बिहार: दो डिप्टी सीएम से जातीय संतुलन साधने की कोशिश, नीतीश से किया वादा भी निभाया गया
बिहार चुनाव में बड़ा भाई बनकर उभरी भाजपा ने नए तेवर और नए कलेवर के साथ राज्य में सियासी जमीन मजबूत करने का संदेश दिया है। दो डिप्टी सीएम जदयू के तुलना में अधिक मंत्री और सबसे अहम अपने कोटे से स्पीकर बनाकर भाजपा जदयू पर भारी पड़ी है। वहीं जातीय संतुलन भी बनाया। अब सबकी निगाहें मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं।
नीतीश को मुख्यमंत्री कुर्सी पर बैठा कर भाजपा ने निभाया चुनाव पूर्व का वादा
भाजपा के सामने असली चुनौती जदयू का भी टीम नहीं होने की थी। इसलिए इस बार व्यापक बदलाव की पटकथा तैयार की गई। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर कई दौर में माथापच्ची की गई। भाजपा ने बदलाव का संदेश देने के लिए सबसे पहले नीतीश कुमार और सुशील मोदी की दस साल पुरानी जोड़ी को तोड़ने का फैसला किया।
भले ही सुशील मोदी राज्य विश्व के सबसे कद्दावर नेता हैं, मगर सरकार में उनके रहते भाजपा की छवि जदयू की बी टीम की ही रहती। इसलिए उन्हें राज्य की सियासत से बाहर कर केंद्र में जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया। अब सुशील को नया जिम्मा मिलेगा।
पिछड़ा, अति पिछड़ा, महिला, दलित और अगला पर फोकस
नए मंत्रिमंडल को ध्यान से देखें तो इसमें भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति साफ नजर आ रही है। पार्टी ने दो डिप्टी सीएम के जरिए पिछड़ा अति पिछड़ा वर्ग को संदेश दिया है। खास तौर पर रेणु देवी के जरिए कहीं संदेश दिए गए हैं। रेणु राज्य में पहली महिला डिप्टी सीएम के साथ अति पिछड़ा वर्ग की पहली डिप्टी सीएम है। दलित वर्ग को साधने के लिए रामप्रीत पासवान को जगह दी गई है, जबकि अगड़ों में भूमिहार और ब्राह्मण को साधने के लिए जीवेश मिश्रा और मंगल पांडे को जगह दी गई है।
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