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AFO: अधिक भूजल दोहन से पंजाब-हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालात बेहद खराब, यूएन ने जारी की चेतावनी

Wed, 30 Aug 2023 05:52 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 30 Aug 2023 05:52 AM IST
सार

केंद्रीय जल आयोग की ओर से 2019 में किया गया एक पुनर्मूल्यांकन अध्ययन (30 वर्षों 1985-2015) के अनुसार, भारत की नदी घाटियों का औसत वार्षिक जल संसाधन 1999 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है, जो पिछले अनुमान से थोड़ा अधिक है।

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UN issues warning bad Situation in Punjab Haryana and Western Uttar Pradesh due to groundwater exploitation
Ground Water

विस्तार

दुनियाभर में जल संसाधनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने उपलब्ध जल आपूर्ति से अधिक की मांग और बढ़ते जल प्रदूषण को एक प्रमुख वैश्विक चुनौती करार दिया है। वहीं, भारत के संदर्भ में जो आंकड़े सामने आए हैं वे चिंताजनक हैं। आंकड़े बताते हैं कि समय के साथ पानी की मांग बढ़ती जाएगी और जिस तरह से पानी का दोहन जारी है उससे आधे से ज्यादा आबादी प्रभावित होगी।

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आंकड़ों के मुताबिक, निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में पानी की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है। खासकर एशिया में जहां पानी की मात्रा सबसे कम है, लेकिन भूजल दोहन यानी पानी निकालने की दर सबसे अधिक है। अनुमान बताते हैं कि अगर वैश्विक जल उपलब्धता में गिरावट जारी रही तो 180 में से 87 देशों में 2050 तक प्रति व्यक्ति वार्षिक नवीकरणीय जल संसाधन (एआरडब्ल्यूआर) 1,700 क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष से कम होगा।

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समय के साथ बढ़ेगा संकट
केंद्रीय जल आयोग की ओर से 2019 में किया गया एक पुनर्मूल्यांकन अध्ययन (30 वर्षों 1985-2015) के अनुसार, भारत की नदी घाटियों का औसत वार्षिक जल संसाधन 1999 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है, जो पिछले अनुमान से थोड़ा अधिक है। पानी की उपलब्धता को देखते हुए 1,950 में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक उपलब्धता तीन से चार हजार क्यूबिक मीटर, 2001 में 1,816 क्यूबिक मीटर, 2011 में 1545 क्यूबिक मीटर आंकी गई थी। यह 2021 में घटकर 1,486 क्यूबिक मीटर हो गई और 2031 तक इसके 1,367 क्यूबिक मीटर होने का अनुमान है।

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इन क्षेत्रों के हालात खराब
भारत में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी-उत्तर प्रदेश, दिल्ली और देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से में भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। यहां भूजल की अंधाधुंध निकासी के कारण जल स्तर 800 से 1,000 फुट तक नीचे चला गया है। साथ ही राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी यही स्थिति है।

क्या कहते हैं आंकड़े
भारत में कुल जलभंडारण में 78 फीसदी का उपयोग सिंचाई के लिए होता है। इसके बाद घरेलू क्षेत्र 10 फीसदी और औद्योगिक क्षेत्र 12 फीसदी का इस्तेमाल होता है। तीव्र आर्थिक विकास और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण सभी क्षेत्रों में पानी की मांग बढ़ रही है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि भारत की पानी की आवश्यकता जो प्रति वर्ष 1,100 बीसीएम है, 2050 में बढ़कर 1,447 बीसीएम हो जाएगी। मांग और आपूर्ति में लगातार बढ़ रहा अंतर देश की आधे से ज्यादा आबादी को सीधे प्रभावित करेगा।

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