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नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता साफ, ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने भगोड़े कारोबारी के प्रत्यर्पण को दी मंजूरी

Fri, 16 Apr 2021 06:26 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Fri, 16 Apr 2021 06:26 PM IST
सार

  • तेरह हजार करोड़ के पीएनबी घोटाले का आरोपी है नीरव
  • फिलहाल ब्रिटेन की जेल में बंद है भगोड़ा हीरा कारोबारी

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UK government approves extradition of Nirav Modi says CBI official
नीरव मोदी - फोटो : File

विस्तार

ब्रिटेन के गृह विभाग ने 13 हजार करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी में वांछित हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत को प्रत्यर्पित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

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सीबीआई के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकार दी। नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी करने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि गत 25 फरवरी को लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।  ब्रिटिश अदालत के फैसले की जानकारी ब्रिटेन के गृह विभाग को दी गई। इसके बाद नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए अनुमति दी गई।
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अब भी आसान नहीं है प्रत्यर्पण
ब्रिटेन के गृह विभाग ने भले नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी हो, लेकिन उसके पास इस निर्णय को चुनौती देने का विकल्प अभी भी मौजूद है। नीरव मोदी इस फैसले को 14 दिन के अंदर ब्रिटिश अदालत में चुनौती दे सकता है। 
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पीएनबी द्वारा एफआईआर के पहले गायब हो गया था
29 जनवरी 2018 को भारत में नीरव और उसके सहयोगियों के खिलाफ पीएनबी ने एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन नीरव गायब हो गया। इसके बाद उसका परिवार भी भारत से गायब हो गया। नीरव को पहले ही शिकायत और एफआईआर की भनक लग गई थी।


देश की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी का है आरोपी
नीरव मोदी पर देश की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। उसने पीएनबी को 14 हजार 500 करोड़ रुपये का चूना लगाया। इसके बाद वह हीरा ब्रांड के मालिक से भगोड़ा बन गया। भारत की जांच एजेंसियों समेत कनाडा की जांच एजेंसी, इंटरपोल और अमेरिका की एफबीआई भी विभिन्न मामलों में नीरव पर मुकदमा चलाना चाहती हैं। 

क्या है पीएनबी घोटाला
पीएनबी घोटाले को भारत के बैंकिंग इतिहास में सबसे बड़ी धोखाधड़ी करार दिया गया है। इस घोटाले में मुंबई के फोर्ट में स्थित पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा में बैंकरों ने फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) का इस्तेमाल किया। एक वर्ष की अवधि के लिए मोती के आयात के लिए भारतीय बैंकों की शाखाओं में इन एलओयू का उपयोग किया गया, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के नियम के अनुसार शिपमेंट की तारीख से 90 दिनों तक की समयावधि ही निर्धारित है। बैंक अधिकारियों की सांठगांठ से वह एक साल तक इनका इस्तेमाल करता रहा। 

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