'उमर खालिद, वो सब वापस करो जो भारत ने दिया'
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दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने फेसबक पर चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद उनकी तारीफ करते हुए एक पोस्ट लिखा था। इसके बाद उमर की कडी आलोचना हो रही है।
उमर खालिद इसी साल फरवरी में तब चर्चा में आए थे जब उन पर और जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप लगे थे। भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में बुरहान वानी की मौत हो गई थी जिसके बाद वहां बडे पैमाने पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन में अब तक 16 लोगों की मौत हो गई है।
अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे गुवारा से की तुलना
उमर खालिद ने बुरहान वानी के जनाजे की फोटो पोस्ट करते हुए उनती तुलना अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे गुवारा से की और लिखा, "मेरे गिरने के बाद अगर कोई दूसरा मेरी बंदूक उठाकर शूटिंग जारी रखता है तो मुझे कोई परवाह नहीं है। चे गुवारा के ये शब्द बुरहान वानी के शब्द भी हो सकते थे।
बुरहान मौत से नहीं डरते थे। वो पराधीनता से डरते थे। वो पराधीनता से नफरत करते थे। वो आजाद जिए और आजाद मरे। हिंदुस्तान, तुम ऐसे लोगों को कैसे हरा पाओगे जिन्होंने अपने डर पर जीत पा ली हो। बुरहान, तुमको श्रद्धांजलि। मैं कश्मीर के लोगों के साथ हूं।"
विवाद बढ़ने के बाद हटाई फेसबुक पोस्ट
हालांकि कई लोगों की आलोचना के बाद उन्होंने अपने इस विवादित पोस्ट को फेसबुक से हटा दिया लेकिन तब तक उमर खालिद के विरोध में कई लोग कमेंट कर चुके थे। हालांकि कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया। रणधीर झा नाम के फेसबुक यूजर लिखते हैं, "ये बडी बेवकूफाना बात है।
एके 56 हवा में लहराने वाला बुरहान भला कैसे डर को जीत पाया होगा। वो एक डरा हुआ शख्स था और डर का एक माहौल बना रहा था और पाकिस्तान को तो कश्मीर तोहफे में मिलने से रहा। सिर्फ श्रीनगर में रहने वाले कुछ फेशनेबल, धनी लोग आजादी के लिए व्याकुल हुए जा रहे हैं।"
कमेंट में कोई सपोर्ट में तो कई ने लगाई लताड़
इंद्रजीत सिह लिखते हैं, "जैसे अन्याय को तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता उसी तरह से अत्याचार से निपटने के नाम पर आतंकवाद को सही नहीं ठहाराया जा सकता। समझे उमर खालिद।" मोहम्मद फरहान लिखते हैं, "मैं बुरहान वानी जैसे शख्स के एनकाउंटर के लिए भारतीय फौज को बधाई देता हूं।
इस तरह के लोग कश्मीर ही नहीं बाकी के भारत के लिए भी खतरा हैं। वानी जैसे शख्स के जनाजे में इतने ज्यादा लोगों का जाना बडी चिंता की बात है। ये लोग आतंकियों को भारत में घुसने की दावत दे रहे हैं। कश्मीर के अलगाववादी नेता भी यही कर रहे हैं। भारतीय सेना को ऐसे लोगों से और सख्ती से पेश आना चाहिए।"
"मेरा नाम उमर खालिद है और मैं आतंकवादी नहीं हूं।"
फराहन सैयद ने लिखा, "उमर खालिद जैसे बुरहान वानी समर्थक भारत सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें पाकिस्तानी आतंकियों से सुरक्षा दी जाए। रोजगार चाहते हैं, खाना चाहते हैं। भारत से हर किस्म की फंडिंग चाहते हैं और फिर भारत के ही साथ रहना नहीं चाहते। हमसे अलग होना चाहते हो तो हो जाए।
लेकिन वो सब कुछ वापस करो जो हमने तुम्हें पिछले 60 सालों में दिया।" कई लोगों ने उमर खालिद की बात से सहमति भी जताई है। उबैद जरगर ने लिखा, "पूरा कश्मीर तुम्हें प्यार करता है उमर।" देबजी भट्टाचार्य ने लिखा, "मेरा नाम उमर खालिद है और मैं आतंकवादी नहीं हूं।"
दूसरी पोस्ट में लिखा "ट्रोलर आर्मी"
वानी पर किए अपने पोस्ट को हटाने के बाद उमर खालिद ने लिखा, "ट्रोलर आर्मी। मैं अपनी हार स्वीकार करता हूं। हां मैं गलत था। मुझे आप लोगों के साथ वानी की मौत पर जश्न मनाना चाहिए था। उसे आतंकी और गद्दार कहकर बुलाना चाहिए था। कल से मैं भी आप लोगों की हां में हां मिलाउंगा।
हर तरह की हत्याओं, बलात्कार, अत्याचार, आफ्सपा जैसी चीजों का समर्थन करूंगा और देशभक्त कहलाउंगा। मैं सत्ताधारी ताकतों का समर्थक बनूंगा जो कमजोर लोगों को दबाने में लुत्फ लेते हैं। लेकिन आप सभी देशभक्तों से एक सवाल- क्या इससे कश्मीर की हकीकत बदल जाएगी?"