू कर रहा है। हालांकि, स्कूलों में तीन-भाषा नीति को लेकर कुछ राज्यों में विरोध हो रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
दुनिया की 40 फीसदी आबादी अपनी मातृभाषा में पढ़ाई से वंचित है। यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (जीईएम) एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इसे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर जारी किया गया। रिपोर्ट मातृभाषाओं के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने के कोशिशों को मान्यता देती है।
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यह ऐसे समय आई है जब भारत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू कर रहा है। हालांकि, स्कूलों में तीन-भाषा नीति को लेकर कुछ राज्यों में विरोध हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न देशों में मातृभाषा में शिक्षा के लिए उपयुक्त नीतियां नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 3.1 करोड़ विस्थापित युवा भाषाई समस्या से पढ़ाई में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। कुछ गरीब और मध्यम-आय वाले देशों में 90 फीसदी विद्यार्थी अपनी भाषा में पढ़ाई नहीं कर पाते। इनकी संख्या 25 करोड़ से ज्यादा है। जीईएम अधिकारियों ने इसे देखते हुए देशों को बहुभाषी शिक्षा नीतियां लागू करने की सलाह दी है।
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बीते दशक में गिरा शिक्षा का स्तर
जीईएम अधिकारी ने यह भी कहा कि बीते दशक में शिक्षा का स्तर गिरा है। इसकी वजह युवाओं पर तकनीकी का प्रभाव और कोरोना महामारी रही है। इससे पढ़ने और गणित दोनों में सीखने के स्तर में तेजी से गिरावट आई है।
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- रिपोर्ट बताती है कि ऐतिहासिक रूप से, औपनिवेशिक शासन ने कई देशों में स्थानीय भाषाओं के बजाय विदेशी भाषाओं को थोप दिया। दूसरी ओर, समृद्ध देशों में प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है। इससे कक्षाओं में भाषाई विविधता बढ़ रही है, पर साथ ही पढ़ाने व परीक्षा लेने में कठिनाइयां भी आ रही हैं।