Report: सतत विकास के लक्ष्यों पर भारत ने की अच्छी प्रगति, देश में भ्रष्टाचार हुआ कम, हर घर तक पहुंची बिजली
एसडीजी का आशय संधारणीय विकास लक्ष्य से है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भ्रष्टाचार की दर 2016 में 69 के मुकाबले 2020 में घटकर 39 रह गई है। वहीं, अब देश की शत प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एसडीजी के 17 लक्ष्यों से जुड़े 85 मापदंडों पर भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है, जबकि 27 में प्रगति कमजोर पड़ी है। 36 मामलों में प्रगति खराब हुई है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) की ओर से जारी एशिया एंड द पैसिफिक एसडीजी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2024 में यह जानकारी दी गई है।
एसडीजी का आशय संधारणीय विकास लक्ष्य से है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भ्रष्टाचार की दर 2016 में 69 के मुकाबले 2020 में घटकर 39 रह गई है। वहीं, अब देश की शत प्रतिशत आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है। साथ ही 2015 में देश की अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 59.4 वाट प्रति व्यक्ति थी जो 2021 में बढ़कर 104.5 पर पहुंच गई।
गरीबी उन्मूलन की दिशा में बेहतर प्रदर्शन
भारत ने गरीबी उन्मूलन की दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है। 2015 में देश की 18.7 फीसदी आबादी 1.9 डॉलर प्रतिदिन से कम पर गुजारा कर रही थी, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 10 फीसदी रह गया। 2016 में 22% आबादी को किसी न किसी रूप में सामाजिक सुरक्षा के रूप में दी जा रही मदद का फायदा मिला था, जबकि 2020 में यह बढ़कर 24.4 फीसदी पर हो गया।
इन क्षेत्रों में भी सुधार
- 2015 में जीडीपी की जो विकास दर आठ फीसदी से 2021 में 8.7% हो गई
- एचआईवी के साथ-साथ गंभीर बीमारियों की दर में गिरावट, टीकाकरण में भी वृद्धि
- संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी में वृद्धि
- स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर
- प्रदूषण के महीन कणों में गिरावट
इनमें प्रगति कमजोर
कुपोषण की स्थिति पहले से बदतर हुई, महिलाओं में खून की कमी की समस्या लगभग पहले जितनी
आत्महत्या करने वालों का आंकड़ा बढ़ा, घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के मामले में भी प्रगति कमजोर पड़ी
पेयजल सुविधाओं में इजाफा
बुनियादी पेयजल सेवाओं का उपयोग करने वाली आबादी में भी इजाफा हुआ है। 2015 में 89.2 फीसदी आबादी तक यह सुविधा उपलब्ध थी, जबकि 2022 में यह 93.3 फीसदी हो गई।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति
भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। 2015 में देश के 37.9 फीसदी पांच या उससे कम वर्ष के बच्चे अपनी उम्र के लिहाज से ठिगने थे, जबकि 2020 में यह घटकर 35.5 फीसदी रह गई।