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Land On Moon: हिमाचल के दो व्यक्तियों ने चांद पर जमीन खरीदने का दावा किया, क्या यह कानूनी है, जानें नियम

Thu, 10 Aug 2023 06:10 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 10 Aug 2023 06:10 PM IST
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सार
Land On Moon: हिमाचल के हमीरपुर के मेकेनिकल इंजीनियर सौरभ कुमार और एडवोकेट अमित शर्मा ने चांद पर जमीन खरीदने का दावा किया है। हालांकि, चांद पर जमीन खरीदना भारत में गैरकानूनी है, क्योंकि इसने आउटर स्पेश ट्रीटी में हस्ताक्षर किया है।
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Two people from Himachal claimed to have bought land on the moon, if it is legal
चांद पर जमीन - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

अक्सर इस बात को सुनने को मिलता है कि अमुक आदमी ने चांद पर जमीन खरीदी है। कभी सुपरस्टार अभिनेता शाहरूख खान का नाम, तो कभी सुशांत सिंह राजपूत का नाम चांद पर जमीन खरीदने वालों की सूची में पढ़ने को मिला है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के दो व्यक्तियों ने दावा किया है कि उन्होंने चंद्रमा में जमीन खरीदी है। 


इस बीच हमें जानना जरूरी है कि आखिर अभी किसने चंद्रमा की जमीन खरीदने का दावा किया है? अगर जमीन बेची जाती है तो मालिक कौन है? चांद पर जमीन खरीदने का नियम क्या है? आइए जानते हैं...

चंद्रमा
चंद्रमा - फोटो : Pixabay
अभी किसने चंद्रमा की जमीन खरीदने का दावा किया है? 
हिमाचल के हमीरपुर जिले के कोहला पलासड़ी गांव निवासी सौरभ कुमार ने चांद पर जमीन खरीदने का दावा किया है। पेशे से मेकेनिकल इंजीनियर सौरभ की मानें तो उन्होंने चांद पर आठ कनाल जमीन खरीदने के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया था। जिस पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेज भी लॉस एंजल्स की इंटरनेशनल लूनर लैंड अथॉरिटी की तरफ से उन्हें भेज दिए गए हैं।

एक दिन पहले ही हमीरपुर के वार्ड नंबर पांच निवासी एडवोकेट अमित शर्मा ने अपनी बेटी को जन्मदिवस पर चांद पर जमीन खरीद का उपहार देने का दावा किया था। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने साल 2018 में चांद पर जमीन खरीदने की बात कही थी। सुशांत ने भूमि इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री से खरीदने का दावा किया था। 

चंद्रमा की सतह
चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media
चांद पर जमीन खरीदने के लिए क्या कोई नियम है?
चंद्र पर भूमि खरीदने के लगातार दावों से सवाल उठता है कि आखिर चांद किसकी संपत्ति है और यह किसे विरासत में हासिल हुई है? जानकारी के मुताबिक, पृथ्वी पर बसी दुनिया के अधिकांश देशों ने इसे कॉमन हेरिटेज का दर्जा प्रदान किया हुआ है। कॉमन हेरिटेज शब्द का प्रयोग सार्वजनिक विरासत के रूप में किया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि कोई भी इसका निजी इस्तेमाल के लिए प्रयोग नहीं कर सकता है।

कॉमन हेरिटेज पूरी मानवता के लिए होता है। अगर इसका कोई भी निजी प्रयोग नहीं कर सकता है तो खरीद-बिक्री कैसे? इसका सामान्य सा जवाब है कि इसकी कोई आधिकारिक मान्यता होगी नहीं। 

आखिर चांद की जमीन कौन बेच रहा है? 
इस सवाल के कई जवाब में सबसे बड़ा नाम इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री नामक जमीन बेचने वाली एक वेबसाइट का नाम आया है। इस वेबसाइट पर जाते ही आपको कई भाषाओं में 'अंतर्राष्ट्रीय चंद्र भूमि क्षेत्र चांद में आपका स्वागत है। चंद्र रियल एस्टेट, चंद्रमा पर संपत्ति' लिखा हुआ मिलेगा। अन्य जानकारियां दी गई हैं।

चंद्रमा
चंद्रमा - फोटो : Pixabay
क्या चांद पर जमीन बेचना या खरीदना वैध है?
अब सवाल यह उठता है कि चांद अगर कॉमन हेरिटेज है, तो यह संपत्ति इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री वेबसाइट पर कैसे बिक रही है। यह वेबसाइट दावा करती है कि कई देशों ने आउटर स्पेश में इसे जमीन बेचने के लिए अधिकृत किया है। 

