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UN: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा ने भारत के प्रस्ताव को अपनाया, श्रीलंका-बोलीविया ने भी समर्थन किया; जानिए असर
Sat, 02 Mar 2024 05:39 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 02 Mar 2024 05:39 AM IST
सार
यूएनईए ने सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा में की गई प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दरअसल, यह एक ऐसी प्रतिबद्धता है जो सतत विकास के तीन आयामों - एकीकृत, अविभाज्य, अन्योन्याश्रित और पारस्परिक रूप से मजबूत करने पर जोर देती है।
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यूएनईए
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा ने शुक्रवार को केन्या के नैरोबी में आयोजित अपने छठे सत्र में टिकाऊ जीवन शैली पर भारत के प्रस्ताव को अपनाया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि यह श्रीलंका और बोलीविया द्वारा यह सह-प्रायोजित प्रस्ताव था, जिसे सभी भाग लेने वाले सदस्य देशों ने अपनाया।
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बता दें कि UNEA का छठा सत्र 6 फरवरी को शुरू हुआ और शुक्रवार को समाप्त हो गया। मंत्रालय ने आगे बताया कि किस तरह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर्यावरण के लिए जीवन शैली (LiFE आंदोलन) का समर्थन कर रहे हैं। साथ ही देशों से ग्रह-अनुकूल जीवन पद्धतियों को अपनाने और गहन उपभोक्तावादी व्यवहार से दूर जाने का आग्रह कर रहे हैं।
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मंत्रालय ने कहा कि पीएम मोदी ने ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन में इस अवधारणा की कल्पना की थी। उन्होंने 20 अक्तूबर, 2022 को गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उपस्थिति में मिशन LiFE का शुभारंभ किया था।
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सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा में की गई प्रतिबद्धता की पुष्टि
यूएनईए ने सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा में की गई प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दरअसल, यह एक ऐसी प्रतिबद्धता है जो सतत विकास के तीन आयामों - एकीकृत, अविभाज्य, अन्योन्याश्रित और पारस्परिक रूप से मजबूत करने पर जोर देती है। वहीं, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी शिक्षार्थी सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्राप्त करें।
संकल्प व्यवहार स्थायी जीवन शैली की दिशा में व्यवहारिक परिवर्तनों की क्षमता को पहचानता है। इसने 2030 एजेंडा में की गई प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर जगह लोगों को सतत विकास, प्रकृति के साथ सद्भाव में जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक जानकारी और जागरूकता तक पहुंच हो।