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UCC: भाजपा के तीन बड़े एजेंडों में से दो हो चुके हैं पूरे, तीसरे को भी इसी कार्यकाल में पूरा करने की तैयारी

Fri, 16 Jun 2023 06:33 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 16 Jun 2023 06:33 AM IST
सार

मोदी सरकार की योजना भाजपा के तीन अहम एजेंडों को इसी कार्यकाल में पूरा करने की है। इनमें राम मंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म करने का पार्टी का एजेंडा पूरा हो चुका है। पार्टी का तीसरा अहम एजेंडा समान नागरिक संहिता बचा है।

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UCC: Two of the three big agendas of BJP completed, preparations are on to complete the third one in this term
समान नागरिक संहिता (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक तरफ समान नागरिक संहिता पर उत्तराखंड सरकार की ओर से गठित जस्टिस रंजना देसाई कमेटी की रिपोर्ट तैयार है, तो दूसरी तरफ विधि आयोग ने भी अचानक सभी हितधारकों से इस मामले में सुझाव मांगा है। दरअसल, ऐसा केंद्र सरकार की समान नागरिक संहिता को पूरे देश में लागू करने की मंशा के तहत किया गया है। केंद्र सरकार जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट को मंजूरी मिलने का इंतजार किए बिना इसको पूरे देश में लागू करने के लिए इससे जुड़ी प्रक्रिया पूरी करना चाहती है, जिससे इसे जरूरत के समय लागू करने में देरी न हो।

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मोदी सरकार की योजना भाजपा के तीन अहम एजेंडों को इसी कार्यकाल में पूरा करने की है। इनमें राम मंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म करने का पार्टी का एजेंडा पूरा हो चुका है। पार्टी का तीसरा अहम एजेंडा समान नागरिक संहिता बचा है।
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जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट तैयार होने की सूचना के साथ ही विधि आयोग ने बुधवार रात को समान नागरिक संहिता  पर लोगों, धार्मिक संगठनों सहित सभी हितधारकों के सुझाव मांगे हैं। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, कमेटी की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी जाएगी। सरकार का मानना है कि ऐसे में अदालत का निर्णय आने के बाद अगर प्रक्रिया शुरू की गई तो इसे केंद्रीय स्तर पर लागू करने में देरी हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, हितधारकों से सुझाव हासिल करने के बाद राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के अलावा दूसरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।
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अदालत में चुनौती तय
सरकार का मानना है कि कई कारणों से जस्टिस देसाई कमेटी के मसौदे को अदालत में चुनौती दी जाएगी।

  • समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सभी धर्मों में शादी, तलाक,  गुजारा, कस्टडी, गोद लेने की प्रक्रिया, विवाह की उम्र, गार्जियनशिप से जुड़े एक ही कानून लागू होंगे। इस संबंध में धर्म विशेष के अलग कानून लागू नहीं होंगे।
  • इन सभी मामलों में खासतौर से अल्पसंख्यक समुदाय मुसलमानों से जुड़े संगठन नाराज हैं।
  • ऐसे में ये संगठन मसौदा पेश होने के बाद उत्तराखंड सरकार की ओर से इसे लागू करने की प्रक्रिया को अदालत में हर हाल में चुनौती देंगे।

बेहद सीमित वर्ग विरोध में
हमारा कार्यक्षेत्र उत्तराखंड था। हालांकि, ड्राफ्ट तैयार करते समय कमेटी ने सभी पहलुओं का ध्यान रखा है। लैंगिक समानता, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और जातिगत असमानता को खत्म करने पर विचार किया है। समान नागरिक संहिता के विरोध में बेहद सीमित वर्ग थे। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि मसौदे का सभी पक्ष स्वागत करेंगे। -जस्टिस रंजना देसाई, विशेष कमेटी की प्रमुख



रिपोर्ट को तत्काल स्वीकार करेगी उत्तराखंड सरकार
समान नागरिक संहिता लागू करने में समस्या न हो, इसके लिए भाजपा नेतृत्व ने उत्तराखंड की धामी सरकार को जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट को तत्काल स्वीकार कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। कमेटी इसी महीने के अंत तक सरकार को मसौदा सौंपेगी। ऐसे में धामी सरकार नए महीने के पहले सप्ताह में इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। बता दें कि इसे लागू करने का वादा मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार ने भी किया है।

अदालती सुनवाई के बीच भी जारी रहेगी प्रक्रिया
सरकार की निगाहें अब जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट पेश होने के बाद की परिस्थितियों पर हंै। इस रिपोर्ट पर सरकार खासतौर से न्यायपालिका के रुख को भी भांपना चाहती है। हालांकि, सरकार के सूत्रों का कहना है कि अगर रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी गई तो अदालत की सुनवाई प्रक्रिया के दौरान भी सरकार यूसीसी से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने का सिलसिला जारी रखेगी। वहीं, सरकार को यूसीसी पर न्यायपालिका का समर्थन मिलने का पूरा भरोसा है।

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