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यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार का साक्षात्कार : साझा की अपनी कार्य योजना, बोले- अब 15 देशों में खुलेंगे आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कैंपस
Wed, 09 Feb 2022 07:04 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 09 Feb 2022 07:04 AM IST
सार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने कार्यभार संभालने के बाद अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा से अपनी कार्ययोजना साझा की। प्रो. कुमार ने कहा कि यूजीसी चेयरमैन का पद एक बड़ी जिम्मेदारी है। मेरा पहली प्राथमिकता भारतीय उच्च शिक्षा में बदलाव व सुधार लाने वाली नई शिक्षा नीति 2020 को चरणबद्ध, समयबद्ध तरीके से सभी हितधारकों की सहमति सुनिश्चित करके लागू करना है।
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यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था में नई शिक्षा नीति 2020 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय अब विदेशों में भी अपने कैंपस खोलने जा रही है। पहले चरण में साउथ ईस्ट एशिया, अफ्रीका, नॉर्थ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया के 15 देशों में कैंपस खोलें जाएंगे।
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पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इस बाबत केंद्र सरकार की संबंधित देशों से बात अंतिम चरण में हैं। यहां पर भारतीय डिग्री प्रोग्राम ऑफर किए जाएंगे। इसका मकसद भारतीय उच्च शिक्षा को विदेशों तक पहुंचाना और अंतर्राष्ट्रीय कुटनीतिक संबंधों में सुधार लाना है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने कार्यभार संभालने के बाद अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा से अपनी कार्ययोजना साझा की।
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प्रो. कुमार ने कहा कि यूजीसी चेयरमैन का पद एक बड़ी जिम्मेदारी है। मेरा पहली प्राथमिकता भारतीय उच्च शिक्षा में बदलाव व सुधार लाने वाली नई शिक्षा नीति 2020 को चरणबद्ध, समयबद्ध तरीके से सभी हितधारकों की सहमति सुनिश्चित करके लागू करना है।
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प्रश्न: यूजीसी चेयरमैन के रूप में आपकी कार्ययोजना में प्राथमिकताएं क्या हैं?
उत्तर: यूजीसी जैसी संस्था का चेयरमैन बनना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मेरी सबसे पहली प्राथमिकता नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करना है। दरअसल, आयोग से देशभर की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और सुधार के साथ लाखों-करोड़ों छात्रों का भविष्य का आधार तय होता है। इसीलिए सभी हितधारकों की सह?मति सुनिश्चित करने के साथ समयबद्ध तरीके से विभिन्न योजनाओं को लागू किया जाएगा।
इसमें छात्र किस प्रकार का पाठ्यक्रम, कोर्स, कौशल विकास चाहते हैं का विशेष ध्यान रखना है। पढ़ाई में लचीलापन और बंदिशें समाप्त करना है। बहुविषयक, डिजिटल एजुकेशन पर खास फोकस रहेगा। अब मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का विकल्प मिलने जा रहा है। इससे ड्रॉपआउट की दिक्कत तो दूर होगी, साथ ही सकल नामांकन अनुपात की दर में सुधार आएगा।
प्रश्न: डिजिटल शिक्षा को कैसे प्रमोट किया जाएगा?
उत्तर: स्वयंप्रभा चैनल के माध्यम से ऑनलाइन या फिर तकनीक के माध्यम से डिजिटल शिक्षा के प्लेटफार्म को मजबूत किया जाएगा। यहां पर इंग्लिश के साथ-साथ क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प मिलेगा। बेशक भारतीय भाषाओं में पढ़ाई होने से इंग्लिश की बंदिशें दूर होंगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि छात्र को इंग्लिश भाषा की ज्ञान नहीं होगा। इंग्लिश भाषा में भी उसे दक्ष किया जाएगा, ताकि नौकरी के दौरान उसे आगे बढ़ने में दिक्कत न हो।
डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से सामान्य विश्वविद्यालयों के छात्र आईआईटी, आईआईएम या किसी भी अन्य विदेशी विश्वविद्यालय से भी ऑनलाइन कोर्स करके 40 फीसदी क्रेडिट इकट्ठा कर सकेगा। यह उसके अकेडमिक क्रेडिट बैंक में जमा होंगे। शिक्षकों को विशेष रूप से डिजिटल लिटरेसी की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे नए जमाने के पाठ्यक्त्रस्म के आधार पर पढ़ाई करवाने में दक्ष हों।
प्रश्न: सीयूसीईटी में किस प्रकार से होंगे दाखिले ?
उत्तर: केंद्रीय विश्वविद्यालय संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा (सीयूसीईटी) की मेरिट से शैक्षणिक सत्र 2022-23 में दाखिले होंगे। लेकिन राज्यों के विश्वविद्यालय अपनी मर्जी से इस परीक्षा से स्नातक प्रोग्राम में दाखिले के लिए जुड़ सकते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी दाखिला परीक्षा के आधार पर स्कोर कार्ड जारी करेगी। दाखिला परीक्षा में सामान्य विषयों और विशेष पाठ्यक्रम पर आधारित कोर्स में दाखिले के लिए परीक्षा लेने का भी प्रावधान होगा। स्नातक प्रोग्राम में छात्र जिस विश्वविद्यालय और कोर्स में दाखिले के लिए इच्छुक होगा, उसी के आधार पर उसे दाखिला परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन के दौरान कोर्स चुनना होगा। इसी के आधार पर छात्र को केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सभी विशेष कोर्स में दाखिले का भी प्रावधान किया जा रहा है। हालांकि स्कोर कार्ड और 12वीं कक्षा के अंक का कितना-कितना वैटेज रखा जाए, इसके लिए हितधारकों से अंतिम बैठक अभी बाकी है।