जुलाई 1969 में अमेरिकियों के चंद्रमा पर उतरने से पहले अमेरिका और सोवियत संघ में काफी समय से अंतरिक्ष में जाने की दौड़ चल रही थी। इस बीच अटकलें लगाई गईं कि जो पहले पहुंचा वो संसाधनों का दुरुपयोग करेगा। इस कारण से, जनवरी 1967 में भारत समेत 110 देशों ने एक समझौता किया, जिसे आउटर स्पेश ट्रीटी के नाम से जाना जाता है। 

भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और सोवियत संघ ने 'चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों सहित बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में देशों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों पर संधि पर हस्ताक्षर किए। अक्तूबर 1967 में आउटर स्पेश ट्रीटी प्रभावी हुई और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून की नींव बन गई। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र की एक समर्पित एजेंसी यूएनओओएसए है। यूएनओओएसए यानी बाहरी अंतरिक्ष मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय इस संधि की देखभाल करता है।

आउटर स्पेश ट्रीटी औपचारिक रूप से चंद्रमा और अन्य आकाशीय निकायों सहित बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में देशों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली सिद्धांतों पर एक संधि है। इसके मुताबिक आउटर स्पेश में चांद भी शामिल है, जो कॉमन हरिटेज है, जिसका मतलब होता है कि इसका कोई भी निजी इस्तेमाल के लिए प्रयोग नहीं कर सकता है। 

संधि के अनुच्छेद II में कहा गया है, 'चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों सहित बाहरी अंतरिक्ष, संप्रभुता के दावे, उपयोग या कब्जे या किसी अन्य माध्यम से राष्ट्रीय उपयोग के लिए नहीं है।' इसके अनुसार, चंद्रमा पर कोई देश अपना दावा नहीं कर सकता। यह पृथ्वी ग्रह पर रहने वाले सभी लोगों के लिए है। 

हालांकि, संधि व्यक्तियों के लिए नियम निर्दिष्ट नहीं करती है। इस वजह से, कुछ लोगों ने तर्क दिया है कि संपत्ति के अधिकारों को क्षेत्रीय संप्रभुता के बजाय क्षेत्राधिकार के आधार पर मान्यता दी जानी चाहिए। फिर, संधि के अनुच्छेद VI में कहा गया है कि सरकारें किसी भी पक्ष के कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए, यह स्पष्ट है कि संधि सभी सार्वजनिक या निजी संस्थाओं पर लागू होती है।

अनुच्छेद VI के अनुसार, 'संधि के हस्ताक्षरकर्ता देश चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों सहित बाहरी अंतरिक्ष में राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी वहन करेंगे, चाहे ऐसी गतिविधियां सरकारी एजेंसियों द्वारा या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा की जाती हों। इसके साथ ही देश यह भी सुनिश्चित करेंगे कि राष्ट्रीय गतिविधियां वर्तमान संधि में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप की जाएं।' दूसरे शब्दों में, अंतरिक्ष में काम करने वाला कोई भी व्यक्ति, संगठन या व्यवसाय अपनी सरकार के प्रति जवाबदेह है।

चंद्रमा की सतह
चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media
पहली की संधि में खामियों को दूर करने के लिए आया चंद्र समझौता 
चूंकि निजी संपत्ति का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, कुछ लोग इसे एक खामी होने का दावा करते हैं और चंद्रमा पर जमीन बेचने के दावे करते हैं। इस भ्रम को दूर करने के लिए, 18 दिसंबर 1979 को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों ने चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों पर गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले समझौते का प्रस्ताव रखा। इस सम्मेलन का उद्देश्य चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों के उपयोग के लिए कानूनी आधार स्थापित करना था। इसे 'चंद्र समझौते' के नाम से भी जाना जाता है जो 11 जुलाई 1984 से प्रभावी हुआ।

बाह्य अंतरिक्ष संधि की तरह, इस समझौते में भी कहा गया कि चंद्रमा का उपयोग सभी मानव जाति की भलाई के लिए किया जाएगा, न कि किसी व्यक्ति की भलाई के लिए। संधि ने हथियार परीक्षण पर भी प्रतिबंध लगा दिया और घोषित किया कि किए गए किसी भी वैज्ञानिक शोध को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा किया जाएगा और कोई भी कुछ भी दावा नहीं कर सकता है।

इसका मतलब यह है कि ऐसे मिशन हो सकते हैं जहां वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए चंद्रमा पर प्रयोगशालाएं स्थापित कर सकते हैं। लेकिन वे किसी भी तरह यह घोषित नहीं कर सकते कि जमीन पर उनका मालिकाना हक है। इसलिए, यदि कोई आपको यह दावा करते हुए कागज का टुकड़ा देता है कि अब आप चंद्रमा पर अचल संपत्ति के मालिक हैं, तो यह गैरकानूनी है।
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